Panchayat Bill Payment System: एमपी में पंचायतों के बिल भुगतान सिस्टम में बड़ा बदलाव, अब दूसरे जिलों की ट्रेजरी से होगा पेमेंट

Panchayat Bill Payment System: ग्रामीण रोजगार से जुड़ी देश की सबसे बड़ी योजना में केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को नए स्वरूप में लागू करते हुए इसका नाम बीजी राम जी योजना कर दिया गया है। इसके साथ ही पंचायतों में लंबे समय से सामने आ रही वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतों को देखते हुए भुगतान प्रक्रिया में भी पूरी तरह नई प्रणाली लागू की गई है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और फर्जी व डुप्लीकेट बिलों पर रोक लगाना है।

योजना का नाम बदला, व्यवस्था भी नई

केंद्र सरकार ने मनरेगा कानून में संशोधन के बाद योजना को बीजी राम जी योजना के नाम से लागू करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सामग्री और कार्यों के भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब तक पंचायत स्तर पर बिल पास होने की व्यवस्था थी, लेकिन नई प्रणाली में इस प्रक्रिया को ट्रेजरी स्तर तक ले जाया गया है, ताकि हर भुगतान की सख्त जांच हो सके।

अब दूसरे जिले की ट्रेजरी से पास होंगे बिल

नई व्यवस्था के तहत पंचायतों द्वारा किए गए कार्यों और खरीदी गई सामग्री के बिल अब उसी जिले की ट्रेजरी से पास नहीं होंगे। हर पंचायत के बिल किसी दूसरे जिले की ट्रेजरी को भेजे जाएंगे। इतना ही नहीं, यह ट्रेजरी हर महीने बदली जाएगी। इसका मकसद यह है कि किसी एक जिले में लंबे समय तक एक ही ट्रेजरी से बिल पास होने की स्थिति न बने और स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की संभावना कम हो।

टीकमगढ़ और गुना-रायसेन का उदाहरण

नए नियमों के तहत इस माह टीकमगढ़ जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के बिल रायसेन जिले की ट्रेजरी को भेजे गए हैं। वहीं टीकमगढ़ की ट्रेजरी में वर्तमान में गुना जिले से जुड़े बिलों की जांच और भुगतान किया जा रहा है। आने वाले महीनों में यह व्यवस्था रेंडम तरीके से बदली जाएगी, ताकि हर जिले की ट्रेजरी अलग-अलग जिलों के भुगतान को संभाले।

ट्रेजरी स्तर पर होगी गहन जांच

अब तक मजदूरी और सामग्री से जुड़े बिल जनपद या जिला पंचायत स्तर पर ही स्वीकृत हो जाते थे। नई प्रणाली में कार्य पूरा होने के बाद पंचायत द्वारा बिल तैयार किया जाएगा। तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया पहले की तरह ही रहेगी। इसके बाद बिल ट्रेजरी को भेजा जाएगा। ट्रेजरी स्तर पर दस्तावेजों की पूरी जांच होगी, जिसमें डीडीओ के डिजिटल हस्ताक्षर, तकनीकी स्वीकृति और जीएसटी से जुड़े विवरण शामिल होंगे। सभी पहलुओं की जांच के बाद ही भुगतान को मंजूरी दी जाएगी।

सीधे खाते में जाएगा भुगतान

बीजी राम जी योजना के तहत कुल खर्च में मजदूरी का हिस्सा 60 प्रतिशत और सामग्री का हिस्सा 40 प्रतिशत तय किया गया है। यदि कोई हितग्राही स्वयं सामग्री उपलब्ध कराता है, तो उसके लिए अलग बिल बनाया जाएगा और उस पर जीएसटी लागू नहीं होगी। वहीं सामग्री आपूर्ति करने वाले वेंडर के लिए जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। पहले कई मामलों में बिना जीएसटी के भी बिल पास हो जाते थे, जिस पर अब रोक लगेगी।

प्रदेशभर में इसी माह से लागू

केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद यह नई व्यवस्था सभी राज्यों में लागू की जा रही है। मध्यप्रदेश में मनरेगा परिषद भोपाल और आयुक्त कोषालय द्वारा जिलों को अलग-अलग ट्रेजरी आवंटित कर दी गई हैं। सभी जिलों में यह प्रणाली इसी माह से प्रभावी हो गई है।

नई प्रणाली से होने वाले फायदे

नई व्यवस्था के लागू होने से फर्जी और डुप्लीकेट बिलों पर लगाम लगेगी। भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और वित्तीय गड़बड़ियों की संभावना काफी हद तक कम होगी। हर लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे बाद में जांच आसान होगी। हालांकि शुरुआत में भुगतान में कुछ देरी हो सकती है और पंचायत स्तर के कर्मचारियों को नई प्रक्रिया समझने में समय लगेगा, लेकिन लंबे समय में यह बदलाव व्यवस्था को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने वाला माना जा रहा है।

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