Outsourcing Employees Rule Change MP: मध्य प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी विभाग को सीधे आउटसोर्स के जरिए कर्मचारी रखने की छूट नहीं होगी। इसके लिए पहले वित्त विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का यह कदम जहां नियमित भर्तियों को बढ़ावा देने की दिशा में देखा जा रहा है, वहीं इससे हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी पर अनिश्चितता भी गहरा गई है।
पुराने निर्देश हुए निरस्त
प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों को आउटसोर्स के माध्यम से भरने से जुड़े वर्ष 2023 के निर्देश अब समाप्त कर दिए गए हैं। उस समय विभागों को यह छूट दी गई थी कि वे तात्कालिक जरूरत के आधार पर सीधे आउटसोर्स एजेंसियों से कर्मचारी रख सकें। लेकिन अब सरकार ने साफ कर दिया है कि ये निर्देश मौजूदा परिस्थितियों में लागू नहीं माने जाएंगे।
वित्त विभाग ने जारी किया आदेश
वित्त विभाग के उप सचिव विवेक कुमार घारू ने इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को सूचना जारी की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 2023 में जारी निर्देश अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं, इसलिए उन्हें रद किया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि भविष्य में यदि किसी विभाग को आउटसोर्स के जरिए पद भरने की आवश्यकता महसूस होती है, तो पहले वित्त विभाग से अनुमति लेना जरूरी होगा।
2023 के निर्देशों में क्या था
वर्ष 2023 में जारी किए गए आदेश में विभागाध्यक्षों को कई अधिकार दिए गए थे। इसमें यह प्रावधान था कि विभाग अपनी आवश्यकता के अनुसार पदों को चिन्हित कर सकते हैं, आउटसोर्स एजेंसी का चयन कर सकते हैं, बजट की व्यवस्था कर सकते हैं और निविदा राशि का आकलन भी स्वयं कर सकते हैं। लेकिन अब इन सभी व्यवस्थाओं पर रोक लग गई है।
इसलिए लिया गया यह फैसला
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बीते कुछ समय से प्रदेश में लगातार नियमित भर्तियां की जा रही हैं। ऐसे में आउटसोर्स व्यवस्था के लिए दिए गए पुराने निर्देशों की जरूरत नहीं रह गई थी। सरकार का मानना है कि स्थायी और नियमित नियुक्तियों से प्रशासनिक कार्यों में स्थिरता आएगी और बार-बार एजेंसी बदलने की समस्या भी खत्म होगी।
अब क्या होगी प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत किसी भी विभाग को यदि अस्थायी तौर पर आउटसोर्स के जरिए कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है, तो उसे पहले वित्त विभाग के सामने अपना प्रस्ताव रखना होगा। वित्त विभाग से अनुमति मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। इससे आउटसोर्स नियुक्तियों पर सीधा नियंत्रण स्थापित हो जाएगा।
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12000 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट
इस फैसले का असर बिजली वितरण कंपनियों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में करीब 12 हजार आउटसोर्स कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों को 31 मार्च के बाद नौकरी जाने का खतरा नजर आ रहा है, क्योंकि मौजूदा एजेंसियों की टेंडर अवधि इसी तारीख को समाप्त हो रही है।
नई निविदा प्रक्रिया में देरी
अब तक नई टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। सूत्रों के अनुसार ऊर्जा विभाग से जुड़े आवश्यक दस्तावेज अभी तक तैयार नहीं किए जा सके हैं। इसी कारण वितरण कंपनियां नई निविदा जारी करने में असमर्थ हैं। यदि समय रहते प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो कर्मचारियों की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
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हर साल बदलती है एजेंसी
बताया जाता है कि बिजली वितरण कंपनियां अलग-अलग कार्यों के लिए आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। यह पूरी व्यवस्था टेंडर के जरिए चलती है और आमतौर पर हर साल 31 मार्च को टेंडर की अवधि समाप्त हो जाती है। अधिकांश मामलों में एजेंसी बदल जाती है, लेकिन कर्मचारी वही रहते हैं और केवल उनका नियोक्ता बदलता है। इस बार प्रक्रिया अटकने से कर्मचारियों में चिंता बढ़ गई है।
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