New Insurance Bill 2025: देश के बीमा क्षेत्र में लंबे समय से जिन सुधारों की चर्चा हो रही थी, उन्हें अब ठोस रूप मिलता दिखाई दे रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में सबका बीमा सबकी रक्षा विधेयक 2025 पेश किया, जिसे सदन ने मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने से बीमा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, प्रतिस्पर्धा तेज होगी और आम लोगों को बेहतर व सस्ती बीमा योजनाओं का लाभ मिलेगा।
तीन पुराने कानूनों में बड़े संशोधन का प्रस्ताव
यह विधेयक केवल एक नया कानून नहीं है, बल्कि इसके जरिए बीमा क्षेत्र से जुड़े तीन अहम कानूनों में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। इनमें बीमा अधिनियम 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम 1956 और बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण अधिनियम 1999 शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन कानूनों में समय के साथ बदलाव जरूरी हो गया था, ताकि मौजूदा आर्थिक जरूरतों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बीमा सेक्टर को मजबूत किया जा सके।
एफडीआई सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का फैसला
विधेयक का सबसे अहम प्रावधान बीमा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करना है। इसके तहत अब विदेशी कंपनियां भारतीय बीमा बाजार में पूरी हिस्सेदारी के साथ निवेश कर सकेंगी। सरकार का दावा है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों के लिए भारत पूरी तरह खुल जाएगा और विदेशी पूंजी के साथ-साथ नई तकनीक और प्रबंधन कौशल भी देश में आएगा।
सरकार का तर्क है कि जब ज्यादा कंपनियां बाजार में उतरेंगी, तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इसका सीधा असर बीमा प्रीमियम पर पड़ेगा और ग्राहकों को कम कीमत पर बेहतर कवर मिल सकेगा। साथ ही, बीमा उत्पादों में भी विविधता देखने को मिलेगी।
वित्त मंत्री का बयान: प्रतिस्पर्धा से होंगे बेहतर रेट
लोकसभा में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ज्यादा विदेशी निवेश आने से बीमा बाजार में नए ऑपरेटर आएंगे, जिससे ग्राहकों को सस्ती पॉलिसियां मिलेंगी। उन्होंने कहा कि एकाधिकार की स्थिति में उपभोक्ताओं को उतना लाभ नहीं मिलता, जितना प्रतिस्पर्धी माहौल में मिलता है। उनका कहना था कि जितनी अधिक प्रतिस्पर्धा होगी, उतनी ही बेहतर दरें सामने आएंगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता केवल निजी या विदेशी कंपनियों को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों को मजबूत करना भी है। वित्त मंत्री के अनुसार, वर्ष 2014 के बाद से सरकार लगातार पब्लिक सेक्टर इंश्योरेंस कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए कदम उठा रही है।
री-इंश्योरेंस सेक्टर को मिलेगा प्रोत्साहन
विधेयक में री-इंश्योरेंस क्षेत्र को मजबूत करने पर भी खास ध्यान दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, विदेशी री-इंश्योरेंस कंपनियों के लिए नेट ओन्ड फंड की न्यूनतम सीमा को 5000 करोड़ रुपये से घटाकर 1000 करोड़ रुपये किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से ज्यादा वैश्विक री-इंश्योरेंस कंपनियां भारत में काम करने के लिए आकर्षित होंगी। इससे घरेलू री-इंश्योरेंस क्षमता बढ़ेगी और जोखिम प्रबंधन व्यवस्था और मजबूत होगी।
एलआईसी को मिलेगी ज्यादा संचालन स्वतंत्रता
इस विधेयक में भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। सरकार एलआईसी को अधिक ऑपरेशनल आजादी देना चाहती है। इसके तहत एलआईसी अपने जोनल ऑफिस खोलने के फैसले स्वतंत्र रूप से ले सकेगी। इसके अलावा, विदेशी बाजारों में काम करते समय एलआईसी को वहां के स्थानीय कानूनों के अनुसार अपने कारोबार को ढालने की सुविधा भी मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे एलआईसी वैश्विक स्तर पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेगी।
बीमा एजेंटों और मध्यस्थों के लिए आसान प्रक्रिया
नए कानून के लागू होने के बाद बीमा एजेंटों और अन्य मध्यस्थों के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसका मतलब यह होगा कि उन्हें बार-बार लाइसेंस रिन्यू कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार इसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। इससे एजेंटों को राहत मिलेगी और बीमा सेवाओं का विस्तार तेजी से हो सकेगा।
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शेयर बाजार और उद्योग पर संभावित असर
बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की घोषणा के बाद शेयर बाजार में भी हलचल की संभावना जताई जा रही है। एलआईसी, एसबीआई लाइफ और एचडीएफसी लाइफ जैसी सूचीबद्ध बीमा कंपनियों के शेयरों पर इसका असर दिख सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार अगले दस वर्षों में भारतीय बीमा उद्योग की दिशा और दशा को पूरी तरह बदल सकता है।
राज्यसभा में अन्य विधेयक पर चर्चा
इसी दौरान राज्यसभा ने Appropriation (No. 4) Bill 2025 पर चर्चा के बाद उसे लोकसभा को वापस कर दिया। संविधान के प्रावधानों के अनुसार, मनी बिल केवल लोकसभा में पेश होता है। राज्यसभा ऐसे विधेयकों को अस्वीकार नहीं कर सकती, बल्कि केवल चर्चा कर सुझावों के साथ लौटाती है।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
विधेयक पर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने चर्चा की शुरुआत करते हुए सवाल उठाया कि सरकार ने इतनी जल्दबाजी में यह विधेयक क्यों पेश किया। उन्होंने कहा कि विधेयक दोपहर साढ़े बारह बजे पेश हुआ और कुछ ही घंटों बाद इस पर चर्चा शुरू हो गई।
टैगोर ने यह भी कहा कि बीमा केवल पॉलिसी और प्रीमियम का मामला नहीं है, बल्कि यह जोखिम से सुरक्षा देने का माध्यम है। उन्होंने सवाल उठाया कि सुरक्षा एक अधिकार है या सिर्फ एक उत्पाद। कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि एफडीआई सीमा बढ़ाने का फैसला जरूरत से ज्यादा विचारधारा से प्रेरित है।
वहीं, भाजपा सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान में देश में 70 से 75 लाख बीमा एजेंट काम कर रहे हैं। उनका दावा था कि एफडीआई सीमा बढ़ने के बाद आने वाले वर्षों में एजेंटों की संख्या दोगुनी हो सकती है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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