New Income Tax Act 2025: 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया आयकर अधिनियम, जानें क्या बदलेगा और किसे मिलेगा सीधा फायदा
New Income Tax Act 2025: 64 साल पुराने कानून में बड़ा बदलाव, भाषा होगी आसान, दंड प्रावधानों में राहत और ‘कर वर्ष’ की नई व्यवस्था लागू

New Income Tax Act 2025: देश में कर व्यवस्था को सरल और स्पष्ट बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। नया आयकर अधिनियम 2025 अब कानून का रूप ले चुका है और 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसी विषय पर बैतूल में एक जागरूकता कार्यशाला आयोजित कर करदाताओं और विद्यार्थियों को इसके प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई।
बैतूल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, नई दिल्ली के निर्देशों के तहत आयकर कार्यालय बैतूल द्वारा विवेकानंद विज्ञान महाविद्यालय परिसर में नए आयकर अधिनियम 2025 पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर कर सलाहकारों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, व्यापारियों, सामान्य करदाताओं तथा वाणिज्य संकाय के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य नए कानून की विशेषताओं और उसमें किए गए बदलावों को सरल भाषा में समझाना था।
आयकर कानून में बदलाव की आवश्यकता क्यों
कार्यक्रम में बताया गया कि आयकर अधिनियम एक स्थिर नहीं बल्कि गतिशील कानून है। देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में समय-समय पर परिवर्तन होते रहते हैं। इन्हीं बदलावों के अनुरूप कर कानूनों को भी अद्यतन करना जरूरी होता है। अर्थव्यवस्था की स्थिति, राजकोषीय नीतियां, सरकारी प्राथमिकताएं, मुद्रा दरें, आय के स्रोत और वैश्विक वित्तीय रुझानों के अनुसार हर वर्ष इसका अध्ययन और संशोधन किया जाता है।
1961 के कानून में हुए हजारों संशोधन
वर्तमान आयकर अधिनियम वर्ष 1961 में लागू हुआ था। पिछले 64 वर्षों में वित्त अधिनियमों के माध्यम से इसमें 4000 से अधिक संशोधन किए जा चुके हैं और लगभग 65 बार इसमें बदलाव हुआ है। लगातार संशोधनों के कारण कानून जटिल और विस्तृत होता गया। जुलाई 2024 के बजट भाषण में वित्त मंत्री ने इसकी व्यापक समीक्षा की घोषणा की थी। उद्देश्य था कि कानून को संक्षिप्त, स्पष्ट और आम लोगों के लिए समझने योग्य बनाया जाए।
नए आयकर अधिनियम की खास बातें
नया आयकर अधिनियम 2025 संसद के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त कर चुका है। इसकी भाषा पहले की तुलना में सरल रखी गई है। अनावश्यक प्रावधानों को हटाया गया है। लगभग 1200 प्रावधानों और 900 स्पष्टीकरणों को हटाकर उन्हें उपधाराओं में समाहित किया गया है। जो विषय पहले अलग-अलग स्थानों पर बिखरे हुए थे, उन्हें एक स्थान पर व्यवस्थित कर दिया गया है ताकि स्पष्टता बनी रहे।
कानून को अधिक पठनीय बनाने के लिए तालिकाओं और सूत्रों का उपयोग किया गया है। अधिकतर बदलाव करदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। पहले पूर्व वर्ष और निर्धारण वर्ष जैसी दो अलग-अलग परिभाषाएं थीं, जिन्हें अब एक ही शब्द ‘कर वर्ष’ में समाहित कर दिया गया है।
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दंड प्रावधानों में भी किया गया बदलाव
नए अधिनियम में कई कर अपराधों के लिए सजा की अवधि कम की गई है। सश्रम कारावास की जगह सामान्य कारावास का प्रावधान किया गया है। कुछ अपराधों के लिए केवल जुर्माने की व्यवस्था रखी गई है। इस प्रकार दंड व्यवस्था को भी अधिक संतुलित और व्यावहारिक बनाया गया है।
सरल भाषा से बढ़ेगा अनुपालन
नए कानून में लैटिन शब्दों के स्थान पर सामान्य अंग्रेजी शब्दों का उपयोग किया गया है। इससे आम करदाता के लिए नियमों को समझना आसान होगा। उम्मीद जताई गई कि सरल और स्पष्ट प्रावधानों से स्वैच्छिक कर अनुपालन में वृद्धि होगी और कर संग्रह बढ़ेगा। साथ ही करदाताओं द्वारा लंबे समय से दिए जा रहे कई सुझावों को भी इसमें शामिल करने का प्रयास किया गया है।
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विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान वित्तीय बिल 2026 में प्रस्तावित बदलावों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। इसके अलावा वित्त विधेयक 2026 में वर्णित विदेशी संपत्ति के प्रकटीकरण की योजना फास्ट डीएस 2026 के बारे में संक्षिप्त जानकारी साझा की गई। उपस्थित विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
कार्यक्रम के अंत में बताया गया कि केंद्र सरकार ने नए अधिनियम के माध्यम से कर प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और करदाता हितैषी बनाने का प्रयास किया है, जिससे आम नागरिक भी आसानी से नियमों का पालन कर सकें और देश की आर्थिक प्रगति में योगदान दे सकें।
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