Natural Farming Success Story: प्राकृतिक खेती से बदली जिंदगी: किसान पूजा माहौरे बनीं आत्मनिर्भर, हर महीने कमा रहीं करीब 40 हजार रुपये
Natural Farming Success Story: रसायन छोड़ प्राकृतिक खेती और पशुपालन अपनाया, 10 एकड़ खेत वाली महिला किसान बनीं आत्मनिर्भर

Natural Farming Success Story: मेहनत, सीखने की इच्छा और सही दिशा में उठाया गया कदम किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकता है। छिंदवाड़ा जिले के ग्राम रोहनाकला की महिला किसान पूजा माहौरे इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। कभी खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे से परेशान रहने वाली पूजा आज प्राकृतिक खेती और पशुपालन के जरिए आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। अपनी मेहनत और नए प्रयोगों के दम पर वे हर महीने लगभग 40 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही हैं और क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
जब खेती से बढ़ने लगी चिंता
पूजा माहौरे के पास लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि है। पहले वे परंपरागत तरीके से खेती करती थीं, जिसमें रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग किया जाता था। समय बीतने के साथ खेती की लागत बढ़ती चली गई और जमीन की उर्वरता भी प्रभावित होने लगी। इससे पैदावार और मुनाफा दोनों कम हो गए। इस स्थिति ने पूजा और उनके परिवार के सामने खेती को लेकर चिंता खड़ी कर दी।
प्रशिक्षण से मिली उपयोगी जानकारी
इसी दौरान कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के माध्यम से उन्हें कृषि सखी के रूप में काम करने का मौका मिला। इस दौरान उन्हें नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में उन्हें बीजामृत, जीवामृत, पंचगव्य, निर्मास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक घोल तैयार करने और उनका उपयोग करने की जानकारी मिली। प्रशिक्षण से मिली जानकारी ने उनकी सोच को नई दिशा दी। उन्होंने अपने खेतों में इन तरीकों को अपनाना शुरू किया और धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाए।
प्राकृतिक खेती से बढ़ी आय
आज पूजा माहौरे अपने खेत के लगभग एक एकड़ हिस्से में रसायन मुक्त सब्जियों की खेती कर रही हैं। पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगाई गई सब्जियों की बाजार में अच्छी मांग है। वे इन सब्जियों को प्राकृतिक जैविक हाट बाजार में बेचती हैं, जहां उन्हें अच्छा मूल्य मिल जाता है। सब्जियों की बिक्री से उन्हें हर महीने करीब 10 हजार रुपये का शुद्ध लाभ मिल रहा है।
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पशुपालन बना अतिरिक्त कमाई का जरिया
खेती के साथ-साथ पूजा माहौरे ने पशुपालन को भी अपनाया। उन्होंने देसी गिर और साहीवाल नस्ल की 10 गायों का पालन शुरू किया। इन गायों से मिलने वाले दूध की बिक्री से उन्हें हर महीने लगभग 30 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। इस तरह प्राकृतिक खेती और पशुपालन के संयोजन से उनकी कुल अतिरिक्त आय लगभग 40 हजार रुपये प्रति माह तक पहुंच गई है।
मेहनत को मिला सम्मान
कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत आयोजित जिला स्तरीय मिलेट मेले में पूजा माहौरे ने प्राकृतिक और जैविक सब्जियों की प्रदर्शनी लगाई थी। उनकी पहल और मेहनत को लोगों ने खूब सराहा। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए संयुक्त संचालक कृषि और उपसंचालक कृषि ने उन्हें प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
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दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
आज पूजा माहौरे अपने अनुभव आसपास के किसानों और खासकर महिलाओं के साथ साझा करती हैं। वे उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी सफलता यह दिखाती है कि यदि किसान कम लागत वाली प्राकृतिक खेती और पशुपालन को अपनाएं तो खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है और ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं।
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