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Multai News: अधूरा पड़ा है काम और ठेकेदार को कर दिया सवा करोड़ का भुगतान, पार्षदों ने मचाया हंगामा

Multai News: The work is incomplete and rice has been paid 1.25 crores, the cradles stormed

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▪️राकेश अग्रवाल, मुलताई 

नगर पालिका में आज परिषद की बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न मुद्दों को लेकर भाजपा पार्षदों ने जानकर हंगामा मचाया। वहीं कुछ मुद्दों पर कांग्रेस पार्षद भी अधिकारियों की कार्य प्रणाली से नाराज दिखे।

नगर में चल रहे सीवर लाइन के काम का एक महीने के भीतर लगभग सवा करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। जिसको लेकर दोनों ही दलों के पार्षदों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और इस पूरे मामले में जांच की मांग की है। भाजपा की पार्षद और पूर्व नगर पालिका की अध्यक्ष वर्षा गडेकर ने इस बात को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है कि संचित निधि से ठेकेदार को भुगतान किया जा चुका है, जो गलत है। इधर भाजपा के पार्षद अजय यादव ने नगर में खरीदे गए एलइडी लाइट और उनकी मरम्मत में जो राशि खर्च की गई है उसको लेकर आपत्ति उठाते हुए जांच की मांग की है।

आज की बैठक में कुल 22 प्रस्ताव रखे गए थे, जिसमें से अधिकांश प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया है वहीं कुछ प्रस्ताव आगामी बैठक के लिए रखे गए हैं। बैठक में यह प्रस्ताव भी लिया गया है कि साप्ताहिक बाजार सहित अन्य बाजारों की ठेका नीलामी को निरस्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही बाजार में छोटे दुकानदारों, सब्जी विक्रेताओं, रेहडी वालों वालों से शुल्क नहीं लिया जाएगा। सभी पार्षदों ने इस बात को लेकर आपत्ति जताई कि जब भी कोई टीम में बाहर से आती है इसकी जानकारी पार्षदों को नहीं दी जाती है जो गलत है।

कांग्रेसी पार्षद बोली अधिकारी के कारण मायके नहीं जा पाई महिला पार्षद…

कांग्रेसी पार्षद अंजलि शिवहरे ने बैठक में बोला कि हर बार बैठक मुख्य त्योहारों के एक दिन पहले ली जाती है। अब राखी का त्यौहार आने वाला है और उसके पहले परिषद की बैठक ली गई है। जबकि इस बारे में पार्षदों से कोई बात नहीं की गई। अधिकारियों के कारण महिला पार्षद अपने मायके नहीं जा पा रही है। जिसके लिए अधिकारियों को शर्म आनी चाहिए।

ठेकेदार से ऐसा कौन सा फायदा मिल रहा था जिसके लिए कर दिया सवा करोड़ का

सीवर लाइन के ठेकेदार को सवा करोड़ रुपए का भुगतान करने के मामले में भाजपा की पार्षद वर्षा गडेकर ने परिषद में खुलेआम पूछा कि ठेकेदार से ऐसा कौन सा लाभ मिलना था जिसके लिए उसे ताबड़तोड़ सवा करोड रुपए का भुगतान कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के भुगतान की इतनी चिंता थी कि उसके लिए पत्र तक लिख दिए गए जबकि अधिकारियों ने कर्मचारियों के वेतन के लिए कभी पत्र नहीं लिखा है। अभी ठेकेदार का काम अधूरा है, लेकिन उसे अधिकांश भुगतान कर दिया गया है।

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