MP Weather Forecast: क्या सितंबर में भी बरसेगा मानसून या हो जाएगा बिदा, मौसम विभाग का बड़ा अपडेट
MP Weather Forecast: पिछले 2 दिनों से प्रदेश में मानसून का सिस्टम कमजोर पड़ा है। इससे किसी भी जिले में भारी बारिश नहीं हो रही है। दूसरी ओर कई जिले ऐसे हैं जहां पर अभी तक सामान्य बारिश भी नहीं हुई है। ऐसे में लोगों को यह चिंता सता रही है कि क्या अब मानसून फिर लौटेगा या बिदा हो जाएगा।
इसे लेकर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सितंबर के पूरे महीने बारिश के सिस्टम सक्रिय (MP Weather Forecast) रहेंगे। इस दौरान लगभग 22 दिन प्रदेश में कहीं न कहीं बारिश होती रहेगी। इसका सीधा फायदा उन जिलों को मिलेगा, जहां अभी तक बारिश कम हुई है। किसानों के लिए यह राहत की खबर है क्योंकि खरीफ की फसलों को इस समय पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
प्रदेश में औसत का आंकड़ा पार
मध्यप्रदेश में अब तक औसतन 41 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है, जबकि अब तक की सामान्य बारिश 33 इंच के करीब है। यानी इस बार अब तक करीब 8 इंच ज्यादा पानी गिरा है। प्रदेश (MP Weather Forecast) की सामान्य औसत बारिश 37 इंच है और यह आंकड़ा पिछले सप्ताह ही पार हो गया। इस तरह पूरे राज्य में तो औसत से बेहतर स्थिति बनी है, हालांकि कुछ जिले अब भी पीछे चल रहे हैं।

भोपाल और आसपास का हाल
राजधानी भोपाल में बीते सप्ताह भरपूर बारिश हुई। यहां बड़ा तालाब लबालब हो गया और भदभदा डैम के गेट खोलने पड़े। इसके अलावा कलियासोत डैम भी लगभग पूरा भर चुका है। भोपाल संभाग के अन्य जिले जैसे राजगढ़, रायसेन और विदिशा ने भी बारिश का कोटा पूरा कर लिया है। अब यहां हल्की-फुल्की बरसात ही जारी रहने के आसार (MP Weather Forecast) हैं।
कई जिलों को चाहिए और बारिश
इंदौर में शुरुआत में बारिश कम हुई थी, लेकिन पिछले 7 दिनों में 10 इंच पानी गिर गया। इससे कुल बारिश का आंकड़ा 31 इंच तक पहुंच गया और 90 प्रतिशत कोटा पूरा हो गया। हालांकि, संभाग के अन्य जिलों जैसे बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में हालात संतोषजनक नहीं हैं। इन जगहों पर सामान्य से काफी कम पानी गिरा है और अब भी किसानों की चिंता बरकरार है। मौसम विभाग का अनुमान (MP Weather Forecast) है कि यहां आने वाले दिनों में भारी बारिश की संभावना कम है।

जबलपुर और पूर्वी हिस्से की स्थिति
जबलपुर संभाग में मानसून ने अच्छी पकड़ (MP Weather Forecast) बनाई है। आठ जिलों में से छह जिलों में कोटा पूरा हो चुका है। मंडला सबसे आगे है, जहां 56 इंच बारिश दर्ज की गई। जबलपुर और छिंदवाड़ा में अभी करीब 7 से 8 प्रतिशत बारिश बाकी है। लगातार बारिश के कारण यहां नदियों और तालाबों में जलस्तर सामान्य से अधिक हो गया है।
उज्जैन संभाग के बेहतर हो रहे हालात
उज्जैन संभाग की स्थिति भी धीरे-धीरे बेहतर हो रही है। यहां पहले बारिश का अभाव था, लेकिन अब कुछ जिलों में हालात सुधरे हैं। फिर भी शाजापुर सबसे पिछड़ा हुआ है, जहां 27 इंच से कम पानी गिरा है। उज्जैन शहर में भी अब तक 30 इंच से कम बारिश हुई है, जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में जल संकट (MP Weather Forecast) का डर बना हुआ है।

ग्वालियर और चंबल में रिकॉर्ड बारिश
ग्वालियर संभाग इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। यहां के पांच जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। गुना और शिवपुरी में सामान्य से 74 प्रतिशत ज्यादा पानी गिरा है। गुना जिले में तो पूरे सीजन में अब तक 65 इंच बारिश दर्ज की गई, जो पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा है। श्योपुर जिले की स्थिति भी खास रही है, जहां सामान्य से 213 प्रतिशत ज्यादा पानी गिर चुका है।
इन जिलों में बेहद कम बरसात
एक तरफ जहां श्योपुर और गुना जैसे जिलों में सामान्य से कहीं ज्यादा पानी गिरा, वहीं दूसरी तरफ बुरहानपुर में 26 इंच भी बारिश नहीं हुई। इसी तरह धार, खरगोन और शाजापुर जैसे जिलों में 30 इंच तक का आंकड़ा भी पार नहीं हो पाया। हालांकि, बड़वानी जिले ने औसत बारिश के आधार पर कोटा पूरा कर लिया है। मौसम विभाग को उम्मीद (MP Weather Forecast) है कि सितंबर के बाकी दिनों में इन पिछड़े जिलों की स्थिति भी सुधर सकती है।
इन जिलों में पानी ही पानी
अभी तक 30 जिलों में मानसून का कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया शामिल हैं। इनमें से कई जिलों में सामान्य से डेढ़ गुना ज्यादा पानी गिर चुका है।
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इन जिलों में सबसे कम वर्षा
प्रदेश की ज्यादातर तस्वीर बेहतर होने के बावजूद इंदौर और उज्जैन संभाग अभी भी चिंता का कारण बने हुए हैं। यहां बारिश की कमी (MP Weather Forecast) साफ देखी जा सकती है। बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन और शाजापुर जैसे जिले सबसे कम बारिश वाले जिलों की सूची में शामिल हैं। किसानों की उम्मीदें अब सितंबर की बरसात पर टिकी हुई हैं।
पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में बेहतर हालात
पूर्वी मध्यप्रदेश यानी जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में मानसून पूरी तरह सक्रिय (MP Weather Forecast) रहा। यहां लगातार स्ट्रॉन्ग सिस्टम बने, जिससे न केवल अच्छी बारिश हुई बल्कि कई जगह बाढ़ जैसे हालात बन गए। मंडला, छतरपुर, टीकमगढ़ और उमरिया जैसे जिलों में नदियां उफान पर रहीं। उत्तरी इलाके, खासकर ग्वालियर और चंबल में भी पूरे सीजन भर पानी बरसता रहा और अब यहां का जलस्तर सामान्य से कहीं ऊपर है।
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