MP Transfer Policy: एमपी में ट्रांसफर नीति में फिर बदलाव, स्थान निर्धारण को लेकर नया नियम लागू, इन्हें मिले पॉवर

MP Transfer Policy: मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने एक बार फिर ट्रांसफर पॉलिसी में अहम संशोधन किया है। इस बदलाव के बाद असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति और स्थान निर्धारण से जुड़ी वर्षों पुरानी प्रक्रिया बदल गई है। विभाग के इस फैसले को जहां राहत के रूप में देखा जा रहा है, वहीं इसे लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं।

असिस्टेंट प्रोफेसरों के नियमों में बड़ा बदलाव

उच्च शिक्षा विभाग ने असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति और स्थानांतरण से जुड़े नियमों में संशोधन कर दिया है। अब तक व्यवस्था यह थी कि किसी भी नव नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर को दो साल का प्रोबेशन पीरियड पूरा करने के बाद ही स्थानांतरण के लिए पात्र माना जाता था। इस अवधि से पहले उनका तबादला नहीं किया जा सकता था। नए बदलाव के बाद यह शर्त समाप्त कर दी गई है।

अब कॉलेज और विश्वविद्यालय को मिलेगा अधिकार

संशोधित नीति के तहत अब विश्वविद्यालय या संबंधित कॉलेज प्रबंधन को यह अधिकार दिया गया है कि वे आवश्यकता के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसरों का स्थान निर्धारण कर सकें। इसका मतलब यह है कि प्रोबेशन पीरियड पूरा होने का इंतजार किए बिना ही शिक्षकों को जरूरत वाले संस्थानों में पदस्थ किया जा सकेगा।

महिला शिक्षकों को मिलेगी राहत

इस फैसले से विशेष रूप से महिला असिस्टेंट प्रोफेसरों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कई महिला शिक्षक पारिवारिक कारणों से दूरस्थ या असुविधाजनक स्थानों पर पदस्थ हैं। नई व्यवस्था के तहत उन्हें अपेक्षाकृत अनुकूल स्थानों पर पदस्थ किया जा सकेगा। इसके अलावा पारिवारिक जिम्मेदारियों से जूझ रहे अन्य शिक्षकों को भी इससे राहत मिल सकती है।

विभाग ने क्यों बदली नीति

उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि यह निर्णय कॉलेजों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। कई बार ऐसा देखा गया है कि नए असिस्टेंट प्रोफेसरों को उन कॉलेजों में भेज दिया जाता है, जहां शिक्षकों की संख्या पहले से पर्याप्त होती है। वहीं कुछ अन्य कॉलेजों में लंबे समय तक शिक्षकों की कमी बनी रहती है। नई नीति से इस असंतुलन को दूर करने में मदद मिलेगी।

शिक्षाविदों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

हालांकि इस बदलाव को लेकर शिक्षाविदों के बीच मतभेद भी हैं। कुछ शिक्षकों का मानना है कि इससे कॉलेजों में स्थायित्व प्रभावित हो सकता है और बार-बार स्थान परिवर्तन से शैक्षणिक माहौल पर असर पड़ सकता है। वहीं विभाग का दावा है कि इस व्यवस्था से शिक्षण कार्य बाधित नहीं होगा, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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