MP Medicinal Crops Mandi Policy: बड़ा फैसला… अब हर मंडी में बिकेंगी औषधीय फसलें, किसानों को मिलेगा बेहतर दाम
MP Medicinal Crops Mandi Policy: Big decision... Now medicinal crops will be sold in every market, farmers will get better prices.

MP Medicinal Crops Mandi Policy: मध्य प्रदेश के औषधीय खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए दूर-दराज की मंडियों का रुख नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने औषधीय फसलों की खरीद व्यवस्था को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
क्या है नया फैसला
राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि औषधीय फसलों की खरीद अब प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों में की जाएगी। इस व्यवस्था की शुरुआत 15 प्रमुख औषधीय फसलों से की जा रही है। इसके लिए सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है और आम लोगों से सुझाव भी मांगे हैं। सुझाव देने के लिए छह सप्ताह का समय निर्धारित किया गया है। सुझावों पर विचार के बाद इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
किसानों को होगा फायदा
इस फैसले से किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए मंदसौर और नीमच जैसे शहरों तक नहीं जाना पड़ेगा। इससे परिवहन का खर्च कम होगा और समय की बचत भी होगी। साथ ही स्थानीय मंडियों में बिक्री होने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में बढ़ रही औषधीय खेती
मध्य प्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। यहां 46 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में औषधीय खेती की जा रही है। अब तक प्रदेश में अश्वगंधा, सफेद मूसली और गिलोय जैसी फसलें प्रमुख रूप से उगाई जाती रही हैं, लेकिन अब किसान सहजन, अकरकरा, चियाबीज और नागर मोथा जैसी नई फसलों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
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किसानों का यह रहा अनुभव
सागर जिले के किसान संतोष रजक पिछले तीन वर्षों से सहजन की खेती कर रहे हैं। वे करीब 20 एकड़ क्षेत्र में स्वयं खेती करने के साथ आसपास के किसानों से अनुबंध पर भी खेती करवा रहे हैं। उनका कहना है कि सहजन से जुड़े अन्य उत्पाद तो वे बेच लेते हैं, लेकिन पत्तियों को बेचने पर स्थानीय स्तर पर सही कीमत नहीं मिलती। इसके लिए उन्हें नीमच तक जाना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है।
किन फसलों को मिलेगा लाभ
सरकार ने जिन औषधीय फसलों को मंडियों में खरीद के लिए शामिल करने का निर्णय लिया है, उनमें चियाबीज, अकरकरा, हिंगोट, जामुन, कंठकारी, भृंगराज, टेसुफूल, गांगड़ी, बबूलफली, एलोवेरा पत्ती, गोखरू, नागर मोथा, निर्गुणी, गटारन, सरफोका, अमरबेल, सहजन पत्ती, बिच्छू फल, लताकस्तूरी, नीलगिरी, इंद्रायण फल, चेना, हारसिंगार पत्ती और सनाय पत्ती शामिल हैं।
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समीक्षा के बाद देंगे अंतिम रूप
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पर प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लागू होने के बाद गेहूं और चना जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ औषधीय फसलें भी प्रदेश की सभी मंडियों में आसानी से बेची जा सकेंगी।
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