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MP Illegal Colonies New Rules 2026: मध्यप्रदेश में अवैध कॉलोनियों पर सख्ती की तैयारी, नए नियम से 50 लाख जुर्माना और 7 साल सजा

MP Illegal Colonies New Rules 2026: Preparations for strict action against illegal colonies in Madhya Pradesh, new rules carry a fine of Rs 50 lakh and 7 years' imprisonment.

MP Illegal Colonies New Rules 2026: मध्यप्रदेश में अवैध कॉलोनियों पर सख्ती की तैयारी, नए नियम से 50 लाख जुर्माना और 7 साल सजा
MP Illegal Colonies New Rules 2026: मध्यप्रदेश में अवैध कॉलोनियों पर सख्ती की तैयारी, नए नियम से 50 लाख जुर्माना और 7 साल सजा

MP Illegal Colonies New Rules 2026: मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ रही अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए सरकार बड़े बदलाव की तैयारी में है। नए नियमों के जरिए न केवल सख्त कार्रवाई की जाएगी, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और कॉलोनाइजर पर भी कड़ी जवाबदेही तय होगी।

राज्य सरकार अवैध कॉलोनियों के फैलते दायरे को नियंत्रित करने के लिए शहरी कॉलोनी विकास नियम 2021 को अब ग्राम पंचायत क्षेत्रों में भी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके लिए एकीकृत कॉलोनी विकास नियम 2026 का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। मंत्रालय में हुई एक अहम बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और क्रेडाई ने इस मसौदे पर अपनी सहमति दे दी है।

नए नियमों में कॉलोनी विकास से जुड़े सभी पक्षों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जा रही हैं। इसमें पार्षद, बिल्डर, डेवलपर, भू-स्वामी, पुलिस और प्रशासन को जवाबदेह बनाया जाएगा, ताकि अवैध निर्माण पर समय रहते रोक लगाई जा सके।

जुर्माना और सजा दोनों होंगे सख्त

सरकार अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाने के लिए आर्थिक दंड भी बढ़ाने जा रही है। अभी तक जहां अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये था, उसे बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही सजा के प्रावधान में भी बदलाव किया जा रहा है। मौजूदा नियमों में तीन से दस साल तक की सजा का प्रावधान है, जिसे संशोधित कर न्यूनतम सात साल और अधिकतम दस साल किया जाएगा।

मास्टर प्लान पर बनी असमंजस की स्थिति

बैठक के दौरान मास्टर प्लान के मुद्दे पर अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई। इसके बाद क्रेडाई प्रतिनिधियों ने बताया कि ग्वालियर में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही मास्टर प्लान लागू हो पाया। वहीं जबलपुर में भी इस संबंध में याचिका दायर की गई है। भोपाल और इंदौर में भी नए मास्टर प्लान को लागू कराने के लिए न्यायालय का सहारा लेना पड़ सकता है।

एफएआर बढ़ाने का प्रस्ताव

भूमि विकास से जुड़े नियमों में भी बदलाव की बात सामने आई है। टेबल क्रमांक 42 में संशोधन कर बेस एफएआर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए अन्य राज्यों में लागू सुधारों का अध्ययन भी किया गया है। पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू करने के लिए इसी आधार पर अनुमति देने का सुझाव दिया गया है। साथ ही प्रीमियम एफएआर की दरें कम रखने की मांग भी की गई है।

नए नियमों में सख्त प्रावधान

प्रस्तावित नियमों के अनुसार यदि किसी पार्षद, सरपंच या सचिव को अवैध कॉलोनी की जानकारी मिलती है, तो उन्हें 15 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करानी होगी। नगर निकाय और पंचायत को भी यह अधिकार दिया जाएगा कि वे 15 दिन के भीतर कॉलोनाइजर को जमीन को मूल स्थिति में लाने का नोटिस दें।

यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो प्रशासन कॉलोनी को हटाकर जमीन अपने कब्जे में ले सकेगा और वहां विकास कार्य कराएगा। जिला स्तर पर कलेक्टर की निगरानी में एक टास्क फोर्स बनाई जाएगी, जो हर सप्ताह क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके अलावा हर कार्रवाई के लिए समय सीमा तय की जाएगी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में रखे गए यह प्रस्ताव भी

बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि क्लब हाउस और अन्य कॉमन सुविधाओं को एफएआर से मुक्त रखा जाए, जैसा अन्य राज्यों में किया जा रहा है। टीडीआर पोर्टल को अपडेट रखने और इसे विकास योजनाओं की सभी सड़कों पर लागू करने की बात कही गई।

इसके अलावा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगरीय निकायों के सॉफ्टवेयर के बीच बेहतर तालमेल बनाने का सुझाव दिया गया। डीटीपी अनुमति के लिए एक अलग समिति बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया। संपत्ति कर को लेकर भी स्पष्टता लाने की बात कही गई, ताकि नियमों के अनुसार ही वसूली हो और गलत गणना के मामलों पर रोक लगाई जा सके।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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