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Salary Increment: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कर्मचारियों की वेतनवृद्धि मांग खारिज, लगा झटका

Salary Increment: MP High Court takes a major decision, rejecting employees' demand for salary hike, a setback

Salary Increment: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कर्मचारियों की वेतनवृद्धि मांग खारिज, लगा झटका
Salary Increment: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कर्मचारियों की वेतनवृद्धि मांग खारिज, लगा झटका

Salary Increment: मध्यप्रदेश में निजी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को वेतन बढ़ोतरी को लेकर बड़ा झटका लगा है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि बीएड डिग्री के आधार पर अतिरिक्त वेतनवृद्धि का लाभ सभी को नहीं मिल सकता। इस फैसले के साथ ही शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर विराम लग गया है।

ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने निजी सहायता प्राप्त, यानी ग्रांट-इन-एड स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने बीएड डिग्री के आधार पर दो अतिरिक्त वेतनवृद्धि देने की मांग की थी। रामदास यादव एवं अन्य बनाम राज्य एवं अन्य मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह लाभ केवल शासकीय शिक्षकों के लिए निर्धारित है।

याचिकाकर्ताओं की यह दलील

याचिका दायर करने वाले शिक्षकों का कहना था कि उन्होंने अपनी मेहनत और खर्च पर बीएड की पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने पुराने सरकारी आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें भी दो अतिरिक्त वेतनवृद्धि मिलनी चाहिए। उनका तर्क था कि वे अनुदान प्राप्त संस्थानों में कार्यरत हैं, इसलिए उन्हें सरकारी शिक्षकों के समान सुविधाएं मिलनी चाहिए।

कोर्ट ने क्यों ठुकराई मांग

हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता भले ही ऐसे संस्थानों में काम करते हैं जिन्हें सरकार से अनुदान मिलता है, लेकिन वे शासकीय कर्मचारी नहीं माने जा सकते। इसी आधार पर उन्हें सरकारी शिक्षकों के बराबर अतिरिक्त लाभ देने का कोई आधार नहीं बनता।

दूसरे मामले में अहम आदेश

इसी खंडपीठ ने एक अन्य मामले में पारिवारिक विवाद को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय भी दिया। सुशील सिंह चौहान बनाम राज्य एवं अन्य मामले में हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों को समझाइश के जरिए समाधान की राह दिखाई।

पत्नी-पति में सुलह के बाद निर्देश

मामले में पति ने अपनी पत्नी के लापता होने और अवैध रूप से रखे जाने का आरोप लगाया था। सुनवाई के दौरान पुलिस ने महिला को अदालत में पेश किया। महिला ने बताया कि पति के व्यवहार और प्रताड़ना से परेशान होकर वह घर छोड़कर आगरा में रह रही थी। कोर्ट के निर्देश पर काउंसलिंग कराई गई, जिसके बाद दोनों के बीच सहमति बनी।

महिला ने यह रखी शर्त, पति राजी

महिला ने यह शर्त रखी कि यदि पति उसका सम्मान करेगा और अच्छा व्यवहार करेगा, तभी वह उसके साथ रहने को तैयार है। पति ने भी अदालत में आश्वासन दिया कि वह भविष्य में किसी तरह की प्रताड़ना नहीं करेगा। इसके बाद कोर्ट ने महिला को पति के साथ रहने की अनुमति दी और उसकी निगरानी ‘शौर्य दीदी’ के माध्यम से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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