Promotion Rule 2026: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्रमोशन के पद को सीधी भर्ती में बदलना नियमों के खिलाफ
Promotion Rule 2026: MP High Court's big decision: Converting a post for promotion into direct recruitment is against the rules.

Promotion Rule 2026: मध्य प्रदेश में नौकरी और पदोन्नति से जुड़े मामलों पर हाईकोर्ट का एक अहम फैसला सामने आया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन पदों को पदोन्नति से भरा जाना तय है, उन्हें सीधे भर्ती में बदलना नियमों का उल्लंघन है। इस निर्णय से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन पर जोर दिया गया है।
प्रमोशन पद पर भर्ती को लेकर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने गजराराजा मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में प्रोफेसर पद के लिए जारी इन-हाउस भर्ती विज्ञापन को निरस्त कर दिया है। अदालत ने माना कि यह कदम नियमों के अनुरूप नहीं था, क्योंकि संबंधित पद को पदोन्नति के जरिए भरा जाना चाहिए था।
याचिकाकर्ता ने उठाए नियमों के उल्लंघन के सवाल
इस मामले में डॉ. आशीष कौशल ने 6 फरवरी 2026 को जारी विज्ञापन को चुनौती दी थी। वे वर्ष 2005 से कॉलेज में सेवाएं दे रहे हैं और 2013 से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना था कि मध्यप्रदेश स्वायत्त मेडिकल एवं डेंटल कॉलेज शैक्षणिक सेवा नियम 2018 के अनुसार यह पद प्रमोशन से भरा जाना चाहिए था, लेकिन कॉलेज ने सीधे भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी।
कॉलेज प्रशासन ने दी अपनी दलील
कॉलेज की ओर से अदालत में कहा गया कि पदोन्नति प्रक्रिया में कानूनी अड़चनें हैं, विशेष रूप से आरक्षण से जुड़े मामले लंबित हैं। इसी कारण अस्थायी रूप से इन-हाउस डायरेक्ट भर्ती का विकल्प अपनाया गया। प्रशासन का यह भी कहना था कि यह प्रक्रिया केवल आंतरिक उम्मीदवारों तक सीमित थी, जिससे किसी के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
कोर्ट ने प्रक्रिया को बताया अनुचित
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि संबंधित पद मूल रूप से पदोन्नति के लिए निर्धारित है और इसके लिए कोई स्पष्ट प्रक्रिया तय नहीं की गई है। ऐसे में बिना नियम बनाए पद को सीधे भर्ती में बदलना सही नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि डायरेक्ट भर्ती में फीडर कैडर के अनुभव को पूरा महत्व नहीं मिल पाता, जिससे योग्य उम्मीदवारों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली बनाने पर जोर
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पदोन्नति के लिए पहले स्पष्ट और पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली तय की जानी चाहिए। इसके बाद ही भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि सभी पात्र उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके।
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आरक्षण पर भी कोर्ट की अहम टिप्पणी
ग्वालियर हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अन्य मामले में यह भी कहा था कि दूसरे राज्य का ओबीसी प्रमाणपत्र मान्य नहीं होगा। अदालत के अनुसार, राज्य बदलने से किसी व्यक्ति की जाति की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता।
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