MP Farmers Foreign Tour: मध्यप्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सरकार ने बड़ा खाका तैयार किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कहा है कि अब प्रदेश के किसानों को केवल परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि देश-विदेश में हो रहे सफल कृषि प्रयोगों से उन्हें जोड़ा जाएगा। कृषि वर्ष 2026 को केंद्र में रखकर बनाई गई इस रणनीति का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक, नवाचार और बेहतर बाजार से जोड़कर प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
नवाचारों से किसानों को जोड़ने की पहल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसानों को देश के उन राज्यों की जानकारी दी जाए, जहां खेती में नए प्रयोगों से बेहतर परिणाम सामने आए हैं। इसके साथ ही इजराइल और ब्राजील जैसे देशों की उन्नत कृषि पद्धतियों से भी किसानों को परिचित कराया जाए। इसके लिए किसानों को इन देशों की यात्रा कराई जाएं। सरकार का मानना है कि प्रत्यक्ष अनुभव से किसानों में नई सोच विकसित होगी और वे अपने खेतों में आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। इसी उद्देश्य से किसानों के लिए प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया गया है।
समन्वय से काम करेंगे सभी विभाग
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समृद्ध किसान और समृद्ध प्रदेश का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब कृषि से जुड़े सभी विभाग मिलकर काम करें। किसान कल्याण, सहकारिता, पशुपालन एवं डेयरी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास तथा सिंचाई विभागों को आपसी तालमेल के साथ योजनाएं लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे किसानों को अलग-अलग योजनाओं का समेकित लाभ मिल सकेगा।

प्रदेश भर में दें फूलों की खेती को बढ़ावा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फूलों की खेती को पूरे प्रदेश में प्रोत्साहित किया जाए। भोपाल में आयोजित होने वाले गुलाब महोत्सव को अब पुष्प महोत्सव के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों में उगाए जाने वाले फूलों को शामिल किया जाएगा। इससे फूल उत्पादक किसानों को नया बाजार मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी। बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि वर्ष 2028 में इंटरनेशनल रोज कॉम्पीटिशन भोपाल में प्रस्तावित है। इसके अलावा सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन जिले में 100 एकड़ क्षेत्र में विशेष रूप से फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पराली प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन से जुड़ेंगे एफपीओ
मुख्यमंत्री ने पराली के निपटान को लेकर सभी संभव उपाय अपनाने के निर्देश दिए। साथ ही किसान उत्पादक संगठनों को दुग्ध उत्पादन जैसी गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। बैठक में सहकारिता के माध्यम से कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई गई, ताकि युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।
वर्ष 2026 के लिए यह लक्ष्य और संभावनाएं
प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में विविध जलवायु क्षेत्र, पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था और बेहतर सड़क नेटवर्क मौजूद है। सरकार का उद्देश्य इन संसाधनों का सही उपयोग कर किसानों की आय बढ़ाना और कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। मुख्यमंत्री ने यह बात कृषि और इससे जुड़े विभागों द्वारा तैयार कार्य योजना की समीक्षा के दौरान कही।
तीन साल का लक्ष्य तय कर होंगी गतिविधियां
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि वर्ष 2026 के अंतर्गत शुरू की जाने वाली सभी योजनाएं तीन वर्ष के लक्ष्य को ध्यान में रखकर लागू की जाएं। खेती में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने, किसानों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और भ्रमण कार्यक्रम, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, उद्यानिकी विस्तार और एफपीओ के गठन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही कम ब्याज दर पर ऋण, माइक्रो सिंचाई, बेहतर बाजार व्यवस्था और उपज का उचित मूल्य दिलाने जैसे प्रयास किए जाएंगे।
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जलवायु अनुकूल खेती और नवाचार पर जोर
मुख्यमंत्री ने जलवायु के अनुरूप खेती, टिकाऊ कृषि पद्धतियों, श्रीअन्न उत्पादन, जैव विविधता संरक्षण और पारंपरिक कृषि ज्ञान को संजोने के निर्देश दिए। प्राकृतिक और जैविक खेती को भी विशेष रूप से बढ़ावा देने की बात कही गई। इसके अलावा कृषि अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल तकनीक को मजबूत कर प्रदेश की कृषि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने पर बल दिया गया।
मंडियों के आधुनिकीकरण से मिलेगा बेहतर दाम
बैठक में बताया गया कि कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण पर भी काम किया जाएगा। वर्ष 2025-26 में 20, वर्ष 2026-27 में 19 और वर्ष 2027-28 में 42 मंडियों को ई-नाम से जोड़ा जाएगा। ई-नाम एक ऑनलाइन कृषि व्यापार मंच है, जिससे किसानों को देशभर के खरीदारों से जुड़ने का मौका मिलेगा। मंडियों में साफ-सुथरी, ग्रेडेड और पैक्ड उपज से उत्पादों की गुणवत्ता सुधरेगी और बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
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पारदर्शिता और अवसंरचना पर ध्यान
मंडियों में पारदर्शी नीलामी, अनियमितताओं पर रोक, पुराने प्रांगणों का सुव्यवस्थित विकास और अतिक्रमण से होने वाले नुकसान को रोकने के उपाय किए जाएंगे। कृषि अवसंरचना निधि योजना के तहत फसलोत्तर प्रबंधन और कृषि परिसंपत्तियों के विकास के लिए भी गतिविधियां संचालित होंगी।
बैठक में मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी
इस समीक्षा बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कई अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने कृषि वर्ष 2026 को सफल बनाने के लिए अपने-अपने विभागों की भूमिका स्पष्ट की।
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