MP Education Quality Improvement: एमपी में अब लापरवाह शिक्षकों पर गिरेगी गाज, मुख्य सचिव अनुराग जैन ने दिए सख्त निर्देश

MP Education Quality Improvement: मध्यप्रदेश में अब शिक्षा पर राज्य सरकार का विशेष फोकस रहेगा। इसी के मद्देनजर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा प्रणाली में गुणात्मक सुधार नहीं हुआ, तो विकास का सपना अधूरा रह जाएगा।

मुख्य सचिव श्री जैन ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की सौ प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और जो शिक्षक लापरवाही करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों में नामांकन दर बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। यह बातें उन्होंने भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन आयोजित सत्र में कही।

शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान

बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण को सबसे अहम बताया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में ऐसे शिक्षकों का एक समूह तैयार किया जाए जिनके पास शिक्षण की उत्कृष्ट दक्षता है। उनके माध्यम से अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का नियमित कार्यक्रम तय किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों की निगरानी और ट्रैकिंग का कार्य आंगनवाड़ी से शुरू होकर स्कूल की अंतिम कक्षा तक सतत जारी रहना चाहिए ताकि प्रत्येक बच्चे की शैक्षणिक प्रगति पर ध्यान रखा जा सके।

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जन सहयोग से कराएं स्कूलों की मरम्मत

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि दुर्गम क्षेत्रों में स्थित सरकारी स्कूलों की इमारतों की मरम्मत कार्य में शाला विकास समितियों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर शिक्षा में रुचि रखने वाले व्यक्तियों का सहयोग लिया जाए। अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और संजय दुबे ने भी इस दौरान शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और जनशिक्षकों की भूमिका को मजबूत करने के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

ई-अटेंडेंस ऐप से बेहतर हुई जवाबदेही

सत्र की शुरुआत में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल ने कहा कि विकसित मध्यप्रदेश-2047 के रोडमैप में यह लक्ष्य तय किया गया है कि राज्य का हर बच्चा उच्च गुणवत्ता, रोजगारोन्मुख और मूल्य आधारित शिक्षा प्राप्त करे। इसके लिए शिक्षकों की उपस्थिति और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति ई-अटेंडेंस ऐप के जरिए दर्ज की जा रही है।

इस पहल से पारदर्शिता बढ़ी है और अब कई जिलों में शिक्षक उपस्थिति का प्रतिशत 90 फीसदी से ऊपर पहुंच गया है। उदाहरण के तौर पर राजगढ़ जिले में यह अनुपात 94 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है। बोर्ड परीक्षा परिणामों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि वर्ष 2024-25 में दसवीं कक्षा में 87 प्रतिशत से अधिक और बारहवीं कक्षा में लगभग 83 प्रतिशत विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की। यह पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है।

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प्रारंभिक शिक्षा के लिए जारी नवाचार

महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जीवी रश्मि ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा के लिए नवाचार किए जा रहे हैं। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए राष्ट्रीय फ्रेमवर्क ‘आधारशिला’ और तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए ‘नवचेतना फ्रेमवर्क’ तैयार किया गया है। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों में शत-प्रतिशत बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि प्रारंभिक स्तर से ही शिक्षा की मजबूत नींव रखी जा सके।

आश्रम शालाओं-छात्रावासों में बढ़ी उपस्थिति

जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा ने बताया कि विभाग द्वारा संचालित आश्रम शालाओं और छात्रावासों में 93 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया है। साथ ही, इन संस्थानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सितंबर 2025 से ‘परख ऐप’ लॉन्च किया गया है। इसके अलावा, नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर नौवीं कक्षा से लेकर कॉलेज स्तर तक की छात्रवृत्ति के लिए केंद्र सरकार ने वन टाइम रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य कर दिया है।

जिलों की ओर से प्रस्तुत बेस्ट प्रेक्टिस

कॉन्फ्रेंस में कई जिलों के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में शिक्षा सुधार के तहत की जा रही पहल की जानकारी दी। शाजापुर कलेक्टर ने निपुण भारत मिशन के अंतर्गत अपनाई गई बेस्ट प्रेक्टिस बताई। छतरपुर कलेक्टर ने आदर्श आंगनवाड़ी परियोजना की जानकारी साझा की। नीमच कलेक्टर ने सरकारी विद्यालयों में गुणवत्ता सुधार के उपायों का उल्लेख किया, वहीं झाबुआ कलेक्टर ने ‘परख’ प्रोजेक्ट के वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से जिले की विशेष पहल दिखाई।

बोर्ड रिजल्ट बेहतर बनाने अभी से जुटें

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी जिलों को निर्देश दिए कि विकसित मध्यप्रदेश 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए नामांकन दर में सुधार के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के भवनों की मरम्मत में स्थानीय समाजसेवियों और शिक्षा में रुचि रखने वाले नागरिकों को जोड़ा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए अभी से सघन तैयारी शुरू की जाए।

जैन ने निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ छात्रों को समय पर मिलना चाहिए और इस पर कड़ी निगरानी रखी जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में पात्र बच्चों का सौ प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाए ताकि राज्य में शिक्षा की बुनियाद और अधिक मजबूत हो सके।

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