MP Cooperative Society Elections: सहकारी संस्थाओं से अफसरों की होगी छुट्टी, राजनीतिक लोग बनेंगे प्रशासक, चुनाव की भी तैयारी
MP Cooperative Society Elections: Officers will be relieved from cooperative societies, political figures will become administrators, preparations are also underway for elections.

MP Cooperative Society Elections: मध्य प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में अब एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। लंबे समय से लंबित सहकारी संस्थाओं के चुनाव को लेकर सरकार ने नई रणनीति बनाई है, जिसमें पहले राजनीतिक नियुक्तियां की जाएंगी और उसके बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सहकारी संस्थाओं में बदलाव की तैयारी
राज्य में सहकारी समितियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के संचालन के लिए फिलहाल अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशासक बनाकर काम चलाया जा रहा था। यह व्यवस्था चुनाव नहीं होने के कारण अस्थायी तौर पर लागू की गई थी। अब सरकार इन प्रशासकों को हटाकर उनकी जगह राजनीतिक नियुक्तियां करने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारी देना और संगठन को मजबूत करना बताया जा रहा है।
सत्ता और संगठन में बनी सहमति
हाल ही में हुई बैठकों में इस मुद्दे पर सत्ता और संगठन के बीच सहमति बन गई है। निर्णय लिया गया है कि सहकारी संस्थाओं और कृषि उपज मंडियों में कार्यकर्ताओं को समायोजित किया जाएगा। इसके लिए पहले मनोनयन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह मामला काफी समय से लंबित था, लेकिन अब इसे अमल में लाने की दिशा में तेजी आई है। प्रदेश में 4,345 सहकारी समितियां, 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और एक राज्य स्तरीय अपेक्स बैंक कार्यरत हैं।
कानूनी स्थिति और प्रशासनिक कदम
इन संस्थाओं के चुनाव वर्ष 2018 से नहीं हो पाए हैं। इस संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा कई बार चुनाव कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सरकार ने कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए अधिनियम में संशोधन कर विशेष परिस्थितियों में चुनाव टालने का प्रावधान किया था। अब सरकार का फोकस राजनीतिक नियुक्तियों के जरिए व्यवस्थाओं को स्थिर करने पर है। इससे पहले नगरीय निकायों में भी मनोनीत पार्षद नियुक्त किए जा चुके हैं।
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किसानों से जुड़ा बड़ा नेटवर्क
सहकारी समितियां प्रदेश के ग्रामीण ढांचे का अहम हिस्सा हैं। पंचायतों के बाद यह सबसे बड़ा नेटवर्क माना जाता है, जिससे करीब 65 लाख किसान जुड़े हुए हैं। भले ही इनके चुनाव सीधे राजनीतिक आधार पर नहीं होते, लेकिन इनकी भूमिका हर स्तर के चुनावों में महत्वपूर्ण रहती है। स्थानीय स्तर पर माहौल बनाने में इनकी अहम भागीदारी होती है।
कार्यकर्ताओं को मिलेगा अवसर
लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण सहकारिता क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ताओं में निराशा देखी जा रही थी। अब उन्हें मौका देने के लिए सरकार मनोनयन की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। बताया जा रहा है कि पहले प्राथमिक समितियों में नियुक्तियां की जाएंगी। इसके लिए जिला स्तर पर और स्थानीय विधायकों से राय ली जाएगी।
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चुनाव की प्रक्रिया कैसे होगी
सूत्रों के अनुसार, जिन प्रशासकों की नियुक्ति होगी, वही आगे चुनाव की प्रक्रिया को भी संचालित करेंगे। वे सदस्यता सूची तैयार करवाएंगे और फिर चुनाव संपन्न कराएंगे। प्रशासक वही व्यक्ति बनाया जाएगा जो समिति का सदस्य हो, चुनाव लड़ने की पात्रता रखता हो, किसी तरह का बकाया न हो और उसका आपराधिक रिकॉर्ड भी साफ हो।
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