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MP Cabinet Decisions: 33 हजार करोड़ की योजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी, युवाओं के लिए शुरू होगा नया इंटर्नशिप प्रोग्राम

MP Cabinet Decisions: कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले, ग्रामीण विकास, स्टार्टअप, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएं अगले 5 साल तक जारी रहेंगी

Madhya Pradesh Cabinet Decisions: 33 हजार करोड़ की योजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी, युवाओं के लिए शुरू होगा नया इंटर्नशिप प्रोग्राम
Madhya Pradesh Cabinet Decisions: 33 हजार करोड़ की योजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी, युवाओं के लिए शुरू होगा नया इंटर्नशिप प्रोग्राम

MP Cabinet Decisions: मध्यप्रदेश सरकार की मंत्रि-परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं, जिनका असर प्रदेश के विकास, रोजगार, स्वास्थ्य और ग्रामीण ढांचे पर दिखाई देगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विभिन्न विभागों की कई योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी गई। साथ ही युवाओं को शासन व्यवस्था से जोड़ने के लिए एक नया इंटर्नशिप कार्यक्रम भी शुरू करने का फैसला किया गया है। इन फैसलों के तहत कुल मिलाकर लगभग 33 हजार 240 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है।

मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय

मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के कई विभागों से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों पर चर्चा की गई। बैठक में तय किया गया कि कई महत्वपूर्ण योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक लगातार जारी रखा जाएगा ताकि विकास कार्यों में कोई बाधा न आए। इसके अलावा प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने और युवाओं को शासन व्यवस्था से जोड़ने से जुड़े फैसले भी लिए गए।

यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस कार्यक्रम को मंजूरी

कैबिनेट ने युवाओं को प्रशासनिक व्यवस्था के साथ जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस कार्यक्रम को लागू करने का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम को तीन वर्षों तक संचालित करने के लिए लगभग 190 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही वे विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सहयोग कर सकेंगे। लोक सेवा प्रबंधन विभाग को इस योजना के लिए आवश्यक नियम और दिशा-निर्देश तैयार करने तथा आगे की प्रक्रिया तय करने की जिम्मेदारी दी गई है।

निःशक्तजनों को वृत्तिकर से छूट जारी रहेगी

राज्य सरकार ने दिव्यांग नागरिकों को राहत देते हुए मध्यप्रदेश वृत्तिकर अधिनियम 1995 के अंतर्गत उन्हें मिलने वाली कर छूट को आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया है। कैबिनेट ने इस छूट को 31 मार्च 2030 तक बढ़ाने की स्वीकृति दे दी है। इससे प्रदेश के निःशक्त नागरिकों को आर्थिक रूप से कुछ राहत मिलती रहेगी।

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एक जिला एक उत्पाद योजना को मंजूरी

प्रदेश सरकार ने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक जिला एक उत्पाद परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत सात जिलों के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों के संरक्षण, विकास और विपणन के लिए अगले पांच वर्षों में 37 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।

इस योजना में सीधी जिले में दरी और कारपेट, दतिया में गुड़, अशोकनगर में चंदेरी हाथकरघा वस्त्र, भोपाल में जरी-जरदोजी और जूट उत्पाद, धार में बाग प्रिंट, सीहोर में लकड़ी के खिलौने तथा उज्जैन में बटिक प्रिंट को शामिल किया गया है।

परियोजना के अंतर्गत कारीगरों, बुनकरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण, ब्रांडिंग और विपणन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सिंगरौली में न्यायालय के लिए नए पद

मंत्रि-परिषद ने सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के लिए नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड का एक नया पद बनाया जाएगा।

इसके अलावा न्यायालय के कार्यालयीन कामकाज के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के छह पद भी बनाए जाएंगे। इस प्रकार कुल सात नए पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई है। इससे क्षेत्र में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

तीन नए ईएसआई औषधालय खोलने का निर्णय

कैबिनेट ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम के अंतर्गत तीन नए औषधालय खोलने का निर्णय लिया है। ये औषधालय मैहर जिले के मैहर, कटनी जिले के कैमोर और खरगोन जिले के निमरानी में स्थापित किए जाएंगे।

इन औषधालयों के संचालन के लिए चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ सहित कुल 51 पद भी बनाए जाएंगे। इन नए औषधालयों के शुरू होने से लगभग 15 हजार 686 पंजीकृत श्रमिकों और उनके करीब 62 हजार 744 आश्रित परिवारजनों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

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विद्युत वितरण व्यवस्था मजबूत करने का फैसला

राज्य सरकार ने बिजली वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत मिलने वाले केंद्रीय अनुदान पर देय राज्य जीएसटी की राशि वितरण कंपनियों को अनुदान के बजाय अंशपूंजी के रूप में दी जाएगी।

नवंबर 2024 तक इस योजना के तहत 887 करोड़ 91 लाख रुपये ऋण के रूप में दिए गए थे। अब इस राशि को राज्य सरकार द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

यह योजना केंद्र सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा लागू की गई है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना है। इसके तहत बिजली वितरण से जुड़ी आधारभूत संरचना को मजबूत किया जा रहा है। इस योजना में केंद्र सरकार 60 प्रतिशत अनुदान देती है जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाती है।

लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों के लिए स्वीकृति

वित्त विभाग के अंतर्गत संचालित लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों और योजनाओं को भी अगले वित्त आयोग की अवधि तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक इन योजनाओं को जारी रखने के लिए कुल 63 करोड़ 76 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

खनिज क्षेत्रों के विकास के लिए बड़ी राशि

खनिज साधन विभाग की योजना को भी आगे जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल 6090 करोड़ 12 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।

इस राशि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों, पिछड़े इलाकों और खनिज क्षेत्रों में आधारभूत ढांचा मजबूत करने के लिए किया जाएगा। इसमें पेयजल आपूर्ति योजनाएं, सड़क विकास कार्यक्रम और ग्रामीण अधोसंरचना के निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं को मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं को भी अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए कुल 7 हजार 127 करोड़ 38 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इसमें विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 16 करोड़ 78 लाख रुपये और महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान जबलपुर में विभिन्न कार्यक्रमों के संचालन के लिए 12 करोड़ 50 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इसके अलावा प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत कक्षा 1 से 8 तक के सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने के लिए 7098 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की योजनाएं

योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय की दस योजनाओं को भी 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इसके लिए कुल 2064 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

इन योजनाओं में राज्य नीति आयोग के कार्य, विभिन्न योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और सलाहकार सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा सांसद और विधायक स्वेच्छानुदान निधि से आर्थिक सहायता, बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य विकास प्राधिकरण से जुड़े कार्यों के लिए भी राशि स्वीकृत की गई है। साथ ही राज्य सैंपल सर्वेक्षण और जनभागीदारी से संचालित जिला योजनाओं के लिए भी प्रावधान किया गया है।

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जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए बजट

जनजातीय कार्य विभाग से जुड़ी योजनाओं को भी अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इसके लिए कुल 1645 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस राशि में से 610 करोड़ 51 लाख रुपये पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह छात्रवृत्ति कक्षा 11, 12 और महाविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को दी जाएगी जिनकी आय दो लाख पचास हजार रुपये से अधिक है।

इसके अलावा अनुसूचित जनजाति अनुसंधान संस्था के संचालन के लिए 86 करोड़ रुपये और जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, सिंचाई, शिक्षा, पेयजल और स्वरोजगार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 948 करोड़ 23 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।

महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएं

राज्य सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को भी आगे जारी रखने का निर्णय लिया है। वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक इन योजनाओं के संचालन के लिए कुल 3773 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें राज्य महिला आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, महिला एवं बाल कल्याण संचालनालय और मध्यप्रदेश महिला वित्त विकास निगम के कार्यों के संचालन से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।

स्टार्टअप और निवेश बढ़ाने के लिए बड़ा पैकेज

प्रदेश में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एमएसएमई विभाग की योजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। अगले पांच वर्षों तक इन योजनाओं को जारी रखने के लिए कुल 11 हजार 361 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

इसमें उद्योग विकास अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणन सहायता, ऊर्जा लेखा परीक्षा सहायता, निर्यात सहायता और बीमार उद्योगों के पुनर्जीवन के लिए सहायता जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज और सेवा क्षेत्र के लिए सहायता भी दी जाएगी।

मध्यप्रदेश स्टार्टअप नीति 2022 के अंतर्गत स्टार्टअप को निवेश और ऋण प्राप्त करने, लीज रेंट सहायता, पेटेंट प्राप्त करने तथा विभिन्न आयोजनों में भागीदारी के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए 589 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही उद्योग संचालनालय और जिला उद्योग केंद्रों के संचालन के लिए 742 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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