MP Cabinet Decision: एमपी में अस्थाई कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, जल्द होंगे स्थाई; डूब प्रभावितों के लिए 1782 करोड़ का एक्स्ट्रा पैकेज
MP Cabinet Decision: मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कई अहम निर्णय लिए। इन फैसलों का सीधा असर राज्य के अस्थायी कर्मचारियों, डूब प्रभावित परिवारों, ग्रामीण सड़कों, मेट्रो परियोजनाओं, स्वरोजगार योजनाओं और वन क्षेत्र के विकास से जुड़ा है। सरकार के इन निर्णयों को कर्मचारियों और आम जनता के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अस्थायी पदों को स्थायी बनाने का निर्णय
कैबिनेट बैठक में राज्य शासन के विभिन्न विभागों में लंबे समय से चले आ रहे स्थायी और अस्थायी पदों के अंतर को समाप्त करने पर सहमति बनी। मंत्रि-परिषद ने स्वीकृत अस्थायी पदों को स्थायी पदों में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियमों में आवश्यक बदलाव करने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब जो पद पहले अस्थायी माने जाते थे, उन्हें स्थायी दर्जा दिया जाएगा।
इन पदों पर अब नई भर्ती नहीं होगी
इसके साथ ही कार्यभारित और आकस्मिक स्थापना के अंतर्गत आने वाले सभी पदों को सांख्येतर घोषित करने का फैसला भी लिया गया है। इन पदों पर अब कोई नई भर्ती नहीं की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रशासनिक ढांचा अधिक स्पष्ट और सुव्यवस्थित होगा तथा कर्मचारियों को भविष्य को लेकर अधिक सुरक्षा मिलेगी।
वंदे मातरम गान के साथ बैठक की शुरुआत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में यह बैठक मंत्रालय में आयोजित की गई। बैठक की शुरुआत वंदे मातरम गान के साथ हुई। इसके बाद एक-एक कर विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा कर निर्णय लिए गए। बैठक में विकास, रोजगार, अधोसंरचना और पर्यावरण से जुड़े कई प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।
डूब प्रभावित परिवारों के लिए विशेष पैकेज
मंत्रि-परिषद ने अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में संचालित अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए एक बड़े विशेष पैकेज को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के कारण जिन परिवारों की जमीन और घर डूब क्षेत्र में आ रहे हैं, उनके पुनर्वास के लिए 1,782 करोड़ रुपये का अतिरिक्त पैकेज स्वीकृत किया गया है।
इन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में पहले से 1,656 करोड़ 2 लाख रुपये का प्रावधान था। इसके अलावा अब सरकार ने 1,782 करोड़ रुपये और देने का निर्णय लिया है, ताकि प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा मिल सके।
परियोजनाओं से होने वाले लाभ और प्रभाव
अपर नर्मदा, राघवपुर और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजनाओं की कुल लागत 5,512 करोड़ 11 लाख रुपये है। इन योजनाओं से लगभग 71 हजार 967 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही इन परियोजनाओं से 125 मेगावाट विद्युत उत्पादन की व्यवस्था भी की गई है।
हालांकि इन परियोजनाओं से कुल 13 हजार 873 परिवार प्रभावित होंगे। सरकार ने तय किया है कि विशेष पैकेज के तहत प्रत्येक प्रभावित परिवार को 12 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा लगभग 50 हजार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति परिवारों को अतिरिक्त राशि मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
- यह भी पढ़ें : Collector FIR Warning: कलेक्टर की सख्त चेतावनी- समय पर नहीं किया कार्य पूरा तो ठेकेदारों पर होगी एफआईआर, दिया अल्टीमेटम
ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना को मंजूरी
कैबिनेट बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना के तहत होने वाले कार्यों को भी अनुमति दी गई। इसके अंतर्गत 10 लाख रुपये या उससे अधिक लागत वाले कार्यों को स्वीकृति देने का अधिकार विभाग को दिया गया है।
सरकार के निर्णय के अनुसार लगभग 693 करोड़ 76 लाख रुपये की लागत से करीब 3,810 कार्य पूरे किए जा सकेंगे। इन कार्यों से ग्रामीण इलाकों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूती मिलेगी, जिससे ग्रामीण जीवन आसान होगा और आवागमन बेहतर होगा।
मेट्रो रेल परियोजनाओं के लिए बजट स्वीकृत
भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए भी सरकार ने राशि मंजूर की है। मंत्रि-परिषद ने वर्ष 2025-26 के लिए राजस्व मद में 90 करोड़ 67 लाख रुपये के बजट को स्वीकृति दी है।
इस राशि का उपयोग मेट्रो सेवाओं को सुचारु रूप से चलाने, रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि दोनों प्रमुख शहरों में मेट्रो सेवाएं नियमित और सुरक्षित रूप से संचालित हों।
- यह भी पढ़ें : MP Cabinet Decisions 2025: एमपी में नए फोरलेन और सिंचाई परियोजना को मंजूरी, युवाओं को भेजा जाएगा जापान और जर्मनी
2031 तक रहेगी मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय भी लिया। योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रखने और इस अवधि में 905 करोड़ 25 लाख रुपये खर्च करने की स्वीकृति दी गई है।
इस योजना के तहत प्रदेश के 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए बैंक के माध्यम से 50 हजार रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। सरकार की ओर से ऋण पर 3 प्रतिशत वार्षिक ब्याज अनुदान दिया जाता है। साथ ही सात वर्ष तक ऋण गारंटी शुल्क का अनुदान भी शासन द्वारा वहन किया जाता है।
वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना को मंजूरी
मंत्रि-परिषद ने राज्य में वन विज्ञान केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक छह वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इन केंद्रों का उद्देश्य वन क्षेत्र के बाहर वानिकी गतिविधियों को बढ़ावा देना, वन भूमि की उत्पादकता में सुधार करना, काष्ठ उत्पादन से अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना और लोगों को वृक्ष खेती तथा कृषि वानिकी के प्रति जागरूक करना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वन विभाग की अनुमति से अशासकीय संस्थाएं भी ऐसे वन विज्ञान केंद्र स्थापित कर सकेंगी।
सोशल मीडिया पर बैतूल अपडेट की खबरें पाने के लिए फॉलो करें-
- हमारे यूट्यूब चैनल पर खबरें देखने के लिए : यहां क्लिक करें
- वाट्सअप चैनल पर खबरें पाने के लिए : यहां क्लिक करें
- फेसबुक ग्रुप पर खबरें पाने के लिए : यहां क्लिक करें
- फेसबुक पेज पर खबरें पाने के लिए : यहां क्लिक करें
- एक्स पर खबरें पाने के लिए: यहां क्लिक करें



