Mohan Yadav Warning: परफॉर्मेंस नहीं तो मैदान से बाहर: सीएम मोहन यादव की कलेक्टरों को सख्त चेतावनी, गेहूं खरीदी पर भी बड़े निर्देश
Mohan Yadav Warning: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कलेक्टरों से कहा – काम में दिखे रिजल्ट, किसानों की गेहूं खरीदी और प्रशासनिक अनुशासन पर सख्ती

Mohan Yadav Warning: मध्यप्रदेश में प्रशासनिक कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब काम के आधार पर ही जिम्मेदारियां तय होंगी। उन्होंने जिला कलेक्टरों से कहा कि शासन की योजनाओं और अभियानों के क्रियान्वयन में परिणाम दिखना चाहिए। जो अधिकारी बेहतर प्रदर्शन करेंगे, वही जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने किसानों से जुड़े कार्यों से लेकर प्रशासनिक अनुशासन तक कई महत्वपूर्ण विषयों पर निर्देश दिए।
गेहूं उपार्जन में नहीं होनी चाहिए परेशानी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गेहूं खरीदी की पूरी प्रक्रिया इस तरह संचालित की जाए कि किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े। उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि पंजीकृत किसानों में से जिन किसानों की पहचान की गई है, उनका सत्यापन समय पर किया जाए। साथ ही उपार्जन केंद्रों पर बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था हो और किसानों को भुगतान समय पर मिले, इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
राज्य में गेहूं खरीदी का कार्यक्रम अलग-अलग संभागों में निर्धारित किया गया है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में गेहूं खरीदी 16 मार्च से शुरू होकर 5 मई तक चलेगी। इसके अलावा जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चंबल और सागर संभाग में यह प्रक्रिया 23 मार्च से शुरू होकर 12 मई तक जारी रहेगी। किसानों के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च तय की गई है।
जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीदी केंद्रों का निर्धारण समय सीमा के भीतर किया जाए और वहां किसानों के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं मौजूद रहें। उन्होंने यह भी कहा कि खरीदी प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को सही प्रशिक्षण दिया जाए ताकि काम में किसी प्रकार की परेशानी न आए। जिला उपार्जन समिति नियमित बैठक कर समस्याओं का त्वरित समाधान करे और किसानों को जरूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराई जाए।
विदेशों में रह रहे लोगों के परिवारों से रखें संपर्क
मुख्यमंत्री ने खाड़ी देशों में बन रही परिस्थितियों का जिक्र करते हुए जिला कलेक्टरों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उन देशों में रह रहे जिले के विद्यार्थियों और नागरिकों के परिवारों से प्रशासन लगातार संपर्क बनाए रखे। प्रदेशवासियों की सहायता के लिए नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन और वल्लभ भवन मंत्रालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। जिला स्तर पर भी संबंधित परिवारों के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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अभियान की की जाएं सख्त मॉनिटरिंग
मुख्यमंत्री ने बताया कि संकल्प से समाधान अभियान अपने अंतिम चरण में है और अब तक लगभग 40 लाख आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है। अभियान के तहत 16 मार्च तक जिला स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह अभियान विकास और जनकल्याण से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास है, इसलिए कलेक्टर इसकी लगातार निगरानी करें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जो अधिकारी परिणाम देंगे वही जिम्मेदारी संभालते रहेंगे।
विजन डॉक्यूमेंट पर भी दिए निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने आलीराजपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बालाघाट और भोपाल जिलों को जल्द से जल्द वीसी सेटअप से संबंधित कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। उनके अनुसार इस व्यवस्था से विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को पंचायत स्तर तक संवाद करने में आसानी होगी और विकास कार्यों की समीक्षा बेहतर ढंग से हो सकेगी। इसके साथ ही विधानसभा स्तर पर तैयार किए जा रहे विजन डॉक्यूमेंट के संबंध में भी आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।
भ्रामक सूचनाओं का तुरंत करें खंडन
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन से संबंधित गलत या भ्रामक जानकारी यदि कहीं फैलती है तो जिला प्रशासन को तुरंत उसका तथ्यात्मक खंडन करना चाहिए। सोशल मीडिया के दौर में अफवाहें तेजी से फैलती हैं, इसलिए सही स्थिति लोगों तक तुरंत पहुंचाना जरूरी है।
शैक्षणिक संस्थानों का निरीक्षण जरूरी
उन्होंने कहा कि इस समय स्कूल और कॉलेजों में परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में जिला अधिकारी समय-समय पर शैक्षणिक संस्थानों, छात्रावासों और विश्वविद्यालय परिसरों का आकस्मिक निरीक्षण करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि परीक्षाओं का संचालन सुचारू रूप से हो और नए शैक्षणिक सत्र की तैयारी भी व्यवस्थित ढंग से हो सके।
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कार्यालयों में समय पालन पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अनुशासन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा है कि वे कार्यालयीन समय का सख्ती से पालन करें। हाल ही में मंत्रालय में अचानक निरीक्षण कराया गया था और इसी तरह की व्यवस्था जिलों में भी लागू की जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाएं उनका अधिकार हैं, लेकिन इसके साथ उनसे नियमानुसार काम लेना भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि समय पालन की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो राज्य में छह दिन का कार्य सप्ताह लागू करने पर विचार किया जाएगा।
किसान कल्याण वर्ष और नवाचार को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026 को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिलों में लगने वाले पारंपरिक मेलों में कृषि और पशुपालन क्षेत्र में नई पहल करने वाले किसानों या नवाचार करने वालों को प्रदर्शनी के माध्यम से मंच दिया जाए। इसके अलावा जिला स्तर पर होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए।
मंत्रालय में आयोजित इस राज्य स्तरीय बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अशोक बर्णवाल, संजय दुबे, नीरज मंडलोई, दीपाली रस्तोगी और शिवशेखर शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सभी जिलों के कलेक्टर वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
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