Gondi language preservation: मोहन भागवत के सामने डॉ. मयंक भार्गव ने रखीं समाज की उपलब्धियां, गोंडी भाषा संरक्षण का बताया अभिनव मॉडल

Gondi language preservation: बैतूल। राष्ट्रीय स्वयं संघ द्वारा भोपाल में कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत के सामने अखिल भारतीय भार्गव सभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मयंक भार्गव ने देश भर में समाज द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों और जनजातीय क्षेत्र में किए गए जा रहे गोंडी भाषा संरक्षण के नवाचार की भी जानकारी दी। मंच पर सर संघ चालक के साथ प्रसिद्ध कथा वाचन प्रदीप मिश्रा और मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय मौजूद थे।

आरएसएस के नर्मदापुरम संभाग के पांच जिलों की ओर से एकमात्र डॉ. मयंक भार्गव ने अपने उद्बोधन में कहा कि देश मेंं भार्गव समाज 100 प्रतिशत शिक्षित समाज है। समाज के द्वारा जरुरतमंद एवं उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। गत वर्ष 146 प्रार्थियों एवं उनके आश्रितों को कुल 63 लाख 88 हजार 100 रूपए की सहायता राशि दी गई है। शिक्षा समिति के माध्यम से गत वर्ष आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 113 विद्यार्थियों को 17 लाख 20 हजार 329 रूपए की छात्रवृत्ति दी गई। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की कन्याओं के विवाह के लिये समुचित व्यवस्था आर्थिक सहयोग दिया जाता है। इस वर्ष समाज के कमजोर वर्ग के परिवारों के 23 सदस्यों को चिकित्सा एवं दवाईयों के लिए 9 लाख 50 हजार रूपए की सहायता दी गई। इस कार्य हेतू समाज के दानवीर परिवारों ने 1 करोड़ 39 लाख 6 हजार 230 रूपए की निधी स्थापित की है।

इसके अलावा समाज द्वारा महर्षि भृगु, भगवान परशुराम एवं संत पुरषों पर आख्यान एवं धार्मिक यात्राओं का भी आयोजन किया जाता है। यात्राओं में अब तक लगभग 3 हजार से अधिक सामाजिक बंधु शामिल हो चुके है। डॉ. भार्गव ने बताया कि समाज में दहेज प्रथा और मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों पर सख्त पाबंदी लगाई है।

उन्होंने कहा कि विद्या भारती से संबंद्ध भारत भारती शिक्षा समिति के सहयोग से जनजातीय भाषा गोंडी के संरक्षण के लिए पिछले 13 वर्षों से देश का एकमात्र समाचार पत्र लोकांचल का प्रकाशन भोपाल और बैतूल से किया जा रहा है। बैतूल जिले के जनजातीय बाहुल्य इलाको सहित 415 से अधिक एकल विद्यालयों के माध्यमों से भी समाचार पत्र वितरित किया जाता है। ग्रामीण अंचल में इस समाचार पत्र के प्रसार के सकारात्मक नतीजे देखने को मिले हैं। उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर एक सॉफ्टवेयर बनाया गया जिसमें हिंदी भाषा का मैटर डालने पर उसके हिंदी-गोंडी शब्दकोष में गोंडी भाषा के शब्दों से वह उसे गोंडी भाषा में परिवर्तित कर देता है। जनजातीय भाषा गोंडी के जानकारों की मदद से हिंदी-गोंडी शब्दकोष में अब तक 1 लाख से अधिक गोंडी शब्दों का संग्रह किया जा चुका है।

डॉ. भार्गव ने कहा कि गोंडी समाचार पत्र लोकांचल के 50 से अधिक जनजातीय समाज के संवाददाता है जो कि गोंडी भाषा में ही न्यूज मोबाइल पर टाईप कर व्हाट्सएप पर भेजते हैं। यह जनजातीय क्षेत्र में भाषा संरक्षण और प्रचार-प्रसार का जीवंत उदाहरण है। कार्यक्रम में आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता, चिंतक, विचारक, शिक्षाविद् मौजूद थे।

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