Mini Goa In MP: मप्र में है मिनी गोवा, मानसून आते ही आने लगे टूरिस्ट, नजारा देख झट से बना लेंगे घूमने का प्लान

Mini Goa In MP: मप्र में है मिनी गोवा, मानसून आते ही आने लगे टूरिस्ट, नजारा देख झट से बना लेंगे घूमने का प्लान
Source: Credit – Social Media

Mini Goa In MP: देश और दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक गोवा है। गोवा देश-विदेश के टूरिस्ट छुट्टियां मनाने के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन माना जाता है। हर साल यहां पर लोग हनीमून, फैमिली ट्रिप, दोस्तों के साथ ट्रिप, छुट्टी बिताने के लिए पहुंचते है और यह छुट्टी बिताने के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन माना जाता है।

गोवा अपने बेहतरीन समुद्री तट, विदेशी कल्चर, नाईट लाइफ, कैसिनो और तमाम चीजों को लेकर काफी मशहूर है। गोवा के रेतीले बीच देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक हर साल हजारों की संख्या में गोवा पहुंचते हैं। सब कहते हैं कि गोवा जैसा नजारा कहीं और दिखाई देता, लेकिन मध्य प्रदेश में एक ऐसा गांव है, जिसका नजारा हूबहू गोवा के समुद्री बीच की तरह की अद्भुत और खूबसूरत है। चंबल नदी के किनारे बसे इस गांव को लोग प्यार से ‘मिनी गोवा’ भी कहते हैं और बारिश के दिनों में तो यहां पर पर्यटक और घूमने वालों का जमावड़ा लग जाता है।

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कितना खूबसूरत है मिनी गोवा! (Mini Goa In MP)

गोवा की तरह नजर आने वाला मध्य प्रदेश का ये गांव मंदसौर जिले में स्थित है। मंदसौर जिले में स्थित कंवला गांव चंबल नदी के तट पर स्थित है। यहां चंबल का किनारा इतना चौड़ा है कि पार नजर नहीं आता है। इस मिनी गोवा में 2 बड़ी चट्टानें हैं, जो नदी के बीच किसी आईलैंड की तरह दिखाई देती हैं। इस वजह से इसका नजारा समुद्र की तरह दिखाई देता है। बारिश के दिनों में यहा टूरिस्ट का जमावड़ा लगा रहता है।

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सनसेट का लें मजा (Mini Goa In MP)

कंवला में सनसेट देखने का भी अलग ही मजा है। यह बहुत शांतिपूर्ण जगह है, जहां प्राकृतिक नजारों का दीदार कर सकते हैं। यहां दिन में कैंप लगाकर भी रुक सकते हैं। चंबल नदी के किनारे खूबसूरत लहरों को टकराते हुए देख सकते हैं। गांव की आबादी क्षेत्र से दूर है। चंबल के तट पर दो विशाल शिलाखंड स्थित हैं। इन शिलखंडो में एबाबिल पक्षी के मिट्टी से बने सुन्दर घरौंदे होने के कारण इन्हें गांव में ” चिड़ी वाला पत्थर “भी कहते हैं। कंवला जून 2020 में चंबल के प्राकृतिक सौंदर्य, लहरों की अटखेलियों के दृश्य और एक नदी के तट की अद्भुत छटा लिए दुनिया के सामने आया।

हालांकि ये कोई बड़े टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित नहीं हुआ है, इसलिए यहां पास में बाजार जैसी चीजें नहीं मिलेंगी। आप खाना-पीना ले जाकर पिकनिक की तरह एंजॉय कर सकते हैं।

बहरहाल, गडरारोड का रेडाणा गांव अन्य गांवों की तरह रेत से सटा इलाका है। यहां भी दूर-दूर तक सिर्फ रेत का समंदर है। यह बेहद कम बारिश वाला इलाका है। गर्मी में तापमान में यहां 50 डिग्री तक पहुंच जाता है। बाड़मेर से आने वाले पर्यटकों के लिए रेडाणा के रण से पहले 16 शताब्दी के किराडू मन्दिर, माता संचियाय का मंदिर, इंद्रोई स्थित मांशक्ति का मंदिर और हालो पोतरो की बस्ती का ग्रामीण परिवेश का खास आकर्षण का केंद्र बना नजर आता है।