Kota Road Accident: खाटूश्यामजी जा रही ट्रैवलर गाड़ी पुलिया से नीचे गिरी: कोटा हादसे में जान गंवाने वालों का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार
Kota Road Accident: Traveler vehicle heading to Khatu Shyamji falls off a culvert; last rites of those who lost their lives in the Kota accident held amidst a somber atmosphere.

Kota Road Accident: कोटा के नजदीक हुए भीषण सड़क हादसे की वजह से कई हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां पूरी तरह उजड़ चुकी हैं। रविवार के दिन जब इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांवों में पहुंचे, तो चारों तरफ गमगीन और मायूसी का माहौल फैल गया। दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले जिन घरों में त्योहार की खुशियां और तैयारियां शुरू होने वाली थीं, वहां अब अपने प्रियजनों के बिछड़ जाने का गहरा दुख और सन्नाटा पसरा हुआ है। बैतूल जिले के विभिन्न गांवों में लोगों ने रोते-बिलखते हुए नम आंखों से अपने परिजनों को अंतिम विदाई दी।
भयानक दुर्घटना और रेस्क्यू कार्य में आई मुश्किलें
यह दर्दनाक सड़क हादसा राजस्थान राज्य के कोटा जिले के अंतर्गत आने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर शनिवार की सुबह लगभग छह बजे घटित हुआ था। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से खाटूश्यामजी के दर्शन करने के लिए जा रही एक टेम्पो ट्रैवलर गाड़ी कराड़िया टोल प्लाजा के पास स्थित एक पुलिया से अनियंत्रित होकर करीब पंद्रह फीट नीचे जा गिरी।
इस गंभीर दुर्घटना के कारण मध्य प्रदेश के कुल आठ लोगों की मौके पर या उपचार के दौरान मौत हो गई, जिनमें सात लोग बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र के रहने वाले थे जबकि एक व्यक्ति भोपाल से संबंधित था। इसके अलावा इस दुर्घटना में सत्रह यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सुबह सवेरे अंधेरा अधिक होने के कारण राहत और बचाव कार्य समय पर शुरू नहीं हो सका, और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कई शव गाड़ियों की सीटों के बीच बुरी तरह फंस गए थे जिन्हें काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। पुलिस अधिकारियों का अनुमान है कि वाहन चला रहे चालक को अचानक झपकी आ जाने की वजह से यह अनर्थ हुआ।
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गांवों में एक साथ जलीं कई चिताएं और बिखरा दर्द
सरकारी स्कूल में शिक्षिका के पद पर कार्यरत अरुणा झड़बड़े का शव रविवार को उनके गृहग्राम घाट बिरोली पहुंचा, जहाँ परिजनों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। इसी तरह खेड़ी रामोसी गांव में कृष्णराव और उनकी बेटी त्रिशा घोड़की के शव लाए गए, जहाँ पिता और पुत्री की अर्थियां एक साथ उठीं और एक ही चिता पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। कृष्णराव एक सहकारी समिति में सेल्समैन का कार्य करते थे।
सिरखेड़ गांव के रहने वाले राजकुमार उर्फ राजू बोड़खे जो भोपाल में पेट्रोल पंप पर नौकरी करते थे, उनकी और उनकी पत्नी अनीता दोनों की इस हादसे में मौत हो गई। जब दोनों के शव गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया और पति-पत्नी का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। वहीं ग्राम सर्रा के रहने वाले युवा ओम सूर्यवंशी जो भोपाल से एमटेक की इंटर्नशिप कर रहे थे, उनका शव पहुंचने पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
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अधूरे रह गए दीपावली साथ मनाने के सभी सुनहरे सपने
इस हृदयविदारक घटना में जान गंवाने वाले एक अन्य यात्री के परिजन राज साबले ने जानकारी देते हुए बताया कि ये सभी लोग धार्मिक दर्शन करने की बात कहकर घर से खुशी-खुशी रवाना हुए थे और बहुत जल्द वापस लौटने का कहकर गए थे। इन सभी पीड़ित परिवारों ने इस बार आगामी दीपावली का त्योहार अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर बहुत ही धूमधाम से मनाने की पूरी योजना बना रखी थी। परंतु किसी ने भी यह कभी नहीं सोचा था कि यह धार्मिक यात्रा उनके जीवन की आखिरी यात्रा साबित होगी। इस अप्रत्याशित और भयानक हादसे ने त्योहार की खुशियों को मातम में बदल दिया है।
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