Karwa Chauth Puja: पति-पत्नी के प्रेम और समर्पण का प्रतीक पर्व करवा चौथ हर वर्ष कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व खासतौर पर सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। इस वर्ष करवा चौथ 10 अक्टूबर शुक्रवार को मनाया जाएगा।
व्रत का समय और चंद्रमा का महत्व
पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर गुरुवार की रात 2.49 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर, शुक्रवार की रात 12.24 बजे तक रहेगी। व्रत की समाप्ति चंद्रमा को अर्ध्य देने के साथ होती है। इस दिन महिलाएं कठिन व्रत का पालन करती हैं और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ अपने पति की सलामती और सौभाग्य की कामना करती हैं। चंद्रमा को पुरुष रूपी ब्रह्मा माना जाता है, इसलिए व्रती उसे अर्ध्य देती हैं।
छलनी से चंद्रमा और पति का दर्शन
व्रत के अंत में महिलाएं छलनी का उपयोग कर चंद्रमा और अपने पति का दर्शन करती हैं। मान्यता है कि छलनी में मौजूद हजारों छेदों से चंद्रमा के प्रतिबिंब और पति के दर्शन किए जाते हैं। इससे पति की आयु और सौभाग्य बढ़ता है।

करवा चौथ की यह है पूजा विधि
करवा चौथ के दिन सुबह उठकर स्नान करना और सरगी ग्रहण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा चौकी पर करवा माता की तस्वीर रखकर दीपक, सिंदूर, अक्षत, हल्दी और फूल अर्पित किए जाते हैं। नए जल से भरे कलश के पास दीपक प्रज्ज्वलित किया जाता है और धूपबत्ती जलाई जाती है।
व्रती कथा सुनकर बड़ों से आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। रात में चंद्रमा निकलने पर उसे जल अर्पित करके छलनी से पति का दर्शन करती हैं और पति के हाथों से व्रत का पहला जल ग्रहण करती हैं।
करवा चौथ का ऐतिहासिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार यह व्रत पहली बार माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। इसके अलावा माता सीता ने भी भगवान राम के लिए यह व्रत किया था। तब से लेकर आज तक सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सौभाग्य की कामना के लिए इस व्रत का पालन करती हैं।
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करवा चौथ व्रत के नियम
- सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें।
- काले रंग के वस्त्र और चीजों का उपयोग न करें।
- व्रत कथा 16 श्रृंगार और लाल जोड़े में सुनें।
- चंद्रमा देखने के बाद ही व्रत का पारण करें।
- दिनभर मन को शांत रखें और नकारात्मक भाव न रखें।
- संध्या में पूजा अवश्य करें।
- तामसिक चीजों का सेवन न करें।
- चंद्रमा को अर्ध्य दें और सुहागिनों को सामर्थ्य अनुसार दान दें।
- व्रत निर्जला रखा जाएं।
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इन राज्यों में धूमधाम से आयोजन
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान में यह पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाएं कई दिनों पहले से करवा चौथ की तैयारी शुरू कर देती हैं। इस दिन विशेष पूजा, श्रृंगार और कथा के माध्यम से सुहागिनों की भक्ति और प्रेम की झलक देखने को मिलती है।
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