Innovative Farming in MP: स्वीटकॉर्न और केले की खेती से बदली किसानों की तकदीर, एमपी में लाखों की कमाई की मिसाल
Innovative Farming in MP: पांढुर्णा और छिंदवाड़ा के किसानों ने आधुनिक खेती से साबित किया, सही फसल और तकनीक से खेती बन सकती है मुनाफे का सौदा

Innovative Farming in MP: मध्य प्रदेश में जब खेती को घाटे का सौदा माना जाने लगा था, उसी समय कुछ किसानों ने मेहनत, नई सोच और आधुनिक तकनीक के सहारे यह साबित कर दिया कि कृषि आज भी मुनाफे का मजबूत जरिया बन सकती है। वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाए जाने के बीच ऐसे ही नवाचारी किसानों की कहानियां सामने आ रही हैं, जो न केवल खुद आत्मनिर्भर बन रहे हैं बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं।
नई फसल और उन्नत तरीके अपना रहे किसान
प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों, फसल विविधता और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना है। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए कई किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नई फसलों और उन्नत तरीकों को अपना रहे हैं। पांढुर्णा और छिंदवाड़ा जिले के किसानों ने इसके उदाहरण पेश किए हैं।
स्वीटकॉर्न से सात एकड़ में शानदार मुनाफा
पांढुर्णा जिले के ग्राम राजना के किसान रमेश सातहाते ने स्वीटकॉर्न की खेती कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने सात एकड़ क्षेत्र में स्वीटकॉर्न की फसल ली और इससे दस लाख रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमाया। प्रति एकड़ लगभग डेढ़ लाख रुपये की आय ने यह साबित कर दिया कि सही फसल और सही बाजार मिलने पर खेती बेहद लाभकारी हो सकती है।

खेत से ही हुई उपज की बिक्री
किसान रमेश सातहाते के अनुसार स्वीटकॉर्न की बुवाई अक्टूबर महीने में की गई थी। फसल तैयार होते ही व्यापारी सीधे खेत पर पहुंचे और 15 रुपये प्रति किलो की दर से उपज खरीदकर रायपुर और नागपुर जैसे बड़े बाजारों में ले गए। प्रति एकड़ औसतन 120 क्विंटल उत्पादन मिला। लगभग 30 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च निकालने के बाद भी अच्छी खासी बचत हुई। इस तरह की खेती अब आसपास के किसानों का भी ध्यान आकर्षित कर रही है।
अन्य किसानों में भी बढ़ा रुझान
राजना और पास के सिवनी गांव में स्वीटकॉर्न की सफलता देखने के बाद करीब 50 किसानों ने रबी सीजन में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में इस फसल को अपनाया है। किसान मान रहे हैं कि बाजार की मांग को समझकर और तकनीक का सही उपयोग कर खेती को बेहतर आमदनी का जरिया बनाया जा सकता है।
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पथरीली जमीन में केले की खेती का प्रयोग
छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम भुताई के किसान कैलाश पवार ने एक अलग तरह का प्रयोग किया। उन्होंने ऐसी पथरीली और मुरम वाली जमीन पर केले की खेती की, जहां सामान्य तौर पर खेती को मुश्किल माना जाता है। करीब 18 एकड़ में उन्होंने जी-9 किस्म के केले लगाए और आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया।
कम समय में तैयार हुई फसल
किसान कैलाश पवार ने बताया कि उन्होंने अप्रैल महीने में पुणे से जी-9 किस्म के पौधे मंगवाए थे। रोपण के करीब 11 महीने बाद फसल पूरी तरह तैयार हो गई है। 15 फरवरी के बाद मार्च तक कटाई पूरी होने की उम्मीद है। अनुमान है कि प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो सकती है। फसल की गुणवत्ता देखकर जबलपुर और नागपुर के व्यापारी भी खेत पर आकर खरीदारी के लिए संपर्क कर रहे हैं।
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अन्य फसलों में भी आजमाया नवाचार
कैलाश पवार पहले से ही नई फसलों के प्रयोग के लिए जाने जाते हैं। पिछले साल उन्होंने छह एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती कर अच्छा लाभ कमाया था। इस वर्ष भी उन्होंने स्ट्रॉबेरी के साथ एक एकड़ में ब्लूबेरी और एक एकड़ में गोल्डन बेरी की खेती की है, जिसकी पैदावार फरवरी के बाद बाजार में आने की संभावना है। कृषि विभाग की टीम ने भी उनके खेत का निरीक्षण कर अपनाई गई तकनीकों की सराहना की है।
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