India and Australia: भारतीयों के लिए बड़ी खुशखबरी! भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ खास समझौता, अब इन्हेंं मिलेगी सुविधा
Great news for Indian! Special agreement between India and Australia, now they will get facility

India and Australia: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता हेतु एक ढांचागत तंत्र पर हस्ताक्षर किए जो दोनों देशों के बीच छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने में मदद करेगा। भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर के बीच 2 मार्च को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता 21 मार्च 2022 को आयोजित दूसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वर्चुअल शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा दर्शायी गई प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसके तहत दोनों नेताओं ने योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता के लिए एक संयुक्त कार्यबल स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की थी।
इसी के अनुरूप एक कार्यबल का गठन किया गया जिसमें शिक्षा एवं कौशल मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी तथा दोनों पक्षों की नियामक संस्थाएं शामिल हुईं। इस कार्यबल ने एक व्यापक तंत्र का सुझाव दिया जो दोनों देशों की शिक्षा एवं कौशल संबंधी योग्यताओं को कवर करता है और शिक्षा एवं कौशल संबंधी योग्यताओं के विभिन्न स्तरों की पारस्परिक रूप से पहचान करके शिक्षा एवं रोजगार के उद्देश्यों के लिए युवाओं की दोतरफा आवाजाही को सुविधाजनक बनाने में मदद करेगा।
मीडिया को संबोधित करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि योग्यता की पारस्परिक मान्यता हेतु जी-टू-जी तंत्र पर हस्ताक्षर, आईईआईएफ महत्वपूर्ण कौशल परियोजना की घोषणा और 11 संस्थागत समझौता ज्ञापन भारत एवं ऑस्ट्रेलिया के बीच शैक्षिक संबंधों का एक ऐतिहासिक क्षण है। आज के घटनाक्रम शिक्षा और रोजगार के उद्देश्य से छात्रों और पेशेवरों की दोतरफा आवाजाही के लिए अधिक अवसर पैदा करेंगे, और भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंधों की साझा आकांक्षाओं को साकार करने के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा सक्षम बनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
यह बोले आस्ट्रेलियाई शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर (India and Australia)
मीडिया को संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए, ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों के बीच शिक्षा के साथ-साथ कौशल के क्षेत्र में साझेदारी को व्यापक बनाने के लिए बहुत तत्पर है। उन्होंने आगे कहा कि आज हस्ताक्षर किए गए समझौते से छात्रों को एक-दूसरे के देश में अध्ययन करने में आसानी होगी और शिक्षा तथा कौशल संबंधी योग्यता के विभिन्न स्तरों को मान्यता भी मिलेगी। भारत द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सराहना करते हुए, ऑस्ट्रेलियाई मंत्री ने कहा कि अपने दायरे के सन्दर्भ में यह विस्मयकारी है और नौकरियों, व्यवसायों, आर्थिक उत्पादकता तथा सभी क्षेत्रों में अवसर पैदा करने के माध्यम से यह भारत को परिवर्तित कर देगा।
वर्ष 2035 के लिए भारत का यह है लक्ष्य
उन्होंने कहा कि भारत ने 2035 तक अपने 50 प्रतिशत युवाओं को उच्च शिक्षा या कौशल शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखा है और ऑस्ट्रेलिया को इस कार्यक्रम में भारत के साथ भागीदारी करने का सौभाग्य प्राप्त होगा। ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय अपने भारतीय समकक्षों के साथ संयुक्त/दोहरी डिग्री या संस्थानों की प्रतिरूप व्यवस्था के माध्यम से काम करने के लिए उत्साहित हैं, जिनके लिए हाल ही में एनईपी2020 के तहत सुविधा प्रदान की गई है। ऑस्ट्रेलियाई मंत्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया शिक्षा क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा देकर दोनों देशों के बीच संबंधों की प्रगाढ़ता और गंभीरता को आगे ले जाना चाहता है।
कृषि क्षेत्र में भी किया जाएगा सहयोग (India and Australia)
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए, श्री क्लेयर ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार, भारत के लिए महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र में कौशल कार्यक्रम के संचालन के लिए 1.89 मिलियन डॉलर का योगदान देगी। उन्होंने आगे बताया कि ऑस्ट्रेलिया भारतीय छात्रों के लिए शिक्षा वीजा के लंबित मामलों को कम करने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर काम कर रहा है। श्री क्लेयर ने स्वागत व आतिथ्य के लिए श्री प्रधान का आभार व्यक्त किया और कहा कि वे वर्ष के अंत में उनके साथ होने वाली बैठक की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
आस्ट्रेलिया: उच्च शिक्षा का पसंदीदा स्थान
हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया उच्च शिक्षा के लिए और व्यावसायिक कौशल हासिल करने के लिए भारतीय छात्रों के बीच सबसे पसंदीदा स्थलों में से एक बन गया है। भारत में शॉर्ट और लॉन्ग टर्म पढ़ाई, इंटर्नशिप और शोध के लिए आने हेतु ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई छात्रों को सुविधा प्रदान करने के लिए बातचीत चल रही है। उच्च शिक्षा, कौशल विकास और प्रशिक्षण आदि में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संस्थागत सहयोग की बेशुमार संभावनाएं हैं। भारत सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में खासकर संयुक्त/दोहरी डिग्री कार्यक्रमों की सुविधा देकर विदेशी संस्थानों के साथ साझेदारी करने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण में भी ऑस्ट्रेलिया एक महत्वपूर्ण भागीदार है और दोनों देश क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण पर एक साथ काम कर रहे हैं।



