IAS Success Story: गांव में की पढ़ाई, डिप्रेशन के कारण एनडीए से निकाला फिर लाखों की जॉब छोड़ इस तरह आईएएस अधिकारी बने मनुज जिंदल
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IAS Success Story: देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी की परीक्षा है। जिसमें हर साल लाखों उम्मीदवार बैठते है और बहुत कम लोगों का सिलेक्शन हो पाता है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई मुश्किलों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आज ऐसे ही शख्स की सक्सेस स्टोरी के बारे में बताएंगे, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को क्लियर करने लिए बहुत कठिनाईयों का सामना किया है। बता दें कि मनुज जिंदल ने साल 2017 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 53वीं रैंक हासिल की थी। तो आइए जानते है मनुज जिंदल की संघर्ष की कहानी के बारे में…..
आईएएस मनुज जिंदल मूल रूप से गाजियाबाद जिले के एक गांव के रहने वाले है। उनकी शुरुआती शिक्षा गांव में और फिर देहरादून में हुई। साल 2005 में 12वीं पास करने के तुरंत बाद मनुज जिंदल का सिलेक्शन एनडीए में हो गया। एनडीए में उनका पहले टर्म में तो बहुत अच्छा परफॉर्मेंस रहा। लेकिन दूसरे टर्म तक आते-आते वह एंजाइटी और डिप्रेशन के शिकार हो गए। डिप्रेशन की समस्या इतनी गंभीर हो गई कि एनडीए के अधिकारियों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया। वहां तीन-चार महीने तक इलाज चला। आखिर में एकेडमी ने उन्हें निकाल दिया।
परिवार ने दिया प्रोत्साहन (IAS Success Story)
दरअसल, डिप्रेशन की वजह को मनुज कुछ नहीं समझ पा रहे थे, ऐसे में उन्हें एनडीए से निकाल दिया गया। इसके बाद उनका परिवार उन्हें घर लेकर आया। उनके पिता और भाई ने उनका हमेशा साथ दिया और हमेशा सकारात्मक माहौल बनाए रखा और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
डिप्रेशन से निकलने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के बारे में सोचा। इसके बाद मनुज को अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया में पढ़ाई का मौका मिल गया। यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनियर से ग्रेजुएशन के बाद उन्हें बर्कलेज में जॉब मिल गई। यहां उन्होंने शानदार सैलरी पैकेज पर तीन साल जॉब किया।
सिविल सेवा परीक्षा देने का किया फैसला
यहां उन्होंने शानदार सैलरी पैकेज पर तीन साल जॉब किया। इस दौरान वह इंडिया आए तो उनका छोटा भाई यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। मनुज का भी मन हुआ कि भारत वापस आकर कुछ सार्थक काम किया जाए। उन्होंने तैयारी शुरू की और साल 2014 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी।
पहले अटेम्प्ट में उनका मेन्स में सिलेक्शन हो गया। लेकिन इंटरव्यू में सिलेक्शन नहीं हुआ। इसके बाद दूसरा अटेम्प्ट दिया। इसमें भी वह इंटरव्यू तक गए, लेकिन रिजर्व लिस्ट में आ गए।
इसके बाद साल 2017 में उन्होंने तीसरी बार यूपीएससी परीक्षा दी। इस बार उनकी ऑल इंडिया 52वीं रैंक आई। वह महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी हैं।
मनुज जिंदल ने दिया हमेशा प्रोत्साहन
मनुज जिंदल ने बताया कि अचीवमेंट से कभी भी आपकी पर्सनालिटी का पता नहीं लगाया जा सकता है। कई बार आप बहुत सक्सेसफुल होते हैं और तब भी आप अपनी जिंदगी में निराश होते हैं। इसलिए सबसे पहले खुद को समझने की कोशिश करनी चाहिए, वहीं अगर आप कभी भी डिप्रेशन का शिकार होते हैं तो इस पर खुलकर बात करें। अगर आप अकेला महसूस कर रहे हैं या किसी बात से परेशान है तो छोटी-छोटी चीजों में खुशियां ढूंढने की कोशिश करें, जैसे अगर आप घर पर रहते हैं तो अपने घर के छोटे-बड़े काम खुद करें, किसी जानवर के साथ खेलें, थोड़ा सा वॉक करें, अपने शरीर को अपने मन पर हावी ना होने दें।
परिवार ने दिया प्रोत्साहन (IAS Success Story)
सिविल सेवा परीक्षा देने का किया फैसला


