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IAS Success Story: दो बार मिली असफलता, तीसरी बार में ऑल इंडिया में 19वीं रैंक हासिल कर श्‍वेता अग्रवाल बनीं IAS ऑफिसर

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IAS Success Story: दो बार मिली असफलता, तीसरी बार में ऑल इंडिया में 19वीं रैंक हासिल कर श्‍वेता अग्रवाल बनीं IAS ऑफिसर
Source: Credit – Social Media

IAS Success Story: यूपीएससी परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। जिसमें सफलता पाने के लिए उम्मीदवारों को काफी मेहनत करनी पड़ती है। इस परीक्षा को कई बार बेहद समृद्ध परिवारों के साधन सम्पन्न उम्मीदवार भी हरसंभव कोशिश के बावजूद उत्तीर्ण नहीं कर पाते हैं। वहीं दूसरी ओर अपने अथक परिश्रम से गरीब परिवार के उम्मीदवार भी सफलता का परचम लहरा देते हैं।

आज हम आपको एक ऐसे ही आईएएस अधिकारी (IAS Officer) की कहानी बताने जा रहे हैं जो एक गरीब परिवार से थीं। बता दे कि गरीब परिवारों के बच्चे जब यूपीएससी की परीक्षा पास करके अधिकारी बनते हैं तो और भी कई लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन जाते हैं। आईएएस अधिकारी श्वेता अग्रवाल भी उन्हीं प्रतिभाओं में से एक हैं।

श्वेता ने बुनियादी शिक्षा सुविधाओं को हासिल करने से लेकर यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस बनने तक कई सारी बाधाओं को पार किया है। श्वेता अग्रवाल की सफलता की कहानी कई उम्मीदवारों को आज भी प्रोत्साहित करती है।

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।’ आपने कभी ना कभी ये पंक्तियां जरूर पढ़ी या सुनी होंगी, लेकिन ये लाइन ऐसे ही नहीं लिखी गईं, बल्कि कई लोगों ने इस बात को साबित भी किया है। आईएएस श्वेता अग्रवाल के संघर्ष की कहानी पढ़कर ऐसा लगता कि यह पंक्तियां शायद उन्हीं के लिए लिखी गई हो।

IAS Success Story: दो बार मिली असफलता, तीसरी बार में ऑल इंडिया में 19वीं रैंक हासिल कर श्‍वेता अग्रवाल बनीं IAS ऑफिसर
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श्वेता अग्रवाल का परिचय (IAS Success Story)

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के भद्रेश्वर में एक रूढ़िवादी मारवाड़ी परिवार में श्वेता का जन्म ऐसे समय में हुआ जब परिवार का हर सदस्य किसी लड़के के आने की उम्मीद कर रहा था। उनके माता-पिता के अलावा उनके परिवार में उनको सपने देखने के लिए किसी ने प्रोत्साहित नहीं किया। उनके दादा-दादी का मानना था कि लड़कियों को केवल घरेलू काम आने चाहिए और उन्हें सिर्फ घर संभालना चाहिए।

इन तमाम बाधाओं के साथ श्वेता ने एक बड़ा सपना देखा और उसे वास्तविकता में बदलने की दिशा में कड़ी मेहनत करना शुरू कर दी। उनके घर में 15 बच्चे थे, जिनमें श्वेता सबसे छोटी थी। इसके बाद भी श्वेता अपने घर की पहली महिला थी जिन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की थी। उनके चचेरे भाई-बहनों की जिस उम्र में शादी हो रही थी, उस उम्र में श्वेता किताबों में व्यस्त थीं। उनकी इसी मेहनत और लगन ने उन्‍हें UPSC की परीक्षा में सफलता दिलाई। श्वेता के पिता एक दुकानदार थे।

अपने परिवार की पहली ग्रेजुएट (IAS Success Story)

समय गुजरा और श्वेता के पिताजी के हालात थोड़े बदले। यहां श्वेता ने भी क्लास 12 में अपने स्कूल में टॉप किया और फिर बारी आई कॉलेज की। उनका परिवार पहले ही श्वेता के पढ़ने में कोई रुचि नहीं दिखाता था, क्योंकि उनकी फैमिली में 18 साल तक लड़कियों की शादी कर दी जाती थी। अब श्वेता के कॉलेज जाने की बात से परिवार और तुनक गया।

श्वेता के चाचा ने तो उन्हें यहां तक कहा कि पढ़-लिखकर करना क्या है, आगे वैसे भी चूल्हा-चौका ही करना है। इधर पहले से इरादे की पक्की श्वेता ने उस दिन ठाना कि इन्हें कुछ करके दिखाएंगी। उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और वहां की टॉपर बनीं। इसके बाद श्वेता ने एमबीए किया और एमबीए पास करने के बाद एक एमएनसी में अच्छे पद पर जॉब करने लगीं।

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इस तरह मिली सफलता

श्वेता अग्रवाल ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जोसेफ कॉन्वेंट बैंडेल स्कूल से पूरी करने के बाद सेंट जेवियर्स कॉलेज कोलकाता से इकोनोमिक्स में ग्रेजुएशन किया। श्वेता अग्रवाल ने इससे पहले दो बार यूपीएससी की परीक्षा पास की थी, लेकिन आईएएस अधिकारी बनने पर अपनी नजरें गड़ाए हुए थीं।

पहली बार में श्वेता की 497 रैंक आई थी और उन्हें आईआरएस मिली थी। दोबारा में साल 2015 में श्वेता फिर सेलेक्ट हुईं और इस बार रैंक आई 141 और दस नंबर से वे आईएएस का पद पाने से चूक गई थीं। दूसरी बार में वे आईपीएस बनने में सफल हुईं, लेकिन उनका लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ आईएएस बनाना था।

आखिरकार साल 2016 में उनका सपना पूरा हुआ और ऑल इंडिया 19वीं रैंक के साथ वे आईएएस अधिकारी बनीं। बता दें कि श्वेता अग्रवाल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। श्वेता अग्रवाल आईएएस अधिकारी के रूप में बंगाल कैडर में शामिल हुई।

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