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IAS Success Story: पिता की हत्‍या, मां का भी कैंसर से निधन, उसके बाद भी हिम्‍मत नहीं हारी और किंजल सिंह बन गईं आईएएस अधिकारी, जानिए उनकी संघर्ष भरी कहानी….

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IAS Success Story: पिता की हत्‍या, मां का भी कैंसर से निधन, उसके बाद भी हिम्‍मत नहीं हारी और किंजल सिंह बन गई आईएएस अधिकरी, जानिए उनकी संघर्ष भरी कहानी....
Source: Credit – Social Media

IAS Success Story:  आज की यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जिनका जीवन बहुत ही संघर्ष और दर्द से भरा है। इनकी पहचान देश की एक तेज-तर्रार आईएएस ऑफिसर के रूप में होती है और इनके सामने बड़े-बड़े अपराधियों के भी पसीने छूट जाते हैं। लेकिन, किंजल की संघर्ष से लेकर यूपीएससी (UPSC) पास कर आईएएस ऑफिसर बनने तक की कहानी बहुत ही भावुक और दर्दनाक है।

जिस छोटी उम्र मे घर में बच्चों के खेलने के दिन थे, उस उम्र में किंजल सिंह अपनी मां के साथ उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर से दिल्ली तक का सफर पूरा करते हुए सुप्रीम कोर्ट आती और पूरा दिन अदालत में बैठने और इंसाफ के इंतजार के बाद रात में फिर उसी सफर पर निकल जाती। लेकिन, उस नन्ही सी बच्ची को इस बात का अनुमान कभी भी नहीं रहा होगा कि उनका यह संघर्ष पूरे 31 साल तक चलने वाला है।

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पिता की हत्या के बाद उनके संघर्ष की कहानी

जब किंजल सिर्फ छह महीने की थी, उसी समय उनके पुलिस ऑफिसर पिता की हत्या पुलिस के ही स्टाफ वालों ने ही कर दी। मात्र 6 माह की उम्र में ही अपने पिता को खो देने के बाद अपनी विधवा माँ के हाथों में पली और बड़ी हुई किंजल ने बचपन से ही संघर्ष को बेहद करीब से महसूस किया। विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करते हुए स्वयं के अंदर परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति पैदा की।

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2004 में ग्रेजुएशन में किया टॉप

किंजल और प्रांजल की प्रारंभिक पढ़ाई पूरी होने के बाद किंजल ने दिल्‍ली के श्री राम कॉलेज में प्रवेश लिया। जिस वर्ष किंजल की मां की मृत्‍यु हुई, उसी साल किंजल ने दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में टॉप किया था। इस बीच किंजल ने अपनी छोटी बहन को भी दिल्‍ली बुलाया। दोनों बहनों ने आईएएस की तैयारी शुरू कर दी। किंजल कहती है, हम दोनों दुनिया में अकेले रह गए थे। हम नहीं चाहते थे कि किसी को पता चले कि हम दुनिया में अकेले हैं।

अब छोटी बहन प्रांजल की भी जिम्मेदारी किंजल के कन्धों पर आ पड़ी थी। लेकिन, मां-पिता की तरह साहसी किंजल ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार अपने प्रयास में लगी रहीं। साल 2008 में दूसरे प्रयास में वह IAS के लिए सिलेक्ट हुईं। यही नहीं उसी साल उनकी छोटी बहन प्रांजल भी IRS के लिए सिलेक्ट हुई। दोनों बहनों ने अपने मां-पिता का सपना पूरा कर दिया था। अब समय था उस संकल्प को पूरा करने का जो उनके मां ने पिता के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए लिया था।

किंजल ने मजबूती से CBI कोर्ट में पिता की हत्या का मुकदमा लड़ा और उसमें उनकी जीत हुई। 5 जून, 2013 को लखनऊ CBI की विशेष कोर्ट ने डीएसपी केपी सिंह की हत्या में 18 पुलिसकर्मियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। उस समय किंजल सिंह बहराइच की डीएम थीं। उनका कहना है कि परिस्थिति चाहे जैसी भी बिना हिम्‍मत कभी नहीं हारना चाहिए।

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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