IAS Mudra Gairola Success Story: संघर्ष से सफलता तक: IAS मुद्रा गैरोला ने 50 साल बाद पूरा किया पिता का अधूरा सपना

IAS Mudra Gairola Success Story: कहा जाता है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती और जो व्यक्ति बार-बार गिरकर भी उठता है, वही इतिहास रचता है। जीवन की कठिन राहों पर चलते हुए हार न मानने का जज्बा ही इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचाता है। ऐसी ही प्रेरक मिसाल बनी हैं आईएएस अधिकारी मुद्रा गैरोला, जिन्होंने लगातार असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई और आखिरकार अपने पिता के दशकों पुराने सपने को साकार कर दिखाया।

बचपन से ही पढाई में थीं तेज

उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग से ताल्लुक रखने वाली मुद्रा गैरोला आज देश की युवा आईएएस अधिकारियों में गिनी जाती हैं। हालांकि उनका परिवार वर्तमान में दिल्ली में निवास करता है, लेकिन उनकी जड़ें पहाड़ों से जुड़ी हुई हैं। बचपन से ही मुद्रा पढ़ाई में बेहद तेज थीं और हर परीक्षा में उन्होंने अपनी मेहनत का लोहा मनवाया।

मुंबई में डेंटल कोर्स में दाखिला

मुद्रा ने दसवीं कक्षा की परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इसके बाद बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में उन्होंने 97 प्रतिशत अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन किया। स्कूल स्तर पर ही यह साफ हो गया था कि वह किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता रखती हैं। अच्छे अंकों के दम पर उन्हें मुंबई के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में बीडीएस यानी डेंटल कोर्स में दाखिला मिला। यहां भी उन्होंने पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और गोल्ड मेडल हासिल किया।

पिता ने देखा था मुद्रा के लिये यह सपना

डॉक्टर बनने के बाद उनका करियर एक सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ सकता था, लेकिन परिवार में एक सपना अधूरा था। उनके पिता लंबे समय से चाहते थे कि उनकी बेटी देश की सर्वोच्च सिविल सेवा में चयनित होकर आईएएस अधिकारी बने। इस सपने को पूरा करने के लिए मुद्रा ने बड़ा फैसला लिया।

बीच में छोड़ दी एमडीएस की पढ़ाई

ग्रेजुएशन के बाद मुद्रा दिल्ली आईं और एमडीएस में दाखिला लिया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने महसूस किया कि उनका असली लक्ष्य कुछ और है। पिता के सपने को साकार करने के लिए उन्होंने एमडीएस की पढ़ाई बीच में छोड़ दी और पूरी तरह यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गईं।

पहली बार में इंटरव्यू तक पहुंचने में सफल

यूपीएससी का सफर उनके लिए आसान नहीं रहा। वर्ष 2018 में उन्होंने पहली बार परीक्षा दी और इंटरव्यू तक पहुंचने में सफल रहीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। इसके बाद 2019 में उन्होंने एक बार फिर प्रयास किया और फिर से साक्षात्कार चरण तक पहुंचीं, लेकिन इस बार भी सफलता हाथ नहीं लगी। साल 2020 उनके लिए और भी चुनौतीपूर्ण रहा, जब वह मुख्य परीक्षा भी पास नहीं कर पाईं।

असफलताओं के बावजूद नहीं मानी हार

इन असफलताओं के बावजूद मुद्रा ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी तैयारी की कमियों को समझा और नए सिरे से रणनीति बनाई। साल 2021 में उनका प्रयास रंग लाया और उन्होंने 165वीं रैंक के साथ यूपीएससी परीक्षा पास की। इस रैंक के आधार पर उनका चयन आईपीएस कैडर में हुआ। हालांकि यह भी एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन उनका सपना अभी अधूरा था।

मुद्रा का लक्ष्य शुरू से ही आईएएस बनना था। इसी वजह से उन्होंने अगले ही साल फिर से परीक्षा दी। साल 2022 में उनकी मेहनत का पूरा फल मिला और उन्होंने 53वीं रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया।

पिता नहीं हो पाए थे साक्षात्कार में सफल

मुद्रा की इस सफलता के पीछे एक भावनात्मक कहानी भी जुड़ी है। उनके पिता ने वर्ष 1973 में यूपीएससी परीक्षा दी थी, लेकिन वह साक्षात्कार में सफल नहीं हो सके थे। करीब 50 साल बाद उनकी बेटी ने वही सपना पूरा कर दिखाया, जिसे पिता अधूरा छोड़ने पर मजबूर हुए थे। आज मुद्रा गैरोला की सफलता न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बार-बार असफल होने के बाद भी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं करते।

सोशल मीडिया पर बैतूल अपडेट की खबरें पाने के लिए फॉलो करें-

देश-दुनिया की ताजा खबरें (Hindi News Madhyapradesh) अब हिंदी में पढ़ें| Trending खबरों के लिए जुड़े रहे betulupdate.com से| आज की ताजा खबरों (Latest Hindi News) के लिए सर्च करें betulupdate.com

Leave a Comment