Homestay Tourism MP: एमपी के पर्यटन ग्रामों में सास-बहुओं की अनोखी साझेदारी, मिलकर चला रहीं होम-स्टे और बन रहीं आत्मनिर्भर
Homestay Tourism MP: छिंदवाड़ा के गांवों में महिलाएं रिश्तों की ताकत से लिख रहीं सफलता की कहानी, 50 से अधिक होम-स्टे का संचालन

Homestay Tourism MP: परिवार के रिश्तों को लेकर समाज में अक्सर कई तरह की धारणाएं देखने को मिलती हैं। खासकर सास-बहू, मां-बेटी या देवरानी-जेठानी के रिश्तों को लेकर तकरार की कहानियां ज्यादा सुनाई देती हैं। लेकिन मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के कुछ पर्यटन ग्राम इन धारणाओं को बदल रहे हैं। यहां गांव की महिलाएं आपसी सहयोग और भरोसे के साथ होम-स्टे का संचालन कर रही हैं और रिश्तों की ताकत को आजीविका और आत्मनिर्भरता में बदलने का काम कर रही हैं।
रिश्तों की साझेदारी से बदल रही तस्वीर
छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्रामों में कई ऐसे परिवार हैं जहां सास-बहू, मां-बेटी या देवरानी-जेठानी मिलकर होम-स्टे चलाती हैं। यह पहल न केवल आय का जरिया बन रही है, बल्कि परिवार के रिश्तों को भी और मजबूत बना रही है।
पर्यटन ग्राम धूसावानी में रहने वाली मनेशी धुर्वे और अलका धुर्वे आपस में सास और बहू हैं। जब उनके यहां पर्यटक आते हैं तो दोनों मिलकर पूरी लगन से उनकी मेहमाननवाजी करती हैं। इसी तरह सावरवानी गांव में मालती यदुवंशी अपनी सास शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम-स्टे का संचालन कर रही हैं।
ऐसी कई कहानियां जिले के अलग-अलग पर्यटन ग्रामों में देखने को मिल रही हैं, जहां परिवार की महिलाएं साथ मिलकर एक नया उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।
महिलाओं को मिल रही नई पहचान
छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्रामों में संचालित होम-स्टे अब केवल आमदनी का साधन भर नहीं रह गए हैं। यह महिलाओं की पहचान, आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी का भी प्रतीक बनते जा रहे हैं।
इन होम-स्टे में महिलाएं मिलकर पर्यटकों का स्वागत करती हैं, उनके लिए भोजन तैयार करती हैं और स्थानीय परंपराओं से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन भी करती हैं। परिवार की महिलाओं की यह साझेदारी यह दिखाती है कि जब महिलाएं एक साथ काम करती हैं तो घर के साथ-साथ पूरा गांव भी विकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
जिले में 50 से ज्यादा होम-स्टे संचालित
मध्यप्रदेश के उन जिलों में छिंदवाड़ा भी शामिल है जहां सबसे अधिक होम-स्टे संचालित हो रहे हैं। वर्तमान में जिले में 50 से अधिक होम-स्टे चल रहे हैं। खास बात यह है कि इन सभी का पंजीयन महिलाओं के नाम पर किया गया है और संचालन की मुख्य जिम्मेदारी भी वही संभाल रही हैं।
सावरवानी, चोपना, काजरा, देवगढ़, चिमटीपुर, गुमतरा और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में स्थानीय महिलाएं घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
स्थानीय संस्कृति और स्वाद बना आकर्षण
गांव की महिलाएं अपने होम-स्टे में आने वाले पर्यटकों के लिए पारंपरिक और स्थानीय व्यंजन तैयार करती हैं। इसके साथ ही लोकनृत्य और लोकगीतों के माध्यम से क्षेत्र की संस्कृति से भी पर्यटकों को रूबरू कराया जाता है।
इससे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन और परंपराओं को करीब से समझने का मौका मिलता है। वहीं दूसरी ओर महिलाओं को सम्मानजनक तरीके से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।
ग्रामीण पर्यटन को मिल रही नई दिशा
इन होम-स्टे का संचालन गांव की महिलाएं खुद संभाल रही हैं। पर्यटकों का स्वागत करने से लेकर रहने और खाने की व्यवस्था तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन तक की जिम्मेदारी वे निभाती हैं।
इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि पारिवारिक रिश्ते केवल भावनात्मक जुड़ाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आपसी सहयोग के जरिए आर्थिक प्रगति का आधार भी बन सकते हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि होम-स्टे की यह व्यवस्था गांव की महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यटन ग्रामों की पहचान भी बढ़ा रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के और विस्तार की उम्मीद भी जताई जा रही है।
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