Gudi Padwa In Betul : मिट्टी पूजन कर भूमि सुपोषण अभियान का शुभारंभ, पुन: सुपोषित करने का लिया संकल्प, किए जाएंगे यह कार्य
Gudi Padwa In Betul: Launch of soil nutrition campaign by worshiping the soil, resolution taken to re-nourish it, these works will be done
▪️ गुड़ी पड़वा पर्व पर भारत भारती विद्यालय परिसर में गुड़ी पूजन कर किया नववर्ष का स्वागत जेड अभियान में सम्मिलित हुए पशुपालन विभाग के अधिकारी
Gudi Padwa In Betul : (बैतूल)। भारत भारती आवासीय विद्यालय परिसर में हिन्दू नववर्ष के अवसर पर गुड़ी पूजन कर हिन्दू नववर्ष का स्वागत किया गया और विश्व कल्याण की कामना की गई। साथ ही आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के जन्म दिवस के अवसर पर अतिथियों ने उनके चित्र का पूजन किया।
शासन के निर्देशानुसार इस वर्ष को गौ रक्षा वर्ष के रूप में मनाया जाना है। इसके अंतर्गत पशुपालन और डेयरी विभाग के पदाधिकारियों की उपस्थिति में भारत भारती गौशाला में गौ पूजन हुआ और गौ आरती की गई। जिसमें भारत भारती परिवार के साथ आसपास ग्रामीण क्षेत्र के युवा कृषक व शासकीय पशु चिकित्सा विभाग से डॉ. शोभना मडावी, डॉ. अशोक बाघमोडे, डॉ. सुरेश वर्टी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर भारत भारती जैविक कृषि प्रक्षेत्र में “भूमि सुपोषण” अभियान प्रारम्भ किया गया। इसके अन्तर्गत खेत की मिट्टी का विधि विधान से पूजन कर उसे सुपोषित एवं जैवविविधता से परिपूर्ण करने का संकल्प लिया गया।
इस अवसर पर सभी को संबोधित करते हुए भारत भारती शिक्षा समिति के सचिव मोहन नागर ने कहा कि वर्तमान में खेती की तकनीकि और मौसम में हुए परिवर्तन का प्रभाव भूमि और पानी दोनों पर पड़ा है। परिणाम स्वरुप मृदा में उपस्थित जीवांश कार्बन के साथ-साथ लाभदायक सूक्ष्म जीवों की विविधता एवं क्रियाशीलता भी प्रभावित हुई है।
इसका कारण अधिक मात्रा में हानिकारक कृषि रसायनों- कीटनाशी, फफूंदनाशी, खरपतवारनाशी और आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करना है। इसके अतिरिक्त नरवाई या फसल अवशेष को खेत में ही जला देना भी एक प्रमुख कारण है, ऐसा करने से मिट्टी के जैविक गुणों, जीवांश कार्बन और लाभदायक सूक्ष्मजीवों में कमी आने के कारण मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में दिन प्रतिदिन गिरावट आ रही है।
श्री नागर ने कहा कि दूसरे परिप्रेक्ष्य में देखे तो आज मृदा में गोबर की खाद भी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुँच पा रही है। जिससे मृदा को न तो पर्याप्त पोषण मिल पा रहा और ना ही लाभदायक सूक्ष्म जीवों की क्रियाशीलता के लिए एक अनुकूल सूक्ष्म मृदा पारिस्थितिकी तंत्र बन पा रहा है।

इन सब बातों को ध्यान में रखकर आज हमें अपने कृषि कार्य वातावरण, मृदा के स्वास्थ को ध्यान में रखकर करना होगा। जिससे की लम्बे समय तक हम आने वाली पीढ़ियों को अन्न उपजाकर देने वाली हमारी धरती माँ को जीवंत बनाकर के रख सके और उत्पादन के साथ गुणवत्ता युक्त अनाज एवं अन्य फसलें प्राप्त कर सकें।
अत: आज हमें भूमि को जीवन्त एवं सुपोषित करने के लिए ” भूमि सुपोषण” के संकल्प के साथ कार्य करने होगे एवं “माता भूमि पुत्रोहं पृथिव्या” इस वाक्य को सार्थक बनाकर अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा।
इस अभियान में भारत भारती परिवार के साथ आसपास ग्रामीण क्षेत्र के युवा कृषक व शासकीय पशुपालन विभाग के अधिकारी, जनजाति शिक्षा के राष्ट्रीय सह संयोजक बुधपाल सिंह ठाकुर, भारत भारती विद्यालय के प्राचार्य जितेंद्र परसाई, प्रधानाचार्य वैभव जोशी समेत अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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