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Gaali Mukt Gaon MP: यह है प्रदेश का पहला “गाली मुक्त” गांव, नियम तोड़ने पर लगाना पड़ता है झाड़ू

Gaali Mukt Gaon MP: This is the state's first "abuse-free" village, where people have to sweep for breaking the rules.

Gaali Mukt Gaon MP: यह है प्रदेश का पहला “गाली मुक्त” गांव, नियम तोड़ने पर लगाना पड़ता है झाड़ू
Gaali Mukt Gaon MP: यह है प्रदेश का पहला “गाली मुक्त” गांव, नियम तोड़ने पर लगाना पड़ता है झाड़ू

Gaali Mukt Gaon MP: मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव अपनी अनोखी पहल के कारण चर्चा में है। यहां लोगों ने मिलकर ऐसा माहौल तैयार किया है, जहां गाली-गलौच को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश की गई है। इस नियम को सख्ती से लागू किया गया है, जिससे गांव की पहचान अब एक आदर्श और संस्कारी गांव के रूप में बनने लगी है।

गांव को मिला गाली मुक्त गांव का दर्जा

बुरहानपुर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित बोरसर गांव (Gaali Mukt Gaon MP) की आबादी लगभग 6 हजार है। इस गांव को “गाली मुक्त” गांव का दर्जा दिया गया है। यहां आम बातचीत में भी अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यदि कोई व्यक्ति गलती से भी गाली देता है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।

Gaali Mukt Gaon MP: यह है प्रदेश का पहला “गाली मुक्त” गांव, नियम तोड़ने पर लगाना पड़ता है झाड़ू

नियम तोड़ने पर जुर्माना और सजा का प्रावधान

ग्राम पंचायत ने इस पहल को लागू करने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। अगर कोई व्यक्ति झगड़े या किसी भी स्थिति में गाली देता है, तो उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा सजा के तौर पर एक घंटे तक गांव की सफाई भी कराई जाती है। यह नियम गांव के सभी लोगों पर समान रूप से लागू होता है।

पंचायत और समाजसेवियों की अहम भूमिका

इस पहल को सफल बनाने में सरपंच अंतरसिंह, उपसरपंच विनोद शिंदे और समाजसेवी अभिनेता अश्विन पाटिल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन लोगों ने मिलकर गांव में सकारात्मक बदलाव लाने का बीड़ा उठाया और लोगों को समझाया कि गाली-गलौच से विवाद बढ़ते हैं।

मुंबई से लौटे अभिनेता ने शुरू की पहल

अभिनेता अश्विन पाटिल करीब 10 साल मुंबई में रहने के बाद अपने गांव लौटे थे। गांव में उन्होंने देखा कि छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौच के कारण बड़े विवाद हो जाते हैं। इसके बाद उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और बुजुर्गों के साथ बैठक की, जिसमें सर्वसम्मति से गांव को गाली मुक्त बनाने का निर्णय लिया गया।

Gaali Mukt Gaon MP: यह है प्रदेश का पहला “गाली मुक्त” गांव, नियम तोड़ने पर लगाना पड़ता है झाड़ू

निगरानी के लिए बनाई गई टीमें

इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए गांव में जगह-जगह पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें साफ लिखा है कि गाली देने पर दंड मिलेगा। इसके अलावा हर वार्ड में निगरानी के लिए टीमें बनाई गई हैं, जो नियमों के पालन पर नजर रखती हैं। इसका असर अब साफ तौर पर गांव में दिखाई देने लगा है।

शिक्षा और जागरूकता पर भी जोर

बोरसर गांव (Gaali Mukt Gaon MP) में केवल गाली-गलौच पर रोक ही नहीं लगाई गई है, बल्कि शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। गांव में बच्चों और युवाओं के लिए एक पुस्तकालय शुरू किया गया है, जहां धार्मिक, सामान्य ज्ञान और स्कूली किताबें उपलब्ध हैं।

फ्री वाईफाई और हरियाली अभियान

गांव को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए चार स्थानों पर मुफ्त वाईफाई की सुविधा शुरू की गई है। इससे ग्रामीण इंटरनेट से जुड़ पा रहे हैं। इसके साथ ही हर घर हरियाली अभियान के तहत पौधे वितरित किए गए हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है।

जरूरतमंदों के लिए सेवा भाव कक्ष

उपसरपंच विनोद शिंदे के अनुसार, गांव में सेवा भाव कक्ष भी शुरू किया गया है। यहां जरूरतमंद लोगों के लिए विभिन्न प्रकार की सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। यह सामग्री समाजसेवियों और दानदाताओं द्वारा दी गई है, जिसका लाभ किसी भी धर्म या जाति का व्यक्ति ले सकता है।

बोरसर गांव बना मिसाल

बोरसर गांव (Gaali Mukt Gaon MP) ने सामूहिक प्रयास से एक नई दिशा दिखाई है। गाली-गलौच पर रोक, शिक्षा को बढ़ावा, डिजिटल सुविधा और सामाजिक सहयोग जैसे कदमों ने इसे एक आदर्श गांव के रूप में स्थापित कर दिया है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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