Custom Hiring Scheme: कृषि यंत्रों के जरिए खेती करने से एक ओर जहां समय की बचत होती है वहीं मजदूरों की भी कम जरुरत होती है। यह बात अलग है कि देश और प्रदेश में अधिकांश कृषक छोटी जोत वाले हैं। ऐसे में इनके लिए कृषि यंत्रों की खरीदी असंभव है।
ऐसे किसानों की ही मुश्किल को आसान करने के लिए सरकार द्वारा कस्टम हायरिंग योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके पश्चात इन कृषि यंत्रों को किसानों को किराए पर देकर इनसे आमदनी प्राप्त की जा सकती है।
संचालक और किसान दोनों को लाभ (Custom Hiring Scheme)
इस योजना से एक ओर जहां कस्टम हायरिंग केंद्र चलाने वाले को लाभ होता है, वहीं दूसरी ओर किसानों को भी बेहद कम खर्च में कृषि यंत्रों का उपयोग करने को मिल जाता है। कई किसान ऐसे हैं जिन्होंने कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना की और अब वे लाखों में खेल रहे हैं।

खेती को बनाया लाभ का व्यवसाय (Custom Hiring Scheme)
ऐसे ही एक प्रगतिशील कृषक हैं बैतूल जिले के डेरी आमढाना गांव के धरम सिंह। जिन्होंने कस्टम हायरिंग सेंटर योजना का लाभ उठाकर खेती को एक लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है। कुछ ही सालों में उनके पास इसके जरिए लाखों की संपत्ति हो चुकी है।
वर्ष 2019 में की थी केंद्र की शुरूआत (Custom Hiring Scheme)
कृषक धरम सिंह ने बताया कि वर्ष 2019 में उन्होंने सहायक कृषि यंत्री कृषि अभियांत्रिकी कार्यालय बैतूल की मदद से कस्टम हायरिंग सेंटर खरीदा। इस योजना के तहत उन्हें यंत्र की खरीद पर अनुदान भी प्राप्त हुआ।

खुद के साथ दूसरों को भी कराए मुहैया (Custom Hiring Scheme)
कस्टम हायरिंग के माध्यम से उन्होंने न केवल स्वयं की खेती को आधुनिक बनाया, बल्कि अन्य किसानों को भी किराए पर यंत्र उपलब्ध कराकर आय का एक नया स्रोत बनाया। उन्होंने बताया कि इस योजना से खेती में काफी लाभ हुआ।
अब इतनी प्रॉपर्टी के बन गए मालिक (Custom Hiring Scheme)
शुरूआती दिनों में ही मेरी आमदनी में बड़ा इजाफा हुआ और धीरे-धीरे मैंने तीन ट्रैक्टर, एक थ्रेशर और पक्का मकान बना लिया। आज मेरी कुल संपत्ति लगभग 45 लाख रुपये की हो चुकी है।
पैडी राइस ट्रांसप्लांटर की खरीदी (Custom Hiring Scheme)
कृषक श्री सिंह ने बताया कि उन्होंने धान की रोपाई को आसान और लागत प्रभावी बनाने के लिए पैडी राइस ट्रांसप्लांटर भी खरीदा है, जिस पर भी उन्हें सरकार से अनुदान प्राप्त हुआ।
इस यंत्र से मिलते हैं इतने फायदे (Custom Hiring Scheme)
पारंपरिक रोपाई विधि में प्रति एकड़ 4 से 5 मजदूरों की जरूरत होती है, जिससे 3 से 5 हजार रुपये तक की लागत आती है। इसके विपरीत यह यंत्र एक दिन में 5 से 7 एकड़ भूमि में रोपाई कर सकता है और इसकी ईंधन खपत भी मात्र 1 लीटर प्रति घंटे है। इससे श्रम लागत में भारी कमी आई है और समय की बचत भी हुई है।
कई किसान ले रहे यंत्रों का लाभ (Custom Hiring Scheme)
उन्होंने बताया कि आज उनके गांव सहित आसपास के कई किसान उनके यंत्रों का लाभ ले रहे हैं और आधुनिक कृषि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। कृषक श्री धरम सिंह ने किसानों को सशक्त बनाने हेतु चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त किया है। (Custom Hiring Scheme)
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