
▪️उत्तम मालवीय, बैतूल
जिले के जनजातीय विभाग (Tribal Department) द्वारा संचालित छात्रावासों और आश्रमों में अधीक्षकों की पदस्थापना (posting of superintendents) में जमकर मनमानी होती है। एक ओर स्कूलों में वैसे ही शिक्षक कम हैं। लेकिन, इसके बावजूद अधिकारी अपने चहेते या सेटिंगबाज शिक्षकों को ही छात्रावास का अधीक्षक बना देते हैं। इसका एक प्रमाण यह भी है कि विभाग ने जिन कर्मचारियों को केवल संविदा अधीक्षक पद के लिए भर्ती किया था, वे स्कूलों में पदस्थ कर दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर छात्रावास या आश्रमों में शिक्षक पदस्थ हैं।
छात्रावासों और आश्रमों में शिक्षकों को पदस्थ करने की नौबत ना आए, इसलिए विभाग ने वर्ष 2008-09 में बकायदा संविदा अधीक्षकों की भर्ती की थी।जिले में 53 संविदा अधीक्षक नियुक्त किए गए थे। इनमें से कुछ ने अन्य जगह बेहतर अवसर मिलने पर नौकरी छोड़ दी वहीं 45 बचे हैं। इन्हें शुरुआत में नियुक्त तो कर दिया गया पर अधिकारी इसी ताक में रहे कि इन्हें कब हटाने का मौका मिले। इधर विभाग ने जैसे ही इनका संविलियन हुआ, वैसे ही इन्हें छात्रावासों से हटाकर स्कूलों में पदस्थ करना शुरू कर दिया गया। वर्तमान में स्थिति यह है कि 17-18 संविदा अधीक्षक ही वर्तमान में छात्रावासों में पदस्थ हैं। यह भी वे हैं जिनका संविलियन नहीं हो पाया है। इनका भी जैसे ही संविलियन होगा, इन्हें हटाकर इनकी जगह सामान्य शिक्षक पदस्थ कर दिए जाएंगे।
इधर जानकारों का कहना है कि इनकी नियुक्ति मूलरूप से केवल अधीक्षक पद के लिए की गई थी। इसके लिए बकायदा उन्हें ट्रेनिंग भी दी गई थी। इसलिए इन्हें अधीक्षक पद पर ही बनाए रखना चाहिए। तीन साल का कार्यकाल होने पर नियमानुसार उन्हें अन्य छात्रावासों में स्थानांतरित किया जाना था। ऐसा न कर इन्हें स्कूलों में पदस्थ किया जा रहा है। दूसरी ओर स्कूलों में पदस्थ और पढ़ाई- लिखाई में प्रशिक्षित शिक्षकों को अधीक्षक बनाया जा रहा है।