Census Questionnaire 2026: देश में लंबे इंतजार के बाद होने जा रही अगली जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मकानों की गणना की तारीख घोषित होने के बाद अब इसके लिए विस्तृत प्रश्नावली भी जारी कर दी गई है। इस प्रश्नावली से साफ हो गया है कि सरकार इस बार घर, परिवार और सुविधाओं से जुड़ी हर बारीकी का आंकलन करेगी। हालांकि मध्यप्रदेश में स्थिति यह है कि मकान गणना शुरू होने में महज सवा दो महीने बचे हैं, लेकिन अब तक राज्य में जनगणना निदेशक का नियमित पद नहीं भरा जा सका है।
मकान गणना के लिए प्रश्नावली जारी
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस साल होने वाली जनगणना के पहले चरण यानी मकान गणना के लिए प्रश्नावली को अंतिम रूप देकर सार्वजनिक कर दिया है। 22 जनवरी को जारी इस प्रश्नावली में बताया गया है कि प्रगणक घर-घर जाकर किन-किन बिंदुओं पर जानकारी जुटाएंगे। इसमें मकान की पहचान से लेकर परिवार, सुविधाएं और उपयोग से जुड़े कुल 33 सवाल शामिल किए गए हैं। इन सवालों के आधार पर सरकार अप्रैल में ही कई अहम सामाजिक और आर्थिक आंकड़ों का आकलन कर लेगी।
जाति से लेकर मकान के उपयोग तक जानकारी
जारी प्रश्नावली से यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार मकान गणना केवल ईंट-पत्थर की गिनती तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और सामाजिक वर्ग से जुड़ी जानकारी भी शामिल है। प्रश्नावली के 12वें सवाल में यह पूछा जाएगा कि परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य वर्ग से संबंधित है या नहीं। इससे सरकार को एससी, एसटी और अन्य वर्गों की स्थिति का प्रारंभिक आकलन मकान गणना चरण में ही मिल जाएगा।
निजी-व्यवसायिक मकानों का होगा खुलासा
प्रश्नावली के जरिए यह भी पता लगाया जाएगा कि कितने लोग अपने मकानों का निजी उपयोग कर रहे हैं और कितने मकान व्यवसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे हैं। किराए पर दिए गए मकानों की स्थिति भी इसी प्रक्रिया में सामने आ जाएगी। इसके साथ ही मकान की हालत, छत, दीवार और फर्श में इस्तेमाल सामग्री की जानकारी भी दर्ज की जाएगी, जिससे आवासीय स्थिति का पूरा खाका तैयार हो सके।
रसोई, ईंधन और खाने की आदतों पर नजर
सरकार इस बार घरों की रसोई तक की जानकारी जुटाने जा रही है। प्रश्नावली में यह पूछा जाएगा कि खाना पकाने के लिए एलपीजी, पीएनजी या किसी अन्य ईंधन का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही परिवार द्वारा मुख्य रूप से उपयोग किए जाने वाले अनाज की जानकारी भी ली जाएगी। इन सवालों से पोषण और ईंधन उपयोग से जुड़े आंकड़े सामने आएंगे, जो भविष्य की नीतियों के लिए अहम माने जा रहे हैं।
सुविधाओं और संसाधनों का डिजिटल रिकॉर्ड
मकान गणना में घरों में उपलब्ध सुविधाओं का भी ब्योरा दर्ज होगा। इसमें पेयजल का स्रोत, शौचालय की सुविधा, स्नानघर, गंदे पानी की निकासी और बिजली व प्रकाश के मुख्य स्रोत से जुड़े सवाल शामिल हैं। इसके अलावा रेडियो, टीवी, इंटरनेट, मोबाइल फोन, लैपटॉप और कंप्यूटर जैसे संसाधनों की जानकारी भी जुटाई जाएगी। वाहन के रूप में साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड, कार, जीप और वैन की संख्या भी दर्ज की जाएगी, जिससे जीवन स्तर का अंदाजा लगाया जा सके।
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दो चरणों में होगी जनगणना
जनगणना 2026 और 2027 में दो चरणों में कराई जाएगी। पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा, जिसमें मकानों की गणना होगी। दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से आरंभ होगा, जिसमें जनसंख्या, जाति और अन्य जरूरी जानकारियां जुटाई जाएंगी। इसके लिए 16 जून 2024 को अधिसूचना जारी की जा चुकी है। यह आजादी के बाद भारत की आठवीं और कुल सोलहवीं जनगणना होगी।
डिजिटल जनगणना के लिए बड़ी तैनाती
मध्यप्रदेश में जनगणना के पहले चरण के लिए फरवरी 2026 तक करीब डेढ़ लाख कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। लगभग 20 दिनों में डिजिटल माध्यम से मकान गणना का काम पूरा किया जाएगा। इसके बाद आंकड़ों का सत्यापन कर उन्हें जनगणना आयुक्त को भेजा जाएगा। इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी, जिससे आंकड़ों की सटीकता और तेजी पर जोर रहेगा।
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निदेशक का पद अब भी खाली
इतनी बड़ी प्रक्रिया के बावजूद मध्यप्रदेश में जनगणना निदेशक का नियमित पद अब तक नहीं भरा जा सका है। सितंबर में एमपी कैडर की आईएएस अधिकारी भावना वालिम्बे के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह जिम्मेदारी प्रभारी अधिकारी के भरोसे है। फिलहाल यह पद छत्तीसगढ़ के जनगणना निदेशक के अतिरिक्त प्रभार में है। बताया जाता है कि पहले आईएएस अधिकारी सूफिया फारुकी वली का नाम इस पद के लिए तय हुआ था, लेकिन वे बाद में एफसीआई में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चली गईं। इसके बाद से राज्य सरकार किसी अधिकारी के नाम पर सहमति नहीं बना पाई है, जबकि जनगणना की तैयारियों का समय नजदीक आता जा रहा है।
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