Cashless Treatment Scheme: सड़क हादसों के पीड़ितों को समय पर उपचार दिलाने के लिए शासन ने एक नई पहल की है। अब सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति को नकद राशि की चिंता किए बिना उपचार उपलब्ध होगा। शासन ने इसके लिए कैशलेस उपचार योजना लागू की है।
इस योजना का उद्देश्य है कि दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को शुरुआती समय में सही इलाज मिल सके और उसकी जान बचाई जा सके। यह योजना लागू कर दी गई है। योजना के तहत इलाज के लिए जिले के 11 अस्पतालों की आईडी बना दी गई है। इन अस्पतालों में घायलों का डेढ़ लाख तक का नि:शुल्क इलाज किया जाएगा।
कैशलेस उपचार योजना का लाभ
इस योजना के अंतर्गत सड़क हादसे में घायल हुए व्यक्ति को दुर्घटना की तारीख से सात दिन तक मुफ्त इलाज मिलेगा। उपचार की सीमा डेढ़ लाख रुपये तक तय की गई है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि परिवार के सदस्यों को तुरंत पैसे जुटाने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी और मरीज को गोल्डन ऑवर में उपचार मिल जाएगा।

एचएफआर आईडी होना जरुरी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज हुरमाड़े ने बताया कि जिले के सभी पंजीकृत निजी अस्पतालों को योजना का हिस्सा बनना होगा। इसके तहत अस्पतालों को स्टेबलाइजेशन पैकेज के अंतर्गत सेवाएं देना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अस्पतालों के पास एचएफआर आईडी होना जरूरी है।
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कैसे मिलेगी योजना में इलाज सुविधा
दुर्घटना होने पर पीड़ित को अस्पताल में भर्ती करने के बाद उसकी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। यह एंट्री एचएफआर आईडी के माध्यम से पोर्टल पर की जाएगी। जैसे ही जानकारी अपलोड होगी, पुलिस को स्वत: इसकी सूचना मिल जाएगी। इसके साथ ही टीएमएस और ई-डार प्रणाली से जुड़े होने के कारण मरीज को तुरंत कैशलेस उपचार की सुविधा मिल सकेगी।

अस्पतालों को दिया गया प्रशिक्षण
योजना को बेहतर तरीके से लागू करने और अस्पतालों को तकनीकी प्रक्रिया समझाने के लिए सीएमएचओ कार्यालय में प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण एनआईसी के डीआरएम अभिषेक वागद्रे ने दिया। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज का विवरण पोर्टल पर दर्ज करना होगा और यह जानकारी कैसे आगे की प्रक्रिया में मददगार होगी।
दी गई तकनीकी-प्रशासनिक जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम डीआईओ श्रीमती रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। उन्होंने अस्पतालों के प्रतिनिधियों को योजना के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी दी और यह भी बताया कि योजना को सफल बनाने के लिए सभी अस्पतालों का सहयोग आवश्यक है।
जिले के यह अस्पताल हुए शामिल
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के प्रमुख निजी और शासकीय अस्पताल शामिल हुए। इनमें नोबल हॉस्पिटल, पाढर हॉस्पिटल, समर्पण हॉस्पिटल, बैतूल फ्रैक्चर हॉस्पिटल, सिटी हॉस्पिटल, महाजन हॉस्पिटल, क्रिश मेमोरियल हॉस्पिटल, श्री गोवर्धन दास राठी हॉस्पिटल, श्रीजी गडेकर हॉस्पिटल, गुरुकृपा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल और सतायु मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल सम्मिलित रहे। इसके अलावा शासकीय सीएचसी सेंटर जैसे घोड़ाडोंगरी, चिचोली, शाहपुर, बैतूल बाजार, प्रभात पट्टन, भीमपुर और जिला अस्पताल बैतूल भी मौजूद रहे।
योजना से लोगों को बंधी उम्मीद
जिले में इस योजना की शुरुआत को लेकर लोगों में सकारात्मक उम्मीदें हैं। सड़क हादसों के बाद कई बार इलाज में देरी होने से जान जोखिम में पड़ जाती है। नई व्यवस्था से यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। इसके साथ ही गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को भी बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें पहले तत्काल पैसों की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता था।
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