Betul Water Supply: बैतूल में रोजाना पानी सप्लाई की तैयारी, ताप्ती से दूसरी पाइपलाइन बिछाने की योजना
Preparations underway to lay a second pipeline from Tapti under the Betul Water Supply Pipeline Scheme, a major step towards ensuring daily water supply and relieving water crisis.

Betul Water Supply: बैतूल शहर में पानी की समस्या से राहत दिलाने के लिए नगर पालिका ने नई पहल शुरू कर दी है। नवागत सीएमओ नवनीत पांडेय ने जलप्रदाय व्यवस्था को सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है, जिसमें ताप्ती नदी से शहर तक एक और पाइपलाइन बिछाने की योजना सबसे अहम मानी जा रही है।
बैतूल शहर की जलप्रदाय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नगर पालिका ने अब ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में पदभार संभालने वाले सीएमओ नवनीत पांडेय ने रविवार को नगर पालिका के इंजीनियरों के साथ खेड़ी स्थित ताप्ती बैराज का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मौजूदा व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा की और आने वाले समय के लिए योजनाओं पर चर्चा की।
एक और पाइपलाइन बिछाना सबसे कारगर
निरीक्षण के दौरान उन्होंने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि गर्मी के मौसम में पानी की कमी से कैसे बचा जा सकता है। साथ ही उन्होंने शहर में रोजाना पानी सप्लाई शुरू करने के विकल्पों पर भी अधिकारियों से जानकारी ली। चर्चा में यह बात सामने आई कि ताप्ती नदी से बैतूल तक एक और पाइपलाइन बिछाना सबसे कारगर उपाय हो सकता है।
फिल्टर प्लांट की क्षमता और मौजूदा स्थिति
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार नगर पालिका के फिल्टर प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 23 लाख लीटर पानी को शुद्ध करने की है। इसके बावजूद वर्तमान में ताप्ती से केवल करीब साढ़े 7 एमएलडी पानी ही शहर तक पहुंच पा रहा है। पानी की कम आवक के कारण फिल्टर प्लांट अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा है।
यदि ताप्ती से बैतूल तक एक और पाइपलाइन बिछा दी जाती है, तो पानी की आपूर्ति बढ़कर लगभग 15 एमएलडी तक पहुंच सकती है। इस स्थिति में फिल्टर प्लांट का पूरा उपयोग करते हुए शहर को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसी मॉडल को नर्मदापुरम में अपनाकर बेहतर परिणाम मिले हैं, जिसे अब बैतूल में भी लागू करने की तैयारी है।
नई पाइपलाइन के लिए कार्ययोजना
सीएमओ नवनीत पांडेय ने सहायक यंत्री नीरज धुर्वे को निर्देश दिए हैं कि दूसरी पाइपलाइन बिछाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाए। इसके लिए उन्होंने 10 दिन का समय निर्धारित किया है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है, लेकिन योजना के लागू होने के बाद शहर की लगभग डेढ़ लाख आबादी को लंबे समय तक पानी की समस्या से राहत मिल सकेगी। दो पाइपलाइन होने से भविष्य में पानी की आपूर्ति बाधित होने की संभावना भी कम हो जाएगी।
गर्मी के लिए बैकअप व्यवस्था की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने यह भी देखा कि गर्मी के मौसम में अचानक जल संकट की स्थिति बनने पर नगर पालिका के पास क्या विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि यदि ताप्ती बैराज या माचना एनीकट की मोटर खराब हो जाए या पाइपलाइन में खराबी आ जाए, तो उससे निपटने के लिए क्या तैयारी है।
इस दौरान यह सामने आया कि कई आवश्यक सामग्री नगर पालिका के पास उपलब्ध ही नहीं है। कुछ जरूरी उपकरणों के लिए अब तक टेंडर भी जारी नहीं किए गए थे। इस पर सीएमओ ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित टेंडर पर हस्ताक्षर किए और प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
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जलप्रदाय व्यवस्था की वर्तमान स्थिति
अभी शहर में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जा रही है। पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण फिल्टर प्लांट की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। हाल ही में बनी एक नई पानी की टंकी भी अभी तक पूरी तरह भरी नहीं जा सकी है। इसके अलावा चार और नई टंकियों का निर्माण कार्य जारी है।
इन सबके बावजूद मुख्य समस्या यह है कि फिल्टर प्लांट तक पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंच ही नहीं रहा है। यदि दूसरी पाइपलाइन का काम पूरा हो जाता है, तो पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही इन सभी टंकियों का उपयोग भी बेहतर तरीके से हो सकेगा।
जलप्रदाय और बिजली शाखा में बदलाव
व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सीएमओ ने प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किए हैं। जलप्रदाय और बिजली शाखा की जिम्मेदारी अब सहायक यंत्री नीरज धुर्वे को सौंपी गई है। इससे इन दोनों महत्वपूर्ण विभागों में समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।
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कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सख्ती
सीएमओ नवनीत पांडेय ने नगर पालिका कर्मचारियों की कार्यशैली में सुधार लाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। अब सभी कर्मचारियों को अपनी दैनिक गतिविधियों का रिकॉर्ड डायरी में दर्ज करना अनिवार्य होगा। सीएमओ किसी भी समय किसी भी कर्मचारी की डायरी की जांच कर सकते हैं।
नई व्यवस्था के तहत केवल कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराना पर्याप्त नहीं होगा। कर्मचारियों का वेतन उनके वास्तविक काम के आधार पर तय किया जाएगा। यानी महीने भर में किए गए कार्यों की समीक्षा के बाद ही भुगतान होगा। इस आदेश के बाद उन कर्मचारियों में हलचल बढ़ गई है जो अब तक मनमाने ढंग से काम कर रहे थे। अब उन्हें नियमों के अनुसार काम करना होगा और अपने काम का रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना पड़ेगा।
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