Betul Petrol Pump Bribery Case: हद है… 50 हजार की रिश्वत, वीडियो में सबूत, कलेक्टर से शिकायत, फिर भी नहीं कोई कार्रवाई
विक्की आर्य, झल्लार (Betul Petrol Pump Bribery Case)। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में खाद्य विभाग के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी द्वारा एक पेट्रोल पंप संचालक से सील किए गए पेट्रोल पंप को शुरू करवाने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत ली गई थी। कैमरे में कैद हो चुके इस गंभीर मामले का हश्र भी उसी तरह होता नजर आ रहा है जैसे आए दिन सामने आने वाले रिश्वत के अन्य मामलों का जिले में होता आया है।
बेखौफ होकर रिश्वत लेने, वीडियो जैसा प्रमाण होने और कलेक्टर से लिखित शिकायत के बावजूद करीब एक पखवाड़े बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। यही वजह है कि अब लोग खुलकर यह कहते नजर आ रहे हैं कि लगता नहीं कि इस मामले में भी दोषी अधिकारी पर कोई कार्रवाई होगी।
पंप संचालक ने की थी शिकायत (Betul Petrol Pump Bribery Case)
गौरतलब है कि भैंसदेही तहसील के झल्लार-आमला रोड़ में पेट्रोल पंप की सील खोलने के नाम पर रिश्वत लेने का मामला सामने आया था। इस मामले में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी धरमदास पनिका के खिलाफ शिकायत खुद पीड़ित पेट्रोल पंप संचालक नयन आर्य ने बैतूल जिला कलेक्टर को सौंपी थी। इस मामले में आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

अफसर की ओर से आ रहे दबाव (Betul Petrol Pump Bribery Case)
शिकायतकर्ता नयन आर्य ने इस पूरे मामले को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि एक ओर दोषी अफसर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है वहीं दूसरी ओर शिकायत वापस लेने के लिए बड़े-बड़े वेयरहाउस संचालकों और राजनीतिक रसूखदारों के फोन आने लगे हैं।
धमकियां तक दी जा रही हैं (Betul Petrol Pump Bribery Case)
इसके अलावा इस मामले को दबाने के लिए लाखों रुपये का लालच भी दिया जा रहा है। लेकिन, कहानी यही तक सीमित नहीं है। स्थिति तब और भी खतरनाक हो जाती है जब धमकियां तक मिलने लगे। उन्होंने बताया कि उनके परिवार को धमकाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि अगर शिकायत वापस नहीं ली तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।

मुख्यमंत्री की मंशा को लग रहा पलीता (Betul Petrol Pump Bribery Case)
एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री जीरो टॉलरेंस और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था के दावें करते हैं वहीं दूसरी ओर जिले में उनकी मंशा पर ही पलीता लगाया जा रहा है। रिश्वतखोरी का सबूत वीडियो में है, लिखित शिकायत की गई है, लेकिन इसके बावजूद इतने दिनों बाद भी कार्रवाई न होना, यही दर्शाता है कि प्रशासन को मुख्यमंत्री की मंशा से कोई लेना-देना ही नहीं है।
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पहले भी दब चुके कई मामले (Betul Petrol Pump Bribery Case)
ऐसा नहीं कि रिश्वतखोरी जैसा गंभीर मामला सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का यह कोई पहला मामला है। इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं और कई मामलों में तो सबूत भी थे। इसके बावजूद दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि रिश्वतखोर कर्मचारियों और अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं। रिश्वतखोरी के मामलों को जिले में जिस तरह हल्के में लिया जाता है, उसे देखकर तो यही लगता है कि इसे जुर्म माना ही नहीं जाता।
खामोश रहते हैं जनप्रतिनिधि (Betul Petrol Pump Bribery Case)
ऐसे मामलों में एक आश्चर्यजनक बात यह भी देखने को मिलती है कि इस तरह के गंभीर मामलों में भी जिले के जनप्रतिनिधि न कोई आवाज उठाते हैं और न ही विरोध जताते दिखते हैं। ऐसे में लोग भी यह कयास लगाने को मजबूर हो जाते हैं कि आखिर इनकी चुप्पी का राज क्या है। दूसरी ओर इन बाहरी अधिकारी-कर्मचारियों के कारण जिले का नाम खराब होता है। (Betul Petrol Pump Bribery Case)
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