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Betul Jail Land Case: जब नोटिस जारी नहीं हुए तो जवाब काहे का..? जेल की जमीन मामले में प्रशासन बेनकाब

Betul Jail Land Case: मध्यप्रदेश के बैतूल में शायद ऐसा पहली बार हो रहा है। महज 12 दिन पहले प्रशासन जिस मामले में ताल ठोक कर कह रहा था कि न्यायालय से कोई नोटिस जारी नहीं हुए, उसी मामले में 12 वें दिन खुद जवाब दाखिल किए। इससे एक ओर जहां प्रशासन पूरी तरह बेनकाब हो गया है वहीं एक निजी कंपनी से जुड़े मामले में प्रशासन की इतनी मशक्कत सवालिया निशान भी लगा रही है।

यह पूरा मामला जिला जेल की जमीन से जुड़ा है जिसे कि एमराल्ड हाइट्स नामक कंपनी को दिया गया है। इस मामले में शिकायतें होने पर पहले तो प्रशासन ने एक जांच कमेटी बनाई और इस कमेटी ने चंद दिनों में ही अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी जिसमें क्लीन चिट दे दी गई थी। इसके बाद बाकायदा इसका प्रचार-प्रसार भी प्रशासन द्वारा किया गया।

प्रशासन ने दिखाई थी अभूतपूर्व सक्रियता

इसके बाद एक प्रेस नोट जारी होता है जिसमें यह जानकारी होती है कि स्थाई लोक अदालत से शासन-प्रशासन और नगर पालिका को नोटिस जारी किए गए हैं। इस मामले में भी प्रशासन द्वारा अभूतपूर्व सक्रियता दिखाते हुए जनसंपर्क विभाग से एक खंडन जारी करवाया जाता है कि स्थाई लोक अदालत से किसी भी प्रकार के नोटिस जारी नहीं हुए हैं। इतना ही नहीं इसमें यह भी कहा गया था कि तथ्यविहीन और भ्रामक खबर प्रकाशित करने वालों की जांच भी की जाएगी।

शिकायतकर्ताओं ने सामने लाई हकीकत

उस समय यह लगने भी लगा था कि प्रशासन जब इतनी दमदारी से कह रहा है तो हो सकता है कि ऐसा कोई नोटिस जारी न हुआ हो, लेकिन कुछ ही दिनों में प्रशासन का झूठ सामने आ गया। जितनी दमदारी से प्रशासन ने खंडन जारी करवाया था, उससे भी ज्यादा दमदारी से शिकायतकर्ताओं ने इस झूठ को बेनकाब करते हुए न केवल यह बताया कि नोटिस जारी हुए थे, बल्कि प्रशासन ने जवाब भी प्रस्तुत किया है। इसके प्रमाण भी उन्होंने प्रस्तुत किए हैं।

शिकायतकर्ताओं की ओर से जारी प्रेस नोट

इस संबंध में शिकायतकर्ताओं की ओर से जारी प्रेस नोट में बताया गया है कि लोक उपयोगी सेवाओं की स्थाई लोक अदालत में जेल की जमीन को लेकर लगाए गए परिवाद में अंतत: प्रशासन की ओर से नजूल अधिकारी मकसूद अहमद और नपा की ओर से अधिवक्ता जयदीप रूनवाल ने जवाब प्रस्तुत किया है।

शनिवार को न्यायालय में नजूल अधिकारी मकसूद अहमद स्वंय उपस्थित हुए और परिवाद में पक्षकार बनाए गए मुख्य सचिव मप्र शासन, प्रमुख सचिव राजस्व और कलेक्टर बैतूल की ओर से जवाब प्रस्तुत किया है। शनिवार को जो जवाब प्रस्तुत किया गया है, उससे 12 जनवरी को कलेक्टर के हवाले से जो प्रकरण को लेकर दावे किए गए थे, उनकी पोल खुल गई है।

27 जुलाई 2024 को जारी हुए थे नोटिस

गौरतलब रहे कि इस मामले में सिविल सोसायटी की ओर से सुनील पलेरिया ने परिवाद लगाया था। इस परिवाद में 27 जुलाई 2024 को न्यायालय ने नोटिस जारी किए थे। इसमें 28 अगस्त 2024 को मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, कलेक्टर और सीएमओ को उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। उक्त चारों द्वारा लगातार इस नोटिस की अनदेखी की गई और जवाब प्रस्तुत ही नहीं किया गया जो अब 24 जनवरी 2026 को जवाब प्रस्तुत किया गया।

पूर्व में किए गए दावें साबित हुए झूठे

सुनील पलेरिया का कहना है कि इस प्रकरण को लेकर जनसंपर्क के माध्यम से 12 जनवरी को जो भी दावे किए गए थे वे पूरी तरह से झूठे साबित हुए हैं और प्रशासन को जवाब प्रस्तुत करना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस जवाब में नजूल अधिकारी बैतूल ने पक्षकार-1 मुख्य सचिव, पक्षकार-2 प्रमुख सचिव राजस्व को प्रकरण में पक्षकार बनाए जाने को गैर जरूरी बताया है।

जनसंपर्क विभाग ने जारी किया था यह खंडन

इस संबंध में जनसंपर्क विभाग ने जो खंडन जारी किया था, उसमें लिखा गया था कि जिले के कतिपय समाचार पत्रों द्वारा 12 जनवरी सोमवार को एमराल्ड हेरीटेज भूमि आवंटन में मुख्य सचिव मप्र शासन, प्रमुख सचिव मप्र शासन राजस्व विभाग एवं कलेक्टर को माननीय लोकोपयोगी सेवाओं की स्थाई लोक अदालत में 24 जनवरी, 2026 को पेशी पर उपस्थित होने सम्बंधी नोटिस जारी करने के आशय का समाचार प्रकाशित हुआ है।

उक्त समाचार की सत्यता का परीक्षण किया गया है। माननीय लोकोपयोगी सेवाओं को स्थाई लोक अदालत द्वारा उक्त अधिकारियों को दिनांक 24 जनवरी को उपस्थित होने संबंधी कोई नोटिस जारी नहीं हुए हैं। समाचार में उल्लेखित भ्रामक तथ्य प्रकाशन की विस्तृत जांच पृथक से की जा रही हैं। उक्त जानकारी से संबंधित समाचार 12 जनवरी को जिला संपर्क कार्यालय से जारी किया गया था।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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