Bel Fal ki Pooja: वैशाख मास में बेल फल से बने लोटे से शिवलिंग पर जल अर्पित कर रही महिलाएं, जानें इसका महत्व…
Bel Fal ki Pooja: In the month of Vaishakh, women continuously offering water to Shivling with a pot made of Bel fruit, know its importance
▪️ मनोहर अग्रवाल, खेड़ी सांवलीगढ़
Bel Fal ki Pooja: वैशाख मास की प्रतिपदा से महिला श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन हो गई है। हालांकि इस बार उनकी भक्ति और पूजा-अर्चना का तरीका थोड़ा बदला हुआ है। इस वे एक महीने तक यानी 5 मई तक शिवालयों में भगवान भोलेनाथ को उन्हें सर्वाधिक प्रिय बेल के फल का गोलाकार लोटा बनाकर मंदिर में पहुँचकर पूजा अर्चना कर उन्हें बेल के पात्र से जलधारा अर्पित कर रही है। यह देखकर बहुत से लोग चौक जाते हैं।
वैशाख मास में ही ऐसा क्यों किया जाता है और इस परंपरा का क्या महत्व है? इससे जुड़ी कई कथाऐं और मान्यताएं हमारे समाज में प्रचलित है। आज हम इन्हीं को लेकर चर्चा करेंगे। पंडित सुनील कुमार व्यास बताते हैं कि धर्म ग्रंथों के अनुसार देवताओं के द्वारा जब मंदराचल पर्वत की रई बनाकर समुद्र का मंथन किया गया था तब सबसे पहले कालकूट नामक सबसे भयंकर विष निकला। जिससे संसार में त्राहि-त्राहि मच गई। तब भोलेनाथ ने उस भयानक विष को अपने कंठ में धारण किया।
उसी समय से उस विष के प्रभाव को कम करने वैशाख मास में शिव जी को बेल का पात्र बनाकर जल चढ़ाने की परंपरा है। कहा जाता है कि बेल सर्वाधिक ठंडा होता है। भोलेनाथ को विषपान करने से शरीर में जो गर्मी हुई थी, बेल से उन्हें शीतलता मिलती है। उसी प्रकार शिवलिंग पर मटका भी बांधा जाता है। उससे भी बूँद-बूँद पानी शिवलिंग पर टपकते रहता है। ऐसा करने से भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा उन लोगों पर बरसती है जो बेल के बने पात्र से शिवजी का प्रतिदिन अभिषेक करते हैं।

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