Amla Illegal Mining Action: आमला में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई: पोकलेन-डम्पर जब्त, 2.12 करोड़ का जुर्माना प्रस्तावित
Amla Illegal Mining Action: Major action against illegal mining in Amla: Poklen-dumper seized, fine of 2.12 crore proposed

Amla Illegal Mining Action: बैतूल जिले के आमला क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने अचानक निरीक्षण कर बड़ी कार्रवाई की, जिससे इलाके में हलचल मच गई। दूसरी ओर जिले में बाल श्रम के खिलाफ सख्ती और बढ़ा दी गई है। अब खतरनाक उद्योगों में बच्चों से काम कराना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय की गई है।
संयुक्त टीम का औचक निरीक्षण
कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आमला शैलेंद्र बड़ोनिया के नेतृत्व में गुरुवार को खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की टीम ने तहसील आमला के ग्राम अम्बाडा में स्थित स्टोन क्रेशर और आसपास के क्षेत्रों का आकस्मिक निरीक्षण किया।
अवैध उत्खनन करते पकड़े गए वाहन
निरीक्षण के दौरान टीम को ग्राम अम्बाडा में निजी भूमि के एक हिस्से पर पोकलेन मशीन के माध्यम से पत्थर और बोल्डर का अवैध उत्खनन होता मिला। इस खनिज को डम्पर क्रमांक एमपी 48 एच 0520 से बिना अनुमति परिवहन किया जा रहा था। मौके पर ही टीम ने पोकलेन मशीन और डम्पर को जब्त कर लिया।
संचालक के निर्देश पर हो रहा था काम
मौके पर मौजूद मशीन और डम्पर चालक ने पूछताछ में बताया कि उत्खनन और परिवहन का कार्य स्टोन क्रेशर संचालक उपेन्द्र उर्फ भूरु सूर्यवंशी के कहने पर किया जा रहा था। इसके बाद अधिकारियों ने उत्खनन क्षेत्र का मापन किया, जिसमें लगभग 14154 घन मीटर खनिज निकाले जाने का अनुमान लगाया गया।

जप्त मशीन रखी गई पुलिस अभिरक्षा में
जब्त की गई मशीन और डम्पर को पुलिस चौकी बोडखी, थाना आमला की अभिरक्षा में खड़ा कराया गया है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
पट्टा जांच में भी मिली अनियमितताएं
इसी दौरान ग्राम अम्बाडा स्थित मास्टर स्टोन क्रेशर के संचालक देवधर इंगले के नाम पर स्वीकृत खदान पट्टे की भी जांच की गई। जांच के दौरान पाया गया कि खदान में की गई ब्लास्टिंग से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए थे। साथ ही पर्यावरण और खनिज नियमों का पालन भी नहीं किया जा रहा था।
दो करोड़ से अधिक का जुर्माना प्रस्तावित
प्रशासन ने अवैध उत्खनन में शामिल उपेन्द्र उर्फ भूरु सूर्यवंशी के खिलाफ मध्यप्रदेश खनिज नियम 2022 के तहत कार्रवाई करते हुए 2 करोड़ 12 लाख 31 हजार रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया है। यह प्रकरण अपर कलेक्टर बैतूल की अदालत में प्रस्तुत किया जा रहा है।
दूसरे संचालक पर भी कार्रवाई की तैयारी
मास्टर स्टोन क्रेशर के संचालक देवधर इंगले द्वारा की गई गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए मप्र गौण खनिज नियम 1996 के तहत अलग से कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर सख्त रोक
जिला श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को किसी भी खतरनाक उद्योग या प्रक्रिया में काम पर रखना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस नियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।
उल्लंघन पर मिलेगी शून्य रेटिंग
उन्होंने बताया कि श्रम स्टार रेटिंग प्रणाली के तहत यदि किसी संस्थान में बाल श्रम या बंधुआ श्रम पाया जाता है, तो जीरो टॉलरेंस नीति के अनुसार उस संस्थान को शून्य अंक दिए जाएंगे। वहीं, जिन संस्थानों में ऐसे श्रमिक नहीं पाए जाते, उन्हें अन्य कमियों के बावजूद प्रोत्साहित किया जाएगा।
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“वेदा पहल” के तहत लगातार निगरानी
बाल श्रम खत्म करने के लिए श्रम विभाग द्वारा “वेदा पहल” चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत हर शुक्रवार को समीक्षा बैठक आयोजित की जाती है, जिसमें संबंधित मामलों की स्थिति पर चर्चा होती है। साथ ही दर्ज मामलों की नियमित निगरानी भी की जा रही है।
हेल्पलाइन पर मिल रही शिकायतों पर नजर
चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर आने वाली शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। यह टोल-फ्री सेवा चौबीसों घंटे उपलब्ध है और प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
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कानूनी प्रावधान और सजा का प्रावधान
जिला श्रम अधिकारी के अनुसार, बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत दोषी पाए जाने पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा हो सकती है। वहीं, बंधुआ श्रम पद्धति (उन्मूलन) अधिनियम 1976 के तहत अधिकतम 3 वर्ष तक की कैद या 2 हजार रुपये तक का जुर्माना निर्धारित है।
पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता
बंधुआ श्रमिकों के पुनर्वास के लिए केंद्र की योजना 2021 लागू है। इसके तहत वयस्क पुरुषों को 1 लाख रुपये, महिला श्रमिकों और अनाथ बच्चों को 2 लाख रुपये तथा शोषण या मानव तस्करी के पीड़ितों को 3 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। इसके अलावा हर जिले में पुनर्वास के लिए अलग से कार्पस फंड भी बनाया गया है।
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