Adani Cement Merger: देश के बड़े औद्योगिक समूहों में शामिल अडानी ग्रुप ने अपने सीमेंट कारोबार को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। पोर्ट, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर सीमेंट तक फैले इस समूह ने अपनी सीमेंट कंपनियों के ढांचे को सरल करने की योजना बनाई है। इसके तहत समूह की तीन प्रमुख सीमेंट कंपनियों को एकीकृत किया जाएगा, जिससे कारोबार में तालमेल बढ़ेगा और भविष्य की विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
अडानी ग्रुप की सीमेंट कंपनियों के विलय की योजना
अडानी ग्रुप से जुड़ी अंबुजा सीमेंट, एसीसी और ओरिएंट सीमेंट को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। समूह ने इन तीनों कंपनियों को एक ही इकाई में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना के अनुसार एसीसी और ओरिएंट सीमेंट का विलय अंबुजा सीमेंट में किया जाएगा। इस संबंध में तीनों कंपनियों के बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है और इसकी जानकारी शेयर बाजारों को भी दे दी गई है। हालांकि, यह प्रक्रिया अभी पूरी तरह से लागू नहीं हुई है, क्योंकि शेयरधारकों और नियामक संस्थाओं की अनुमति मिलना बाकी है।
पहले से ही जुड़े हैं एसीसी और ओरिएंट सीमेंट
वर्तमान स्थिति की बात करें तो एसीसी और ओरिएंट सीमेंट पहले से ही अंबुजा सीमेंट से जुड़ी हुई कंपनियां हैं। एसीसी में अंबुजा सीमेंट की हिस्सेदारी 50.05 प्रतिशत है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों कंपनियों के बीच पहले से कारोबारी तालमेल मौजूद है। इसी आधार पर अब इनका पूर्ण विलय करने की योजना बनाई गई है, ताकि संचालन और प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
शेयरधारकों के लिए तय किया गया एक्सचेंज रेश्यो
विलय के दौरान शेयरधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक्सचेंज रेश्यो भी तय किया गया है। एसीसी के शेयर रखने वाले निवेशकों को हर 100 शेयर, जिनकी फेस वैल्यू 10 रुपये है, के बदले अंबुजा सीमेंट के 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 328 शेयर मिलेंगे। वहीं, ओरिएंट सीमेंट के शेयरधारकों को 1 रुपये फेस वैल्यू के हर 100 शेयर के बदले अंबुजा सीमेंट के 33 शेयर दिए जाएंगे। इस व्यवस्था के जरिए सभी निवेशकों को नई कंपनी में हिस्सेदारी दी जाएगी।
विलय से कारोबार को होंगे यह फायदे
अंबुजा सीमेंट का कहना है कि इस विलय के पूरा होने के बाद कंपनी के कारोबार में सुगमता आएगी और वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी। तीनों कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और सप्लाई चेन एक साथ आने से लागत में कमी और संचालन में तेजी आने की उम्मीद है। इसके अलावा, समूह का समग्र ढांचा भी सरल हो जाएगा, जिससे निर्णय लेने और योजनाओं को लागू करने में आसानी होगी।
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कब से प्रभावी माने जाएंगे ये विलय
विलय से जुड़ी योजनाओं में किसी भी तरह के नकद लेन-देन का प्रावधान नहीं रखा गया है। एसीसी सीमेंट का अंबुजा सीमेंट में विलय 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा। वहीं, ओरिएंट सीमेंट का विलय इससे पहले 1 मई 2025 से लागू माना जाएगा। इन तारीखों के आधार पर आने वाले वर्षों में कंपनी के वित्तीय नतीजों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
संयुक्त उत्पादन क्षमता में होगी बढ़ोतरी
तीनों कंपनियों के एक साथ आने के बाद अडानी ग्रुप की सीमेंट उत्पादन क्षमता काफी मजबूत हो जाएगी। संयुक्त रूप से इनकी सालाना उत्पादन क्षमता करीब 10.70 लाख टन बताई जा रही है। इससे घरेलू बाजार में समूह की स्थिति और मजबूत होगी और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में इसकी भागीदारी बढ़ सकती है।
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ऐसा रहा कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2024-25 में अंबुजा सीमेंट का समेकित राजस्व 35,045 करोड़ रुपये रहा था और 31 मार्च 2025 तक इसकी नेटवर्थ 63,811 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी। एसीसी ने इसी अवधि में 21,762 करोड़ रुपये का समेकित राजस्व हासिल किया और इसकी नेटवर्थ 18,559 करोड़ रुपये रही। वहीं, ओरिएंट सीमेंट का राजस्व 2,709 करोड़ रुपये और नेटवर्थ 1,808 करोड़ रुपये दर्ज की गई। इन आंकड़ों से साफ है कि विलय के बाद बनने वाली इकाई आर्थिक रूप से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में होगी।
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