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Betul News: यहां स्थित हैं भगवान श्रीराम के हाथों स्थापित ताप्तेश्वर महादेव रामायण कालीन स्वयंभू शिवलिंग

Betul News: Tapteshwar Mahadev Ramayana period Swayambhu Shivling established by Lord Shriram is located here

Betul News: यहां स्थित हैं भगवान श्रीराम के हाथों स्थापित ताप्तेश्वर महादेव रामायण कालीन स्वयंभू शिवलिंग▪️ मनोहर अग्रवाल, खेड़ी सांवलीगढ़

Betul News: भूतभावन भगवान भोलेनाथ की साधना और आराधना के लिए महत्वपूर्ण सावन मास में भोले के भक्त दूर-दूर की यात्राएं कर शिवजी की पूजा अर्चना कर फल प्राप्त करते हैं। वहीं बैतूल जिले में भी प्राचीन महत्व के अनेक स्थान मौजूद हैं, जहाँ चंद्रमौलि भगवान शिव के चमत्कारों और महत्व को लेकर भोलेनाथ में आस्था और विश्वास और बढ़ जाता है।पुण्य सलिला आदि गंगा सूर्यपुत्री माँ ताप्ती के तट पर अनेक स्थानों पर भगवान भोले नाथ विराजित हैं।लेकिन ताप्ती नदी के आँचल में बारालिंग नामक ऐसा स्थान भी है, जहाँ स्वयंभू जनेऊधारी शिवलिंग हैं।

इस स्थान पर सैकड़ों वर्ष पूर्व प्राचीन मंदिर था। कहा जाता है कि यह शिवलिंग और मंदिर रामायणकालीन है। इस स्थल से भगवान श्रीराम के रुके होने के प्रमाण भी मराठी ताप्ती पुराण में मिलते है। यह जनेऊधारी शिवलिंग उसी समय का है जब प्रभु श्रीराम, जानकी जी और लक्ष्मण समेत वनवास काल के दौरान यहाँ रुके थे।
सकलकड़े महाराज एक मीसाबंदी थे। उनके पास जो मराठी ताप्ती पुराण है, उसमें ताप्ती तट पर भगवान राम के पदार्पण की कथा स्पष्ट लिखी हुई है। उन्होंने मराठी ताप्ती पुराण की एक लाइन हमें दिखलाई कि बारालिंग येथे श्रीरामा ने बारह शिवलिंगाची स्थापना केलिली। अर्थात भगवान श्री राम ने ताप्ती तट पर बारह शिवलिंग स्थापना की।

Betul News: यहां स्थित हैं भगवान श्रीराम के हाथों स्थापित ताप्तेश्वर महादेव रामायण कालीन स्वयंभू शिवलिंगयह मंदिर अब बारालिंग पर नही है। वह चन्दोरा डैम की बाढ़ में बह गया, लेकिन मंदिर के अवशेष के साथ वह जनेऊधारी शिवलिंग एवं काले पत्थरों पर अंकित बारह शिवलिंग और इतिहास यह दावा करता है कि भगवान राम के चरण माँ ताप्ती की इस धरा पर पड़े थे। लोग सावन मास में भी इस स्थल पर पूजा अर्चना करते हैं।इसका धार्मिक महत्व समझकर वन विभाग में पदस्थ खेड़ी सांवलीगढ़ निवासी श्री लाड़ साहब जो कन्जर्वेटर थे, उन्होंने तीस वर्ष पूर्व चट्टानों में बारह शिवलिंग बनवाई जो मानव निर्मित शिवलिंग हैं। यहां से प्रभु श्री राम जब गये तो दस किलोमीटर दूर सरभंग ऋषि के आश्रम में रुके जो बोरीकास गांव के पास ही स्थित है।

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