IAS Success Story: बैंक में नौकरी के साथ, पहले ही प्रयास में तीसरी रैंक हासिल कर बन गई आईएएस अफसर
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IAS Success Story : यूपीएससी परीक्षा को पास कर आईएएस के पद पर नौकरी पाना आसान काम नहीं होता है। हर साल यूपीएससी एग्जाम को क्रैक करने के लिए लाखों की संख्या में उम्मीदवार आवेदन तो करते है, लेकिन कुछ ही लोग एग्जाम पास कर पाते है। बात अगर लड़कियों की हो तो वह किसी से कम नहीं होती, ये साबित करने के लिए भारत में कई ऐसी लड़कियां हैं, जो सबके लिए मिसाल बन गई हैं। हर साल यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों उम्मीदवारों में से सैकड़ों लड़कियों के सपने पूरे होते हैं। अफसर बनने वाली ये महिला उम्मीदवार पहले अपने परिश्रम से खुद को बेहतर साबित करती हैं, फिर अपनी कार्यशैली से लोगों को अवाक कर देतीं हैं। उन्हीं होनहार महिला अफसरों में स्तुति चरण शामिल हैं। उसी तरह स्तुति चरण की कहानी भी उन लोगो के लिए प्रेरणाप्रद है जो लोग यूपीएससी की परीक्षा पास करना चाहते है। तो आइए जानते है स्तुति चरण की सफलता की काहानी के बारे में।
बचपन से बनना चाहती थीं IAS (IAS Success Story)
स्तुति चरण राजस्थान के जोधपुर में खारी कल्ला नाम के गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता राम करण बरेठ राजस्थान राज्य भण्डारण निगम में उप निदेशक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता सुमन हिन्दी की लेक्चरर हैं। स्तुति की छोटी बहन नीति डेंटिस्ट हैं।

इस तरह पूरी हुई शिक्षा
स्तुति ने अपनी स्कूली शिक्षा भीलवाड़ा से की है। उन्होंने यहां के विवेकानंद केंद्र विद्यालय (हुर्दा) से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए जोधपुर के लाचू मेमोरियल कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में एडमिशन लिया। ग्रेजुएशन के बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गईं। यहां के IIPM, New Delhi से उन्होंने पर्सनल एंड मार्केटिंग मैनेजमेंट कोर्स में पोस्ट-ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया।
स्तुति चरण ने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने अपने ग्रेजुएशन लेवल की पढ़ाई के दौरान यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। उनका हमेशा से सिविल सेवा में जाने पर फोकस रहा, क्योंकि स्तुति के दादाजी 1974 बैच के आईएएस अधिकारी थे। उनके माता-पिता उनका सबसे बड़ा सहारा थे। तीन बार परीक्षा देने के बाद, स्तुति ने 2012 की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल की। जो लोग सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए मेरी एक ही सलाह है कि उम्मीद न खोएं। कोशिश करते रहो और तुम अपने सपनों को हासिल करोगे।

टॉपर्स की कहानियों से प्रेरणा
स्तुति ने बताया था कि वह बचपन से ही आईएएस बनने का सपना देखती थीं। स्तुति बताती हैं कि वह खुद को एक आईएएस के रूप में देखने की उम्मीद के साथ ही बड़ी हुई हैं। वह कहती हैं कि सफलता की हर एक कहानी एक प्रेरणा देती है। इसलिए उन्होंने खुद को प्रेरित करने के लिए टॉपर्स की कहानियां पढ़ीं। इससे उन्होंने काफी प्रेरणा मिलती है।



