Oranges Cultivation: कम जमीन होने के बाद भी इस फल की खेती करने से कमा सकते है लाखों रूपये
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Oranges Cultivation: किसान कम जमीन होने के बावजूूद अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। कम भूमि वाले किसान इन दिनों ऐेेेस खेती कर रहे है जो कम लागत में ज्यादा कमाई कराती है। आज हम आपको एक ऐसी खेती के बारे में बता रहें है जो अपकों सालों तक कमाईं करके देंगी और इसके लिए आपको बहुत ज्यादा लागत की जरूरत नहीं होगी।
दरअसल आज हम संतरे के फल की खेती की बात कर रहे है। जो हम खाते रहते या कहे तो इसका जूस बनाकर भी पीते रहते है। यह फल शरीर के लिए भी काफी उपयोगी साबित होता है। सतरें में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
आज हम आपको इसकी खेती से जुडी कुछ बाते बताएंगे। साथ ही इससे होने वाली कमाई की भी जानकारी देंगे। आप को बता दें कि ये एक ऐसा फल है जिसकी भारत में ही नहीं पूरे विश्व में भी मांग होती है। इससे साफ समझ में आता है कि यदि आप भी संतरे की खेती शुरू कर देते हो करना तो आप भी इससे बढ़िया कमाई कर सकते हो। यदि आप संतरे की खेती करते हो तो इसमें आपको कितनी लागत आएगी इसी के साथ में आपको यह पता होना चाहिए कि यदि आप संतरे की खेती करते हो तो उसके लिए आपको कितने पौधे की आवश्यकता पड़ेगी।

संतरा की खेती के लिए उपयोगी मिट्टी
किसी भी फल की बागवानी के लिए मिट्टी में उपजाऊपन होना बहुत ज़रूरी होता है। बगीचा लगाने से पहले मिट्टी परीक्षण कर लेने से हम भविष्य में आने वाली समस्याओं से बच सकते हैं। संतरे की बागवानी के लिए मिट्टी की उपरी तथा नीचे की सतह की संरचना और गुणवत्ता पर ध्यान देने की बहुत ज़्यादा आवश्यकता होती है।
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संतरा की खेती में लागत और कमाई
संतरे की खेती (santra ki kheti) में कमाई पौधे की देखरेख पर निर्भर करती है। जितनी अच्छी पौधों की देखरेख होगी, उतनी अधिक उपज प्राप्त होती है। आपको बता दें, पूर्ण विकसित पौधे से 100 से 150 किलोग्राम पैदावार मिल सकती है। एक एकड़ खेत में लगभग 100 पौधे लगाकर 10000 से 15000 किलो तक उपज प्राप्त किया जा सकता है।
संतरे का बाज़ार में थोक भाव करीब 10 से 30 रूपये प्रति किलो के आसपास होता है। यानी 1 लाख 50 हज़ार से लेकर 4 लाख तक की कमाई एक खेप में हो सकती है। इसे 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 85 से 90 प्रतिशत आपेक्षिक आद्रता पर 3 से 5 सप्ताह तक आराम से स्टोर किया जा सकता है।
सही तरीके से संतरे की खेती (Oranges Cultivation) करने से लाखों का मुनाफा हो सकता है। इसके लिए खाद से लेकर मौसम तक की उचित जानकारी होना आवश्यक है।

संतरे की सबसे उन्नत किस्में (Oranges Improved Varieties)
सिक्किम- यह क़िस्म खासी नाम से भी जानी जाती है। इन किस्मों को अधिकतर भारत के पूर्वी हिस्सों में उगाया जाता है। इसमें पौधे की शाखाए अधिक पत्तीदार और कांटेयुक्त होती है। इसमें नर्म सतह वाले फल निकलते है। जो रंग में हल्के पीले होते है। इसके एक पेड़ से 80 KG फल की पैदावार एक बार में मिल जाती है, जिसके फलो में अधिक मात्रा में बीज निकलते है।
कूर्ग- संतरे की इस क़िस्म में पौधा सीधा और गहरा होता है। इसका एक पेड़ 80 से 100 KG की पैदावार दे देता है। इस फल का छिलका आसानी से निकल जाता है, तथा एक फल के अंदर 10 कलिया मिल जाती है। इसमें बीज भी काफी अधिक होते है। यह क़िस्म फ़रवरी माह में पककर तैयार हो जाती है।
नागपुरी- यह संतरे की एक अधिक उपज देने वाली क़िस्म है, जो पूरे भारत में पसंद की जाती है। इसका पौधा रोपाई के 4 वर्ष बाद पैदावार देना आरम्भ कर देता है| इसके एक पूर्ण विकसित पौधे से 120 से 150 KG की पैदावार मिल जाती है, तथा एक फल से 10 से 12 कलिया मिल जाती है। जिसमे रस भी काफी अधिक होता है।
किन्नु- यह संतरे की एक संकर क़िस्म है, जिसे विलो लीफ और किंग का संकरण कर तैयार किया गया है। इस क़िस्म में निकलने वाले फल का छिलका सामान्य से अधिक मोटा होता है, तथा फल अधिक रसेदार होता है। जिस वजह से यह फल अधिक व्यापारिक महत्व रखता है। इसका एक पौधा 100 KG फलो का उत्पादन दे देता है। यह फल पकने पर पीले रंग का हो जाता है, जो जनवरी या फ़रवरी के महीने में पककर तैयार हो जाता है।
किन्नु नागपुर सीडलेस- संतरे की यह क़िस्म सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सिट्रस द्वारा तैयार की गयी है। यह क़िस्म नागपुरी संतरे के बराबर पैदावार दे देती है। इसके फलो में बीज नहीं होता है, तथा फल पकने पर पीला दिखाई देता है।
इसके अलावा भी कई उन्नत किस्में है, जिन्हे उनकी उपज के अनुसार कई जगहों पर उगाया जाता है। इसमें कारा, जाफा, डेजी, सुमिथरा, बुटवल, क्लेमेंटाइन, नगर, वाशिंगटन नेवल संतरा, डानक्य और दार्जिलिंग किस्में शामिल है।


