Machna River Betul: माचना जयंती : बैतूल की जीवन रेखा मां माचना के संरक्षण पर भी देना होगा विशेष ध्यान

▪️ लोकेश वर्मा, मलकापुर (बैतूल)
मां माचना नदी (Machna River Betul) … बैतूल की जीवन रेखा… जिले के पूर्व से उद्गम होने के बाद उत्तर की ओर बहती है। आज उनका जन्मोत्सव (Machna Janmotsav Betul) बैतूल से लेकर शाहपुर तक श्रद्धाभाव और धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह वाकई एक अच्छी और प्रेरक पहल है। आम लोग जब तक नदियों से सीधे नहीं जुड़ेंगे, उनके प्रति श्रद्धा भाव नहीं नहीं लाएंगे, तब तक इनकी स्थिति सुधरने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। आज देश में जीवनदायिनी अधिकांश नदियां आखरी सांसें ले रही हैं। ऐसे में बैतूल में पहले मां ताप्ती और अब माचना मैया का जन्मोत्सव मनाया जाना एक सार्थक पहल है।
माचना नदी आमला के समीप ग्राम ससाबड़ के निकट उद्गम स्थल से निकलकर लगभग 180 किलोमीटर की दूरी तय कर ढोढरामोहर के पास तवा नदी में मिलती है। जिसके किनारे बसे गांवों के ट्यूबवेल वर्ष भर पानी देते हैं। लेकिन, एक चिंता की बात यह है कि देखते ही देखते इसका जलस्तर कम होता चला गया है। अभी गर्मी के पूर्व ही बहाव कम हो गया है। पानी हरे रंग की कई वाले पानी में तब्दील हो चुका है। आज से 15-20 बरस पूर्व तक यह नदी पूरे वर्ष भर बहती थी। जिसका कारण किनारों पर सघन वन था। धीरे-धीरे वन क्षेत्र समाप्त होकर मैदान बन गए हैं।
ऐसे में माचना मैया को पहले की तरह वर्ष भर सदानीरा बनाने के लिए चिंतन, मंथन करने के साथ ही उचित रणनीति बनाकर उसे अमली जामा भी पहनाना होगा। अच्छी और सुखद बात यह है कि कुछ संस्थाओं ने इसकी चिंता की है। कुछ कार्य प्रारंभ भी हुए हैं। जरूरत है कि जन-जन इसे अपना अभियान बनाएं और इस तरह के हर प्रयास को समर्थन और सहयोग प्रदान करें ताकि किनारों पर बसे प्रत्येक गांव में सघन वन एक बार फिर से विकसित हो सके।



