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school bag policy : एमपी में लागू हुई स्कूल बैग पॉलिसी, हर कक्षा के लिए बैग का वजन तय, देखें किस कक्षा के लिए कितना रहेगा बैग का वजन; होमवर्क का भी समय निर्धारित

School bag policy in mp
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▪️ उत्तम मालवीय, बैतूल

अब एमपी में स्कूली बच्चों को भारी भरकम बैग (heavy school bag) नहीं ढोना पड़ेगा। इसके साथ ही स्कूल से लौटकर घर पर पूरे समय होमवर्क करने में ही नहीं जुटे रहना पड़ेगा। मध्यप्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग (school education department) मंत्रालय ने स्कूल बैग पॉलिसी (school bag policy) लागू कर दी है। इसमें यह तय कर दिया है कि किस कक्षा के बच्चे के लिए बैग का वजन कितना होगा। इसके साथ ही यह भी निर्धारित कर दिया है कि किस कक्षा के बच्चे को कितने समय का होमवर्क (homework limit fix) दिया जाएगा।

मध्यप्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के उप सचिव प्रमोद सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। जारी आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की दृष्टि से मानव संसाधन विकास मंत्रालय, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार के परिपत्र द्वारा जारी स्कूल बैग पॉलिसी 2020 के परिपालन में प्रदेश के समस्त शासकीय/अशासकीय एवं अनुदान प्राप्त शालाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों के स्कूल बैग हेतु दिशा-निर्देश प्रसारित किए जाते हैं। इसके तहत विद्यार्थियों के लिए कक्षावार पुस्तकों का वजन निम्नानुसार निर्धारित किया जाता है –

  • पहली के लिए 1.6 से 2.2 किलोग्राम
  • दूसरी के लिए 1.6 से 2.2 किलोग्राम
  • तीसरी के लिए 1.7 से 2.5 किलोग्राम
  • चौथी के लिए 1.7 से 2.5 किलोग्राम
  • पांचवीं के लिए 1.7 से 2.5 किलोग्राम
  • छटवी के लिए 2.0 से 3.0 किलोग्राम
  • सातवी के लिए 2.0 से 3.0 किलोग्राम
  • आठवी के लिए  2.5 से 4.0 किलोग्राम
  • नौवी के लिए 2.5 से 4.5 किलोग्राम
  • दसवीं के लिए  2.5 से 4.5 किलोग्राम
  • ग्यारहवीं के लिए शाला प्रबंध समिति द्वारा विषय स्ट्रीम के आधार पर तय।
  • बारहवी के लिए शाला प्रबंध समिति द्वारा विषय स्ट्रीम के आधार पर तय।

राज्य शासन द्वारा निर्धारित एवं NCERT द्वारा नियत पाठ्यपुस्तकों से अधिक पुस्तकें विद्यार्थियों के बस्ते में नहीं होना चाहिए। कक्षा 2 तक के विद्यार्थियों को कोई भी गृह कार्य नहीं दिया जाए, जबकि कक्षा 3 से 5वीं तक के विद्यार्थियों को प्रति सप्ताह अधिकतम 2 घंटे कक्षा 6 से 8वीं तक के छात्रों को प्रतिदिन अधिकतम 1 घंटे और कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को प्रतिदिन अधिकतम 2 घंटे का ही गृह कार्य दिया जाए।

नोटिस बोर्ड पर देना होगा जानकारी

प्रत्येक स्कूल को नोटिस बोर्ड एवं कक्षा कक्ष में बस्ते के वजन का चार्ट प्रदर्शित करना होगा। स्कूल डायरी का वजन भी बस्ते के वजन में ही सम्मिलित किया जाए। शाला प्रबंधन समिति के द्वारा ऐसी समय सारणी तैयार की जाए जिससे विद्यार्थियों को प्रतिदिन सभी पुस्तकें/अभ्यास पुस्तिकाएं/कापियां नहीं लानी पड़ें और बस्ते का वजन निर्धारित सीमा से अधिक न हो।

बिना पुस्तकों के लगेगी इन विषयों की कक्षाएं

शाला प्रशासन/प्रबंधन समिति कक्षा 8वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अभ्यास पुस्तिकाओं / वर्कबुक एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों को शाला में ही रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। कम्प्यूटर, नैतिक शिक्षा एवं सामान्य ज्ञान के लिए कक्षाएं बिना पुस्तकों के लगाई जाए। स्वास्थ्य शारीरिक शिक्षा, खेल एवं कला की कक्षाएं भी बिना पुस्तकों के लगाई जाए।

स्कूल बैग की ऐसी होना चाहिए क्वालिटी

स्कूल बैग हल्के वजन के हो, जो कि दोनों कंधों पर आसानी से फीट हो सके। विद्यार्थियों को शाला में ट्रॉली बैग लाने की अनुमति नहीं होगी। पालकों के साथ संवाद के लिए शिक्षक डिजिटल माध्यम का प्रयोग करें। समय-समय पर स्कूल बैग के वजन की चर्चा मिडिया और शाला प्रबंधन समिति के साथ की जाए जिससे सभी हितग्राही बस्ते के वजन के संबंध में जागरूक हो सके।

एक दिन बिना बैग के स्कूल जायेंगे बच्चे

सप्ताह में एक दिन बैग विहीन दिवस होगा। इस दिवस व्यवसायिक कार्यानुभव से संबंधित गतिविधियां कराई जाए। जिला शिक्षा अधिकारी अपने जिले में रैंडमली शालाओं का चयन कर प्रत्येक तीन माह में स्कूल बैग के वजन की जाँच करेंगे और बस्ते का वजन निर्धारित सीमा में हो, यह सुनिश्चित करेंगे। उक्त आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील माना जाएगा।

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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