और कितना विकास चाहिए साहब… यहां आज भी गर्भवती महिलाओं और मरीजों को खटिया पर लिटाकर कराना पड़ता है बाढ़ के बीच नदी पार
• नवील वर्मा, शाहपुर
Crossing the river carrying patients on cots : पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। हर घर तिरंगा अभियान के तहत शहरों से लेकर दूरदराज के ग्रामीण अंचलों तक तिरंगा लहरा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर आज भी जिले के कई गांवों के लोग बुनियादी सुविधाएं तक से वंचित हैं। बैतूल में ऐसे गांवों की आज भी बड़ी संख्या है जहां तक बारिश में वाहन पहुंचना तो दूर, पैदल पहुंचना भी मुश्किल है। ऐसे में इन गांवों में बीमार हो जाए तो इनका भगवान ही मालिक है।
सड़क, पुल जैसी सुविधा के अभाव में इन गांवों के लोग बारिश की शुरुआत के साथ ही अपने ही गांव और घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं। अस्पताल तक नहीं पहुंच पाने से पहले कई लोग असमय ही जान गवां बैठते थे। वहीं आज भी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। गंभीर बीमारों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करवाना होता है। मूलभूत सुविधाओं वंचित एक ऐसा ही गांव है बैतूल जिले के शाहपुर ब्लॉक का जामुनढाना।
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आजादी के इतने सालों बाद भी यहां की नदी पर एक पुलिया तक नहीं बन सकी है। ऐसे में ग्राम पंचायत पावरझंडा के अन्तर्गत आने वाले ग्राम जामुनढाना में आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। ऐसे में यदि कोई गंभीर बीमार हो जाए तो ग्रामीणों को मरीजों को खटिया पर लिटाकर नदी पार कराना होता है। बुधवार को भी यहां ऐसी ही स्थिति बनी।
प्रसव पीड़ा से एक गर्भवती महिला कराह रही थी। ऐसे में उक्त महिला को खटिया पर लिटाकर नदी पार करवाई। ग्रामीणों के मुताबिक वर्षों से यह समस्या होने के बाद भी अब तक प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं हो सकी है। संबंधित स्थान पर पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण पहले भी शिकायत कर चुके हैं। लेकिन, समस्या अब भी जस की तस है। देखें वीडियो…
जयस के ब्लॉक प्रवक्ता अंकुश कवड़े ने कहा कि शासन और प्रशासन ग्रामीणों की समस्या की अनदेखी कर रहा है। पूर्व में भी इस समस्या से प्रशासन को अवगत किया जा चुका है। जयस के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश धुर्वे ने कहा कि आज देश आजादी की 75 वी वर्षगांठ मना रहा है, फिर भी ग्रामीण अपनी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।



