barish me bhi jal sanakat : बारिश शुरू हो गई फिर भी जूझ रहे जल संकट से, पांच में से चार हैंडपंप खराब, कुएं के पानी से बीमारी का डर

◼️ उत्तम मालवीय, बैतूल
बारिश शुरू होने के बाद जल संकट से जूझ रहे अधिकांश क्षेत्रों में भले ही समस्या से निजात मिल गई हो, लेकिन भीमपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बाटलाखुर्द में ऐसा नहीं है। यहां के पटेलढाना के बासिंदे अभी भी जल संकट से जूझने को मजबूर हैं। उनकी समस्या का निराकरण करने में पीएचई विभाग जरा भी रूचि नहीं ले रहा है। नतीजतन, उन्हें कुएं का पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश में कुएं का पानी पीने से बीमारी फैलने का डर भी ग्रामीणों को बना है।
पटेल ढाना में करीब 150 मकान हैं। इनके लिए पानी की व्यवस्था के लिए ढाने में 5 हैंडपंप खनन कराए गए हैं। लंबे समय से इनमें से 4 हैंडपंप बंद पड़े हैं। यह हैंडपंप हरिराम बज्जू, अर्जुन मांगीलाल, सियाराम मोगीलाल और हीरालाल काढ़मा के घर के पास वाले हैं। यही नहीं नल-जल का कनेक्शन भी खराब पड़ा है। इससे उससे भी पानी नहीं मिल रहा है। इन हालातों में गांव में एकमात्र हैंडपंप ही चालू है। इस इकलौते हैंडपंप के ही चालू होने के कारण इस पर दिन भर भीड़ लगी रहती है।

भाजपा के दामजीपुरा मंडल के मीडिया प्रभारी अनिल मोरे बताते हैं कि हैंडपंप खराब होने की शिकायत ग्रामवासी कई बार पीएचई विभाग के अधिकारियों से कर चुके हैं। इसके बावजूद आज तक अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। यही कारण है कि लंबे समय से ग्रामीण परेशानी झेलने को मजबूर हैं। यही कारण है कि अब ग्रामीण कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस से शिकायत करने का मन बना रहे हैं।
कुएं से पानी लाने की मजबूरी
ग्रामीण बताते हैं कि एक ही हैंडपंप चालू रहने के कारण उस पर दिन भर भीड़ लगी रहती है। इसके चलते बारी आने में काफी समय लगता है। यही कारण है कि ग्रामीण गांव के आसपास खेतों में स्थित खेतों से पानी लाकर काम चलाने को विवश हैं। उनका कहना है कि बारिश शुरू हो जाने के बाद भी वे पानी के लिए उसी तरह परेशान हैं, जैसे कि गर्मी के मौसम में थे।

बीमार होने का भी सता रहा डर
मीडिया प्रभारी अनिल मोरे कहते हैं कि वर्षा होने पर कुओं में खेतों का जमा होता है। इससे कुएं का पानी भी दूषित और मटमैला हो जाता है। बारिश के मौसम में वैसे ही कई बीमारियों का डर बना रहता है। ऐसे में कुएं का पानी पीने से भी लोग बीमार हो सकते हैं। ग्रामीण मजबूरी में कुएं का पानी पी तो रहे हैं, लेकिन उन्हें यह डर भी हमेशा सताते रहता है कि वे कहीं बीमार न पड़ जाएं। ग्रामीणों ने कलेक्टर श्री बैंस से मांग की है कि वे जल्द से जल्द उनके गांव के बंद पड़े हैंडपंपों का विभाग से सुधार करवाएं।



