court decision : ग्रामीण की मौत के मामले में झोलाछाप डॉक्टर को 2 साल की सजा, एडीजे कोर्ट ने यथावत रखा जेएमएफसी कोर्ट का निर्णय

बैतूल जिले के मुलताई थाना क्षेत्र अंतर्गत प्रभातपट्टन ब्लाक के ग्राम तेलिया निवासी ग्रामीण का झोलाछाप डॉक्टर द्वारा लापरवाही पूर्वक उपचार करने के चलते ग्रामीण की मौत होने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने आरोपी डॉक्टर को दोषी ठहराते हुए 2 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया था।
न्यायालय के निर्णय से व्यथित होकर आरोपी ने तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में अपील प्रस्तुत की थी। अपर सत्र न्यायालय ने अपील की सुनवाई उपरांत आरोपी को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा दी गई सजा को यथावत रखने के आदेश दिए हैं।
सरकारी वकील राजेश साबले ने बताया 4 जुलाई 2015 को ग्राम तेलिया निवासी ग्रामीण देवमन ऊइके को बुखार आया था। ग्राम इटावा निवासी डॉक्टर दीपांकर चक्रवर्ती ने देवमन का उपचार करने के दौरान कमर पर इंजेक्शन लगाया था। इंजेक्शन लगाने के बाद देवमन के पैर में सूजन आ गई थी दर्द होने लगा था। दूसरे दिन देवमन ने दीपांकर को दिखाया लेकिन आराम नहीं मिला।
इस स्थिति में परिजन देवमन को उपचार के लिए वरुड (महाराष्ट्र) के निजी अस्पताल में उपचार के लिए लेकर गए थे। जहां से नागपुर के अस्पताल रेफर किया गया था। नागपुर के अस्पताल में उपचार के दौरान 10 जुलाई को देवमन की मौत हो गई थी। सूचना पर मुलताई पुलिस ने विवेचना उपरांत डॉक्टर दीपांकर चक्रवर्ती के खिलाफ धारा 304-ए और मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद की धारा 24 के तहत केस दर्ज कर प्रकरण न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के न्यायालय में प्रस्तुत किया था।
न्यायाधीश ने प्रकरण की सुनवाई उपरांत आरोपी दीपांकर पिता मनोरंजन चक्रवर्ती (36) मूल निवासी अनंतपुर जिला नांदिया पश्चिम बंगाल हाल मुकाम निवासी इटावा को धारा 304-ए के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार रूपए प्रतिकर, मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 की धारा 24 के तहत दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रूपए के अर्थदंड से दंडित किया था।
आरोपी ने न्यायालय के निर्णय से व्यथित होकर तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में अपनी प्रस्तुत की थी। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने अपील की सुनवाई उपरांत अधीनस्थ न्यायालय द्वारा 22 दिसंबर 2021 को दिए गए निर्णय में किसी प्रकार की त्रुटिकारित नहीं होने का उल्लेख करते हुए अपील सारहीन होने से निरस्त करने का निर्णय सुनाया है।



