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बेमिसाल : सूखे-जर्जर पेड़ पर बिखेरा कला का जादू, बनाई ऐसी गिलहरी, जिसे देख कर लगता है कि अभी उछल पड़ेगी


• उत्तम मालवीय, बैतूल
कला और कलाकार उन बिलकुल फालतू लगने वाली वस्तुओं में भी जान डाल सकते हैं जिन्हें एक आम व्यक्ति किसी काम का नहीं समझता। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण इन दिनों बैतूल शहर के सर्किट हाउस के गेट पर देखा जा सकता है। यहां स्थित एक पेड़ पूरी तरह सूख कर जर्जर हो चुका था। उसे देखकर लोग यही कहते नजर आते थे कि इसे काट क्यों नहीं दिया जाता। लेकिन अब वही पेड़ लोगों के आकर्षण और उत्सुकता का केंद्र बन गया है।

इसकी वजह है इस पेड़ पर नक्काशी कर बनाई गई आकर्षक गिलहरी। यह अब हर राहगीर का ध्यान सहज ही आकर्षित कर रही है। दरअसल, बच्चों को कुछ नया सिखाने और शहर में कुछ विशेष करने के उद्देश्य से सूखे पेड़ को एक नया रूप दिया गया है। सूखे पेड़ अपने आप में एक लंबा समय बिता चुके हैं। उन्हें सूखने के बाद नष्ट करना उचित नहीं है।

पेड़ों को सूखने के बाद लोगों द्वारा काट लिया जाता है या वह खुद सड़ जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में उन पर कलाकृति बनाकर उनको बचाया जा सकता है। यह विचार युवा चित्रकार व कला गुरु श्रेणिक जैन के दिमाग में आया। इसके बाद श्रेणिक जैन ने अपनी टीम में खेड़ी से उमा सोनी, पायल सोलंकी, देवेंद्र अहिरवार को शामिल कर इस विचार को मूर्त रूप दे दिया।

श्रेणिक और उनकी टीम ने नगर पालिका सीएमओ अक्षत बुंदेला से परमिशन ली और सूखे पड़े पेड़ पर नक्काशी कर एक खूबसूरत गिलहरी की आकृति दे दी। यह अपने आप में एक बेहद खूबसूरत कलाकृति बन गई है। श्रेणिक बताते हैं कि इस गतिविधि का उद्देश्य उभरते कलाकारों को नया कुछ सिखाना और साथ ही बैतूल को एक नई पहचान दिलाना है। पूरी लगन और कड़ी मेहनत से अगर कोई कार्य किया जाए तो वह संभव है।

उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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